नालंदा विश्वविद्यालय ने मंगोलिया के गंदन मठ और NUM से किए MOU, बौद्ध अध्ययन व शोध सहयोग को मिलेगी नई दिशा
सारांश
मुख्य बातें
नालंदा विश्वविद्यालय ने 8 और 9 जून 2026 को उलानबटार, मंगोलिया में आयोजित समारोहों के दौरान मंगोलिया के दो प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर किए, जिससे भारत और मंगोलिया के बीच शैक्षणिक, सांस्कृतिक और बौद्ध अध्ययन के क्षेत्र में सहयोग के नए द्वार खुलेंगे। यह पहल प्राचीन नालंदा की ज्ञान-परंपरा को वैश्विक स्तर पर पुनर्जीवित करने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।
पहला समझौता: गंदन मठ के साथ बौद्ध विरासत की साझेदारी
8 जून को उलानबटार स्थित ऐतिहासिक गंदनतेगचिनलेन मठ (गंदन मठ) में पहले MOU पर हस्ताक्षर हुए। नालंदा विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी और गंदन मठ की ओर से सर्वोच्च धर्माध्यक्ष गेशे ल्हारम्पा जावज़ंदोरज दुलमरागचा (खाम्बा नोमुन खान) ने दस्तखत किए। इस अवसर पर लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, मंगोलिया में भारत के राजदूत अतुल मल्हारी गोटसुरवे, अरखंगाई प्रांत के गवर्नर बी. त्सेरेननादमिद, भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और विभिन्न मठों के भिक्षु उपस्थित रहे।
यह साझेदारी सदियों पुरानी साझी बौद्ध विरासत की नींव पर टिकी है। इसके तहत संयुक्त अनुसंधान, शैक्षणिक आदान-प्रदान, संयुक्त प्रकाशन और सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। दुर्लभ बौद्ध पांडुलिपियों के अध्ययन, संरक्षण और प्रसार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि प्राचीन ज्ञान-परंपरा भावी पीढ़ियों तक पहुँच सके।
दूसरा समझौता: नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ मंगोलिया के साथ अकादमिक सहयोग
9 जून को उलानबटार स्थित नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ मंगोलिया (NUM) के परिसर में दूसरे MOU पर हस्ताक्षर हुए। नालंदा विश्वविद्यालय की ओर से प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी और NUM की ओर से उपाध्यक्ष (अनुसंधान एवं सहयोग) प्रोफेसर बातारचुलून त्सेरमा ने समझौते पर दस्तखत किए। दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधि भी इस अवसर पर उपस्थित थे।
यह अकादमिक साझेदारी धर्म अध्ययन, बौद्ध दर्शन, संस्कृति एवं कला, इतिहास, पारिस्थितिकी, संस्कृत, तिब्बती भाषा तथा व्यापार एवं आर्थिक इतिहास जैसे विविध क्षेत्रों को समेटती है। इसके अंतर्गत संकाय और छात्र आदान-प्रदान, संयुक्त शोध परियोजनाएं, शैक्षणिक कार्यक्रम और ज्ञान-साझाकरण की पहलें संचालित की जाएंगी।
कुलपति की प्रतिक्रिया
प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी ने कहा, 'इन साझेदारियों का असली फायदा छात्रों और रिसर्चर्स को मिलेगा और इससे उनकी पढ़ाई का अनुभव और बेहतर होगा। भारत और मंगोलिया के बीच बना ज्ञान का यह पुल ग्लोबल लर्निंग और रिसर्च के नए रास्ते खोलेगा।' उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम नालंदा की उस प्राचीन भावना को आगे बढ़ाता है, जो आज के छात्रों को एक जिम्मेदार वैश्विक नागरिक बनाती है, ताकि वे दुनिया में शांति और विकास के लिए काम कर सकें।
व्यापक संदर्भ और आगे की राह
गौरतलब है कि राजगीर, बिहार में स्थित नालंदा विश्वविद्यालय को प्राचीन नालंदा महाविहार की विरासत को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था, जो कभी एशिया के सबसे बड़े ज्ञान केंद्रों में से एक था। मंगोलिया के साथ ये समझौते ऐसे समय में हुए हैं जब भारत अपनी 'एक्ट ईस्ट' नीति के तहत एशियाई देशों के साथ सांस्कृतिक और शैक्षणिक संबंध मजबूत करने पर ज़ोर दे रहा है। बौद्ध धर्म दोनों देशों के बीच एक मजबूत सांस्कृतिक सेतु का काम करता है, और इन MOU से यह संबंध अब संस्थागत रूप लेगा। आने वाले महीनों में संयुक्त शोध परियोजनाओं और छात्र-संकाय आदान-प्रदान कार्यक्रमों की शुरुआत अपेक्षित है।