5 अक्टूबर 2026
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सीबीआई का DGCA के पूर्व फ्लाइंग ट्रेनिंग डायरेक्टर कैप्टन अनिल गिल पर केस, 4 कंपनियों पर पक्षपात और भ्रष्टाचार के आरोप

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सीबीआई का DGCA के पूर्व फ्लाइंग ट्रेनिंग डायरेक्टर कैप्टन अनिल गिल पर केस, 4 कंपनियों पर पक्षपात और भ्रष्टाचार के आरोप

सारांश

DGCA की नियामकीय कुर्सी का कथित निजी फायदे के लिए दुरुपयोग — CBI की FIR में कैप्टन अनिल गिल पर पारिवारिक कंपनियों के जरिए सस्ते विमान खरीद, महंगी लीज और पसंदीदा संस्थाओं को त्वरित मंजूरी देने के गंभीर आरोप हैं।

मुख्य बातें

CBI ने 4 अक्टूबर 2026 को DGCA के पूर्व डायरेक्टर ऑफ फ्लाइंग ट्रेनिंग कैप्टन अनिल गिल और 4 कंपनियों के खिलाफ FIR दर्ज की।
आरोप है कि कथित बेनामी कंपनियों के जरिए बाज़ार से कम कीमत पर विमान खरीदकर उन्हें ऊंची दरों पर लीज दी गई; ₹2.16 करोड़ से अधिक की लीज राशि मिली।
BAGPL में गिल की माँ कमलेश गिल , मौसी संतोष कुमारी और रिश्तेदार विकास नैन व दीपिका गिल के निदेशक होने का उल्लेख FIR में है।
रेडबर्ड एविएशन एकेडमी को FTO मंजूरी एक महीने तीन दिन में मिली, जबकि प्रतिस्पर्धी कंपनियों को चार से छह महीने इंतजार करना पड़ा।
कैप्टन गिल पर सितंबर 2022 में अपने रिश्तेदार विकास नैन की नियुक्ति वाली चयन समिति की अध्यक्षता करने का भी आरोप है; नैन को ₹6.5 लाख प्रति माह पर नियुक्ति मिली।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 4 अक्टूबर 2026 को नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के पूर्व डायरेक्टर ऑफ फ्लाइंग ट्रेनिंग कैप्टन अनिल गिल और चार कंपनियों — ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड (BAGPL), रेडबर्ड एविएशन प्राइवेट लिमिटेड, साब्रेस कॉरपोरेट सॉल्यूशंस लिमिटेड और सैंडहिल्स एविएशन IFSC लिमिटेड — के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। आरोप है कि कैप्टन गिल ने अपने आधिकारिक नियामक पद का दुरुपयोग करते हुए चुनिंदा फ्लाइंग ट्रेनिंग संस्थाओं को अनुचित लाभ पहुंचाया और कथित बेनामी कंपनियों के जरिए भारी आर्थिक फायदा उठाया।

मुख्य आरोप

CBI की FIR के अनुसार, कैप्टन गिल पर अपने करीबी रिश्तेदारों द्वारा नियंत्रित कथित शेल और बेनामी कंपनियों के माध्यम से बाज़ार मूल्य से काफी कम कीमत पर प्रशिक्षण विमान खरीदने में मदद करने का आरोप है। इसके बाद इन विमानों को कथित तौर पर पसंदीदा फ्लाइंग ट्रेनिंग संगठनों (FTO) को ऊंची दरों पर लीज पर दिया गया, जिससे भारी मुनाफा कमाया गया।

जांच में सामने आया कि यह कार्य समान परिस्थितियों में काम करने वाले अन्य ऑपरेटरों की कीमत पर किया गया, जिन्हें प्रक्रिया में नुकसान और आर्थिक हानि उठानी पड़ी।

कंपनी नेटवर्क और पारिवारिक संबंध

BAGPL की स्थापना 2016 में हुई थी। कॉर्पोरेट रिकॉर्ड के अनुसार, इस कंपनी में कैप्टन गिल की माँ कमलेश गिल और मौसी संतोष कुमारी निदेशक थीं। बाद में उनके रिश्तेदार विकास नैन और दीपिका गिल भी कंपनी से जुड़े।

कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) में BAGPL की फाइलिंग में कैप्टन गिल का निजी ईमेल पता दर्ज था, जिसे जांचकर्ताओं ने कंपनी के प्रशासन में उनकी कथित भूमिका के साक्ष्य के रूप में रेखांकित किया है। इसी प्रकार साब्रेस कॉरपोरेट सॉल्यूशंस और सैंडहिल्स एविएशन IFSC में भी उनके रिश्तेदारों को निदेशक बनाए जाने का आरोप है।

विमान खरीद और लीज का मामला

FIR के अनुसार, BAGPL ने 2020 में 1975 मॉडल का सेसना विमान वीटी-ईयूसी मात्र ₹10 लाख में खरीदा। इसके बाद 2021 में 1981 मॉडल का विमान वीटी-एएवाई ₹37.5 लाख में खरीदा गया।

