कंबोडिया का साइबर फ्रॉड नेटवर्क पर कड़ा प्रहार: ₹2,500 करोड़ से अधिक की संपत्ति फ्रीज, 30,000 गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
कंबोडिया सरकार ने ऑनलाइन ठगी नेटवर्क के विरुद्ध चलाए गए व्यापक अभियान के तहत 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर (लगभग ₹2,500 करोड़) से अधिक की संदिग्ध संपत्ति फ्रीज कर दी है। एड-हॉक कमीशन फॉर कॉम्बैटिंग ऑनलाइन स्कैम्स (CCOS) ने 2 सितंबर 2026 को जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में यह जानकारी दी। यह कार्रवाई दक्षिण-पूर्व एशिया में साइबर अपराध के विरुद्ध अब तक की सबसे बड़ी समन्वित कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।
मुख्य घटनाक्रम
CCOS के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2025 से अगस्त 2026 के बीच चले इस देशव्यापी अभियान में कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने 663 ऑनलाइन ठगी गिरोहों पर छापेमारी की और 39 देशों के करीब 30,000 संदिग्धों को गिरफ्तार किया। इसके साथ ही 29 देशों के 3,927 आरोपियों के खिलाफ 446 मामले अदालत में भेजे गए हैं, जिनमें गिरोह के सरगना और उनके सहयोगी दोनों शामिल हैं।
अभियान के दौरान 793 संदिग्ध स्थानों की जांच की गई, जिनमें से 624 ठिकानों पर सीधी कार्रवाई की गई। इन ठिकानों में किराये के कमरे, गेस्टहाउस, निजी मकान, वाहन और कॉफी शॉप जैसे छोटे व गुप्त स्थान शामिल थे।
कैसीनो लाइसेंस पर कार्रवाई
अभियान के दायरे में 27 कैसीनो भी आए। इनमें से 18 कैसीनो के लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिए गए, जबकि 9 कैसीनो के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं। यह कदम इस बात का संकेत है कि साइबर ठगी नेटवर्क और अवैध जुए के कारोबार के बीच गहरे संबंध थे।
विदेशी नागरिकों का बचाव और निर्वासन
CCOS प्रमुख और वरिष्ठ मंत्री छाय सिनारिथ ने बताया कि जुलाई 2025 से 20 अगस्त 2026 के बीच 58,266 विदेशी नागरिकों को बचाया और निर्वासित किया गया, जिनमें 7,282 महिलाएं शामिल थीं। इनमें से 22,045 लोग 38 देशों के थे और उन्हें ऑनलाइन ठगी नेटवर्क में सीधे शामिल पाया गया।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठन लंबे समय से कंबोडिया, म्यांमार और थाईलैंड में संचालित साइबर ठगी केंद्रों में मानव तस्करी की शिकायतें उठाते रहे हैं। बचाए गए लोगों में से कई को कथित तौर पर जबरन इन केंद्रों में काम कराया जा रहा था।
CCOS का दावा और ज़मीनी हकीकत
CCOS ने दावा किया है कि कंबोडिया में बड़े पैमाने पर संचालित होने वाले ऑनलाइन ठगी केंद्र पूरी तरह समाप्त कर दिए गए हैं। हालांकि आयोग ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ ठगी गतिविधियाँ अब छोटे और गुप्त ठिकानों से संचालित हो रही हैं, जो नेटवर्क के विकेंद्रीकरण की ओर इशारा करता है।
आगे की राह
यह अभियान दक्षिण-पूर्व एशिया में साइबर अपराध के विरुद्ध बढ़ती क्षेत्रीय सहयोग की प्रवृत्ति का हिस्सा है। 39 देशों की भागीदारी यह दर्शाती है कि ऑनलाइन ठगी नेटवर्क अब किसी एक देश की समस्या नहीं, बल्कि वैश्विक चुनौती बन चुकी है। आने वाले महीनों में कंबोडिया से अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ और अधिक समन्वित कार्रवाई की उम्मीद है।