कैट की माँग: दिल्ली के बाहरी इलाकों में बनें निर्धारित प्रदर्शन स्थल, 26 अक्टूबर को व्यापारियों की बैठक
सारांश
मुख्य बातें
कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने 25 अक्टूबर 2026 को सरकार से माँग की कि नई दिल्ली के बाहरी इलाकों में विरोध-प्रदर्शनों और रैलियों के लिए निर्धारित स्थल बनाए जाएँ, ताकि लोकतांत्रिक अधिकारों और व्यापारिक गतिविधियों के बीच संतुलन बना रहे। मध्य दिल्ली में लगातार हो रहे धरनों और प्रदर्शनों से व्यावसायिक गतिविधियाँ बाधित हो रही हैं, जिससे व्यापारी वर्ग में गहरी नाराज़गी है।
मुख्य घटनाक्रम
कैट के बयान के अनुसार, सेंट्रल दिल्ली में बार-बार होने वाले विरोध-प्रदर्शनों से ग्राहकों की आवाजाही, परिवहन, सामान की डिलीवरी और रोज़मर्रा की व्यावसायिक गतिविधियाँ बाधित हो रही हैं। संगठन ने कहा, 'छोटे व्यापारी, रेहड़ी-पटरी वाले, दिहाड़ी मज़दूर और सेवा प्रदाता सबसे ज़्यादा प्रभावित होते हैं, क्योंकि उनके परिवारों का गुज़ारा दैनिक कमाई पर निर्भर करता है।'
इस माँग के समर्थन में दिल्ली के कई व्यापारिक संगठनों ने 25 अक्टूबर से संयुक्त रूप से एक ऑनलाइन याचिका शुरू की है, जिसका उद्देश्य जन-भागीदारी बढ़ाना है।
26 अक्टूबर की बैठक और रणनीति
कैट ने 26 अक्टूबर को दिल्ली के व्यापारिक नेताओं की एक ऑनलाइन बैठक बुलाई है, जिसमें शहर के सभी हिस्सों के व्यापारिक संगठनों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। बैठक में इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा, संभावित समाधान और माँग को आगे बढ़ाने के लिए सामूहिक रणनीति तैयार करने पर विचार किया जाएगा।
दिल्ली की अर्थव्यवस्था पर असर
व्यापारिक नेताओं ने रेखांकित किया कि दिल्ली देश के सबसे बड़े व्यापारिक और वितरण केंद्रों में से एक है। यहाँ की अर्थव्यवस्था मुख्यतः व्यापार, थोक एवं खुदरा बाज़ारों, परिवहन, लॉजिस्टिक्स और सेवा क्षेत्र पर टिकी है।
उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली न तो कृषि-आधारित राज्य है और न ही औद्योगिक उत्पादन पर निर्भर। ऐसे में प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों में बाधा उत्पन्न होने से न केवल स्थानीय कारोबार प्रभावित होता है, बल्कि देशभर में वस्तुओं की आवाजाही और आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।
व्यापारियों का रुख: अधिकार बनाम आजीविका
व्यापारिक नेताओं ने स्पष्ट किया कि उन्हें शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शनों से कोई आपत्ति नहीं है। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण विरोध एक महत्त्वपूर्ण लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन कारोबार करने, आजीविका कमाने और परिवार का भरण-पोषण करने का अधिकार भी उतना ही महत्त्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि इस पहल का मकसद दिल्ली के कारोबारी माहौल की सुरक्षा और शहर के आर्थिक तंत्र पर निर्भर लाखों लोगों की आजीविका की रक्षा करना है। आगे 26 अक्टूबर की बैठक में लिए गए निर्णयों के आधार पर सरकार को औपचारिक ज्ञापन सौंपे जाने की भी संभावना है।