आरोप के मुताबिक वीटी-एएवाई पूरी तरह उड़ान योग्य था और उसके महज 123 इंजन घंटे थे, जबकि उसका अनुमानित बाज़ार मूल्य ₹75 लाख से ₹1 करोड़ के बीच था। दोनों विमानों को बाद में रेडबर्ड एविएशन एकेडमी प्राइवेट लिमिटेड को लीज पर दिया गया, जिसकी नियामकीय मंजूरी कैप्टन गिल ने खुद अपनी आधिकारिक भूमिका में दी थी। 2021 से अक्टूबर 2023 के बीच BAGPL को केवल रेडबर्ड एविएशन एकेडमी से ही ₹2.16 करोड़ से अधिक की लीज राशि प्राप्त हुई।

नियामकीय पक्षपात के आरोप

FIR में नियामकीय मंजूरी देने में भेदभाव का भी उल्लेख है। रेडबर्ड एविएशन एकेडमी को प्रारंभिक FTO मंजूरी एक महीने तीन दिन में दी गई, जबकि स्काईनेक्स एयरो प्राइवेट लिमिटेड और जेट सर्व एविएशन प्राइवेट लिमिटेड जैसी अन्य कंपनियों को इसी प्रक्रिया में चार से छह महीने लगे।

इसके अलावा, कैप्टन गिल पर सितंबर 2022 में उस चयन समिति की अध्यक्षता करने का आरोप है, जिसने उनके रिश्तेदार विकास नैन को डिप्टी चीफ फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर नियुक्त किया। इसके बाद विकास नैन को रेडबर्ड एविएशन एकेडमी में करीब ₹6.5 लाख प्रति माह के वेतन पर नौकरी मिली।

आगे क्या होगा

CBI के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर कैप्टन गिल, संबंधित कंपनियों, उनके निदेशकों और अन्य अज्ञात सरकारी कर्मचारियों एवं निजी व्यक्तियों के खिलाफ कई धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र में पायलट प्रशिक्षण संस्थाओं की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। जांच की दिशा और आगे होने वाली गिरफ्तारियों या चार्जशीट पर सभी की नज़रें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिस पर उड़ान सुरक्षा और प्रशिक्षण मानकों की ज़िम्मेदारी है, वहाँ हितों के टकराव की यह स्तर चिंताजनक है। गौरतलब है कि भारत में पायलट प्रशिक्षण की गुणवत्ता और FTO की साख पर पहले से सवाल उठते रहे हैं; ऐसे में इस मामले की जांच सिर्फ अभियोजन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए — यह देखना भी ज़रूरी है कि ऐसी मंजूरियों को कितने और अधिकारियों ने प्रभावित किया। जब तक संस्थागत निगरानी तंत्र को मज़बूत नहीं किया जाता, अकेली FIR एक उदाहरण बन सकती है, सुधार नहीं।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने कैप्टन अनिल गिल के खिलाफ किन आरोपों में मामला दर्ज किया है?
सीबीआई ने कैप्टन अनिल गिल पर अपने नियामक पद का दुरुपयोग करते हुए कथित बेनामी कंपनियों के जरिए सस्ते में प्रशिक्षण विमान खरीदने और उन्हें पसंदीदा फ्लाइंग ट्रेनिंग संस्थाओं को महंगी दरों पर लीज देने का आरोप लगाया है। साथ ही नियामकीय मंजूरी में पक्षपात और रिश्तेदारों की नियुक्ति में हस्तक्षेप के भी आरोप हैं।
इस मामले में कौन-कौन सी कंपनियाँ शामिल हैं?
FIR में चार कंपनियाँ नामजद हैं — ब्लूथ्रोट एयरो ग्लोबल प्राइवेट लिमिटेड, रेडबर्ड एविएशन प्राइवेट लिमिटेड, साब्रेस कॉरपोरेट सॉल्यूशंस लिमिटेड और सैंडहिल्स एविएशन IFSC लिमिटेड। आरोप है कि इन कंपनियों में कैप्टन गिल के परिवार के सदस्य निदेशक थे।
विमान खरीद और लीज में क्या अनियमितता बताई गई है?
आरोप है कि BAGPL ने 1981 मॉडल का विमान वीटी-एएवाई मात्र ₹37.5 लाख में खरीदा, जबकि उसका बाज़ार मूल्य ₹75 लाख से ₹1 करोड़ था। बाद में यह विमान रेडबर्ड एविएशन एकेडमी को लीज पर दिया गया और 2021 से अक्टूबर 2023 के बीच ₹2.16 करोड़ से अधिक की लीज राशि वसूली गई।
नियामकीय मंजूरी में पक्षपात कैसे सामने आया?
FIR के अनुसार, रेडबर्ड एविएशन एकेडमी को प्रारंभिक FTO मंजूरी मात्र एक महीने तीन दिन में मिली, जबकि स्काईनेक्स एयरो और जेट सर्व एविएशन जैसी अन्य कंपनियों को यही मंजूरी लेने में चार से छह महीने लगे। यह भेदभाव कैप्टन गिल की कथित भूमिका से जोड़ा गया है।
इस मामले का भारत के विमानन प्रशिक्षण क्षेत्र पर क्या असर पड़ सकता है?
यह मामला DGCA की नियामकीय निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है और भारत में FTO लाइसेंसिंग प्रक्रिया की जांच की माँग को बल देता है। आगे की जांच और संभावित चार्जशीट से विमानन क्षेत्र में हितों के टकराव को रोकने के लिए नई नीतिगत पहल भी हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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