सीबीआई का DGCA के पूर्व फ्लाइंग ट्रेनिंग डायरेक्टर कैप्टन अनिल गिल पर केस, 4 कंपनियों पर पक्षपात और भ्रष्टाचार के आरोप
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 4 अक्टूबर 2026 को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के पूर्व डायरेक्टर ऑफ फ्लाइंग ट्रेनिंग कैप्टन अनिल गिल और चार कंपनियों — ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड (BAGPL), रेडबर्ड एविएशन प्राइवेट लिमिटेड, साब्रेस कॉरपोरेट सॉल्यूशंस लिमिटेड और सैंडहिल्स एविएशन IFSC लिमिटेड — के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। आरोप है कि कैप्टन गिल ने अपने आधिकारिक नियामक पद का दुरुपयोग करते हुए चुनिंदा फ्लाइंग ट्रेनिंग संस्थाओं को अनुचित लाभ पहुंचाया और कथित बेनामी कंपनियों के जरिए भारी आर्थिक फायदा उठाया।
मुख्य आरोप
CBI की FIR के अनुसार, कैप्टन गिल पर अपने करीबी रिश्तेदारों द्वारा नियंत्रित कथित शेल और बेनामी कंपनियों के माध्यम से बाज़ार मूल्य से काफी कम कीमत पर प्रशिक्षण विमान खरीदने में मदद करने का आरोप है। इसके बाद इन विमानों को कथित तौर पर पसंदीदा फ्लाइंग ट्रेनिंग संगठनों (FTO) को ऊंची दरों पर लीज पर दिया गया, जिससे भारी मुनाफा कमाया गया।
जांच में सामने आया कि यह कार्य समान परिस्थितियों में काम करने वाले अन्य ऑपरेटरों की कीमत पर किया गया, जिन्हें प्रक्रिया में नुकसान और आर्थिक हानि उठानी पड़ी।
कंपनी नेटवर्क और पारिवारिक संबंध
BAGPL की स्थापना 2016 में हुई थी। कॉर्पोरेट रिकॉर्ड के अनुसार, इस कंपनी में कैप्टन गिल की माँ कमलेश गिल और मौसी संतोष कुमारी निदेशक थीं। बाद में उनके रिश्तेदार विकास नैन और दीपिका गिल भी कंपनी से जुड़े।
कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) में BAGPL की फाइलिंग में कैप्टन गिल का निजी ईमेल पता दर्ज था, जिसे जांचकर्ताओं ने कंपनी के प्रशासन में उनकी कथित भूमिका के साक्ष्य के रूप में रेखांकित किया है। इसी प्रकार साब्रेस कॉरपोरेट सॉल्यूशंस और सैंडहिल्स एविएशन IFSC में भी उनके रिश्तेदारों को निदेशक बनाए जाने का आरोप है।
विमान खरीद और लीज का मामला
FIR के अनुसार, BAGPL ने 2020 में 1975 मॉडल का सेसना विमान वीटी-ईयूसी मात्र ₹10 लाख में खरीदा। इसके बाद 2021 में 1981 मॉडल का विमान वीटी-एएवाई ₹37.5 लाख में खरीदा गया।
आरोप के मुताबिक वीटी-एएवाई पूरी तरह उड़ान योग्य था और उसके महज 123 इंजन घंटे थे, जबकि उसका अनुमानित बाज़ार मूल्य ₹75 लाख से ₹1 करोड़ के बीच था। दोनों विमानों को बाद में रेडबर्ड एविएशन एकेडमी प्राइवेट लिमिटेड को लीज पर दिया गया, जिसकी नियामकीय मंजूरी कैप्टन गिल ने खुद अपनी आधिकारिक भूमिका में दी थी। 2021 से अक्टूबर 2023 के बीच BAGPL को केवल रेडबर्ड एविएशन एकेडमी से ही ₹2.16 करोड़ से अधिक की लीज राशि प्राप्त हुई।
नियामकीय पक्षपात के आरोप
FIR में नियामकीय मंजूरी देने में भेदभाव का भी उल्लेख है। रेडबर्ड एविएशन एकेडमी को प्रारंभिक FTO मंजूरी एक महीने तीन दिन में दी गई, जबकि स्काईनेक्स एयरो प्राइवेट लिमिटेड और जेट सर्व एविएशन प्राइवेट लिमिटेड जैसी अन्य कंपनियों को इसी प्रक्रिया में चार से छह महीने लगे।
इसके अलावा, कैप्टन गिल पर सितंबर 2022 में उस चयन समिति की अध्यक्षता करने का आरोप है, जिसने उनके रिश्तेदार विकास नैन को डिप्टी चीफ फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर नियुक्त किया। इसके बाद विकास नैन को रेडबर्ड एविएशन एकेडमी में करीब ₹6.5 लाख प्रति माह के वेतन पर नौकरी मिली।
आगे क्या होगा
CBI के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर कैप्टन गिल, संबंधित कंपनियों, उनके निदेशकों और अन्य अज्ञात सरकारी कर्मचारियों एवं निजी व्यक्तियों के खिलाफ कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में पायलट प्रशिक्षण संस्थाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। जांच की दिशा और आगे होने वाली गिरफ्तारियों या चार्जशीट पर सभी की नज़रें टिकी हैं।