बुलंदशहर मंदिर चोरी गैंग का आरोपी हिमांशु मुठभेड़ में गिरफ्तार, पुलिस की जवाबी गोली से पैर घायल
सारांश
मुख्य बातें
बुलंदशहर के जहांगीराबाद थाना क्षेत्र में मंदिरों में चोरी करने वाले गिरोह के सक्रिय सदस्य हिमांशु को 19 मई 2026 को पुलिस मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया। मुठभेड़ के दौरान पुलिस की जवाबी कार्रवाई में आरोपी के पैर में गोली लगी और उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस के अनुसार आरोपी पर पहले से 25 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।
मुठभेड़ की पूरी घटना
घटना जसर बम्बे पुलिया के पास हुई, जब पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि मंदिर चोरी गिरोह का सदस्य हिमांशु इलाके में सक्रिय है। चेकिंग अभियान के दौरान पुलिस टीम ने एक संदिग्ध बाइक सवार को रोकने का संकेत दिया, तो आरोपी ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। आत्मरक्षा में पुलिस ने जवाबी गोली चलाई, जिससे आरोपी के पैर में गोली लगी और वह घायल होकर गिर गया।
आरोपी की पहचान और आपराधिक पृष्ठभूमि
गिरफ्तार आरोपी की पहचान हिमांशु पुत्र प्रहलाद के रूप में हुई है, जो आहार थाना क्षेत्र के गांव सियाली नगर का निवासी है। पुलिस के अनुसार हिमांशु एक शातिर अपराधी है और उस पर पहले से 25 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। उसके कब्जे से 400 ग्राम चांदी, एक चोरी की बाइक और एक अवैध असलहा बरामद किया गया है।
मंदिर चोरी गिरोह पर पुलिस की कार्रवाई
बुलंदशहर देहात के पुलिस अधीक्षक अंतरिक्ष जैन ने बताया, 'कुछ दिनों पहले जहांगीराबाद क्षेत्र में दो मंदिरों में चोरी हुई थी। चांदी का छत्र, चांदी का मुकुट, इनवर्टर बैटरी और नकदी चोरी हुई थी।' उन्होंने बताया कि सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी सर्विलांस की मदद से गिरोह के दो अन्य सदस्यों — अंकित पुत्र सतपाल सिंह और रसिक पुत्र कमल सिंह — को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका था।
एसपी जैन ने आगे बताया कि पूछताछ में दोनों ने हिमांशु के साथ कई अन्य चोरियों में शामिल होने की बात स्वीकार की, जिसके बाद हिमांशु की तलाश तेज की गई। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में धार्मिक स्थलों पर चोरी की घटनाओं को लेकर पुलिस पर दबाव बढ़ा हुआ है।
बरामदगी और आगे की जांच
पुलिस ने इस मुठभेड़ को मंदिर चोरों के खिलाफ बड़ी सफलता बताया है। हिमांशु के दोनों साथी पहले ही जेल भेजे जा चुके हैं। अब पुलिस इस गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों और चोरी के सामान के ठिकाने का पता लगाने में जुटी है। गौरतलब है कि इस गिरोह की गतिविधियाँ एक से अधिक थाना क्षेत्रों में फैली हुई थीं, जो इसकी संगठित प्रकृति को दर्शाता है।