अनिल अंबानी से 2,929 करोड़ रुपए के बैंक धोखाधड़ी मामले में सीबीआई ने की दूसरी बार पूछताछ
सारांश
Key Takeaways
- अनिल अंबानी से सीबीआई द्वारा पूछताछ हुई है।
- मामला 2,929 करोड़ रुपए के बैंक धोखाधड़ी से संबंधित है।
- अंबानी ने सभी आरोपों का खंडन किया है।
- यह मामला कई बैंकों की शिकायतों पर आधारित है।
- जांच अभी भी जारी है और विभिन्न न्यायालयों में यह मामला विचाराधीन है।
नई दिल्ली, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रसिद्ध उद्योगपति अनिल अंबानी से 2,929 करोड़ रुपए की कथित बैंक धोखाधड़ी के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने शुक्रवार को दूसरी बार पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, अंबानी सुबह करीब 10 बजे सीबीआई मुख्यालय पहुंचे, जहां उनसे मामले की गहरी जांच की गई।
इससे पहले, गुरुवार को भी सीबीआई ने उनसे लगभग 8 घंटे तक पूछताछ की थी, जिसमें बैंक से लिए गए कर्ज में कथित रूप से फंड का गलत इस्तेमाल, दुरुपयोग और अन्य वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में सवाल उठाए गए थे।
अंबानी के प्रवक्ता ने कहा कि यह पेशी सभी एजेंसियों के साथ सहयोग करने की उनकी प्रतिबद्धता का हिस्सा है।
यह मामला रिलायंस कम्युनिकेशंस और अनिल अंबानी के खिलाफ भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की शिकायत पर आधारित है। सीबीआई ने आरोप लगाया है कि कंपनी और इसके जुड़े व्यक्तियों ने आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और विश्वासघात जैसे अपराध किए हैं।
एसबीआई की शिकायत के अनुसार, कंपनी पर विभिन्न बैंकों का कुल बकाया 40,000 करोड़ रुपए से अधिक है, जिसमें अकेले एसबीआई को लगभग 2,929 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। आरोप है कि 2013 से 2017 के बीच समूह की विभिन्न इकाइयों ने जटिल लेनदेन के माध्यम से कर्ज की राशि का गलत इस्तेमाल किया।
सीबीआई ने अगस्त 2025 में इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद कई अन्य बैंकों जैसे पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक, यूको बैंक, सेंट्रल बैंक, आईडीबीआई बैंक और बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने भी अलग-अलग शिकायतें कीं। इसके अलावा, फरवरी और मार्च 2026 में भी इस मामले से जुड़े नए केस दर्ज हुए हैं।
जांच के दौरान सीबीआई ने मुंबई स्थित अंबानी के आवास और कंपनी के दफ्तरों पर छापेमारी की थी, जहां से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए थे।
हालांकि, अंबानी के प्रवक्ता ने सभी आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि यह मामला 10 साल से अधिक पुराना है और उस समय अंबानी कंपनी में नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर थे, जिनका रोजमर्रा के संचालन से कोई संबंध नहीं था।
प्रवक्ता ने कहा कि यह मामला वर्तमान में राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) और अन्य न्यायिक मंचों, जिसमें सुप्रीम कोर्ट भी शामिल है, में विचाराधीन है।