18 सितंबर 2026
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एलआईसी निवेश फ्रॉड: सीबीआई ने अनिल अंबानी और सतीश सेठ पर दर्ज की ₹2,684 करोड़ की एफआईआर

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एलआईसी निवेश फ्रॉड: सीबीआई ने अनिल अंबानी और सतीश सेठ पर दर्ज की ₹2,684 करोड़ की एफआईआर

सारांश

सीबीआई ने एलआईसी के ₹2,684.57 करोड़ के कथित निवेश फ्रॉड में अनिल अंबानी और सतीश सेठ के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। यह एडीए ग्रुप से जुड़ी नौवीं एफआईआर है और मामला सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में है — सार्वजनिक संस्थाओं के फंड सुरक्षा पर बड़ा सवाल।

मुख्य बातें

सीबीआई ने 18 सितंबर 2026 को एलआईसी की शिकायत पर अनिल डी.
अंबानी और सतीश सेठ समेत अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।
आरोप है कि 2012 से 2018 के बीच ₹3,900 करोड़ के एनसीडी खरीद में धोखाधड़ी हुई, जिससे एलआईसी को ₹2,684.57 करोड़ का नुकसान हुआ।
सीबीआई पहले भी एडीए ग्रुप की कंपनियों के खिलाफ 8 एफआईआर दर्ज कर चुकी है; अब तक 6 चार्जशीट और 7 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं।
सभी मामलों की निगरानी माननीय सर्वोच्च न्यायालय कर रहा है।
जाँच में सरकारी अधिकारियों और निजी व्यक्तियों की भूमिका तथा फंड डायवर्जन के मार्ग की पड़ताल की जाएगी।

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (सीबीआई) ने 18 सितंबर 2026 को भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) के साथ हुए ₹2,684.57 करोड़ के कथित निवेश फ्रॉड मामले में रिलायंस कैपिटल लिमिटेड (आरसीएपी) के पूर्व चेयरमैन अनिल डी. अंबानी, रिलायंस अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (एडीए ग्रुप) के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर सतीश सेठ और अन्य के विरुद्ध प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की है। यह एफआईआर एलआईसी की लिखित शिकायत के आधार पर दर्ज की गई है।

मामले की पृष्ठभूमि

एलआईसी के अनुसार, 12 अप्रैल 2012 से 9 मार्च 2018 के बीच उसने आरसीएपी द्वारा जारी 5 नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (एनसीडी) खरीदे थे, जिनकी कुल कीमत ₹3,900 करोड़ थी। ये एनसीडी सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों, फंडिंग आवश्यकताओं और मौजूदा ऋण के पुनर्वित्त के लिए जारी किए गए बताए गए थे।

एलआईसी का आरोप है कि आरोपियों ने गलत जानकारी देकर उसे आरसीएपी में निवेश करने के लिए प्रेरित किया, और उसके बाद उन निवेशित फंड्स को कथित तौर पर धोखाधड़ी से अन्यत्र लगा दिया गया।

आरोपों की प्रकृति

एलआईसी की शिकायत में आरोपी व्यक्तियों पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक कदाचार, फंड का डायवर्जन एवं गबन और खातों में हेरफेर जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, इस कथित धोखाधड़ी से एलआईसी को ₹2,684.57 करोड़ का नुकसान पहुँचा, जबकि आरोपियों को उतना ही अनुचित लाभ मिला।

सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि जाँच में सरकारी अधिकारियों सहित सभी संबंधित पक्षों की भूमिका की पड़ताल की जाएगी। निवेशित फंड के अंतिम उपयोग और डायवर्जन के मार्ग का पता लगाना भी इस जाँच के केंद्र में है।

एडीए ग्रुप के खिलाफ पहले से जारी जाँचें

गौरतलब है कि यह पहला मामला नहीं है। सीबीआई इससे पहले रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम), रिलायंस कैपिटल लिमिटेड (आरसीएपी), रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड (आरएचएफएल), रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड (आरसीएफएल) और रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड (आरटीएल) के खिलाफ विभिन्न सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) और एलआईसी की शिकायतों पर 8 एफआईआर दर्ज कर चुकी है।

