कलकत्ता हाईकोर्ट का स्वतः संज्ञान: माकपा नेता सायन बनर्जी पर अंडे फेंकने पर केस दर्ज का निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
कलकत्ता हाईकोर्ट ने शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर जिला अदालत परिसर में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के नेता सायन बनर्जी पर अंडे फेंके जाने की घटना का स्वतः संज्ञान लिया और रजिस्ट्रार जनरल को बिना देरी औपचारिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया। अदालत परिसर के भीतर एक वकील पर हुए इस हमले ने न्यायिक परिसरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुनवाई और अदालत के निर्देश
मुख्य न्यायाधीश रवींद्र विठ्ठलराव घुगे और जस्टिस ओम नारायण राय की खंडपीठ ने शुक्रवार दोपहर इस मामले पर सुनवाई की। पीठ ने अधिवक्ता सैकत बनर्जी को मामले में एमिकस क्यूरी — अर्थात अदालत का निष्पक्ष सहायक सलाहकार — नियुक्त किया।
अदालत ने सायन बनर्जी के वकील सब्यसाची बनर्जी को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही बारुईपुर पुलिस जिले के पुलिस अधीक्षक और संबंधित जिला न्यायाधीश से रिपोर्ट तलब की। मामले की अगली सुनवाई अक्टूबर के पहले सप्ताह में निर्धारित की गई है।
मुख्य न्यायाधीश की कड़ी टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश घुगे ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यदि अदालत परिसर के भीतर किसी वकील पर हमला हो सकता है, तो भविष्य में दूसरे लोगों को भी इसी तरह के खतरे का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ऐसी घटनाएँ स्वीकार्य नहीं हैं और इन्हें दोबारा होने से रोकना अनिवार्य है।
गौरतलब है कि सायन बनर्जी स्वयं पेशे से वकील हैं — जो इस घटना को और अधिक संवेदनशील बनाता है, क्योंकि एक अधिवक्ता अदालत परिसर में अपने पेशेवर दायित्व निभाते हुए हमले का शिकार हुआ।
घटनाक्रम: क्या हुआ बारुईपुर में
इस सप्ताह की शुरुआत में सायन बनर्जी स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के कार्यकर्ताओं की पैरवी के लिए बारुईपुर अदालत पहुँचे थे। SFI, माकपा की छात्र इकाई है। इन कार्यकर्ताओं को दक्षिण 24 परगना के भांगर कॉलेज में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं के साथ हुई झड़प के बाद गिरफ्तार किया गया था।
जिला अदालत ने बनर्जी की दलीलें सुनने के बाद गिरफ्तार SFI कार्यकर्ताओं को जमानत दे दी। इसके बाद सायन बनर्जी ने आरोप लगाया कि अदालत परिसर में मौजूद ABVP कार्यकर्ताओं ने उनके विरुद्ध विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू की और फिर उन पर अंडे फेंके गए। उनके अनुसार, इस दौरान उनके सहायकों पर भी हमला किया गया।
बनर्जी ने यह भी आरोप लगाया कि इसके बाद माकपा के पद्मपुकुर पार्टी कार्यालय के सामने भी उन पर दूसरी बार अंडे फेंके गए — यानी कथित तौर पर एक ही दिन में दो अलग-अलग स्थानों पर उन्हें निशाना बनाया गया।
आम जनता और वकीलों पर असर
इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल के अदालत परिसरों की सुरक्षा को लेकर वकीलों के बीच गहरी चिंता उत्पन्न हो गई है। यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में छात्र संगठनों के बीच टकराव की घटनाएँ बढ़ती प्रतीत हो रही हैं। न्यायिक परिसर, जो स्वतंत्र विधिक प्रक्रिया का प्रतीक होते हैं, उनकी पवित्रता पर इस तरह के हमले की पृष्ठभूमि में कलकत्ता हाईकोर्ट का स्वतः संज्ञान लेना असाधारण न्यायिक सक्रियता का संकेत है।
आगे क्या होगा
अक्टूबर के पहले सप्ताह में होने वाली अगली सुनवाई में अदालत पुलिस अधीक्षक और जिला न्यायाधीश की रिपोर्ट तथा सब्यसाची बनर्जी के हलफनामे पर विचार करेगी। इसके आधार पर आगे के निर्देश जारी किए जाएँगे। यह मामला पश्चिम बंगाल में न्यायिक परिसरों की सुरक्षा और राजनीतिक दलों के छात्र संगठनों के बीच बढ़ते टकराव की व्यापक तस्वीर को भी उजागर करेगा।