यह ऐसे समय में आया है जब एडीए ग्रुप की कंपनियाँ कई वित्तीय और कानूनी मोर्चों पर दबाव में हैं। नई एफआईआर इस श्रृंखला की नवीनतम कड़ी है।

सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी

सीबीआई ने बताया कि इन सभी मामलों में अब तक 6 चार्जशीट दाखिल की जा चुकी हैं और 7 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इन सभी मामलों की जाँच जारी है और माननीय सर्वोच्च न्यायालय इनकी निगरानी कर रहा है। जाँच एजेंसी ने व्यापक और त्वरित जाँच की प्रतिबद्धता दोहराई है।

आगे की संभावनाएँ

विशेषज्ञों का मानना है कि सर्वोच्च न्यायालय की सक्रिय निगरानी इस मामले में जाँच की गति और पारदर्शिता दोनों को प्रभावित करेगी। सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों में निवेशक विश्वास बहाल करने के लिहाज़ से इस मामले के परिणाम की व्यापक अहमियत होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक लंबी कानूनी लड़ाई की अगली कड़ी है — एडीए ग्रुप के खिलाफ यह नौवीं एफआईआर है। असल सवाल यह है कि एलआईसी जैसी सार्वजनिक संस्था, जो करोड़ों पॉलिसीधारकों की जमा-पूँजी की संरक्षक है, इतने वर्षों तक इस निवेश की निगरानी में चूकती रही — यह जवाबदेही का प्रश्न केवल आरोपियों तक सीमित नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी इस बात का संकेत है कि न्यायपालिका इसे महज़ एक कॉर्पोरेट मामला नहीं मान रही। असली कसौटी अब यह होगी कि जाँच फंड-डायवर्जन की पूरी शृंखला उजागर कर पाती है या नहीं।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीबीआई ने अनिल अंबानी पर एफआईआर क्यों दर्ज की?
सीबीआई ने एलआईसी की लिखित शिकायत के आधार पर यह एफआईआर दर्ज की है। आरोप है कि 2012 से 2018 के बीच रिलायंस कैपिटल के एनसीडी में एलआईसी को गलत जानकारी देकर ₹3,900 करोड़ का निवेश कराया गया और बाद में उन फंड्स को धोखाधड़ी से डायवर्ट किया गया, जिससे एलआईसी को ₹2,684.57 करोड़ का नुकसान हुआ।
इस मामले में कौन-कौन आरोपी हैं?
एफआईआर में रिलायंस कैपिटल लिमिटेड (आरसीएपी) के पूर्व चेयरमैन अनिल डी. अंबानी, एडीए ग्रुप के ग्रुप मैनेजिंग डायरेक्टर सतीश सेठ, अज्ञात सरकारी अधिकारी और अन्य व्यक्ति आरोपी बनाए गए हैं।
एलआईसी को वास्तव में कितना नुकसान हुआ?
एलआईसी की शिकायत के अनुसार, कथित फ्रॉड से उसे ₹2,684.57 करोड़ का नुकसान हुआ। मूल निवेश ₹3,900 करोड़ के 5 नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (एनसीडी) के रूप में किया गया था।
क्या अनिल अंबानी और एडीए ग्रुप के खिलाफ पहले भी मामले दर्ज हैं?
हाँ, सीबीआई पहले भी एडीए ग्रुप की विभिन्न कंपनियों — आरकॉम, आरसीएपी, आरएचएफएल, आरसीएफएल और आरटीएल — के खिलाफ 8 एफआईआर दर्ज कर चुकी है। इन मामलों में 6 चार्जशीट दाखिल और 7 गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं।
इस मामले की निगरानी कौन कर रहा है?
एडीए ग्रुप से जुड़े सभी सीबीआई मामलों की निगरानी माननीय सर्वोच्च न्यायालय कर रहा है। सीबीआई ने व्यापक और त्वरित जाँच की प्रतिबद्धता दोहराई है।
राष्ट्र प्रेस
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