सीबीआई कोर्ट का फैसला: रिश्वत मामले में पूर्व रेलवे इंजीनियर गिरिजेश कुमार गौड़ को 4 साल की कठोर कैद
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) कोर्ट ने 4 अगस्त 2026 को रिश्वतखोरी के एक मामले में पूर्व रेलवे इंजीनियर गिरिजेश कुमार गौड़ को दोषी करार देते हुए 4 वर्ष की कठोर कैद और ₹20,000 जुर्माने की सजा सुनाई। गौड़ उत्तर मध्य रेलवे, बांदा (उत्तर प्रदेश) में असिस्टेंट डिविजनल सिग्नल एंड टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियर (एडीएसटीई) के पद पर कार्यरत थे, जब उन्हें 27 मई 2016 को रंगे हाथों पकड़ा गया था।
मामले की पृष्ठभूमि
सीबीआई के अनुसार, यह मामला एक शिकायत के आधार पर 27 मई 2016 को दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि गौड़ ने उनके ₹80,000 के बिल को पास और मंजूर करने के बदले ₹20,000 की रिश्वत की मांग की थी। ये बिल एडीएसटीई कार्यालय, बांदा के साथ अनुबंध के तहत लगाए गए वाहन से संबंधित थे।
रिश्वत की राशि दो किस्तों में तय की गई थी — बिल मंजूरी से पहले ₹10,000 और मंजूरी के बाद ₹10,000। यह ढांचा भ्रष्टाचार की एक सुनियोजित कार्यशैली की ओर संकेत करता है।
सीबीआई का जाल और गिरफ्तारी
शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसी दिन — 27 मई 2016 को — एक जाल बिछाया। आरोपी गौड़ को उनके घर पर ₹9,700 की अवैध रिश्वत मांगते और स्वीकार करते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। यह राशि ₹10,000 की कथित मांग के विरुद्ध ली गई थी। जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 24 जून 2016 को गौड़ के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की।
अदालत का फैसला
लंबे ट्रायल के बाद लखनऊ की सीबीआई कोर्ट ने गौड़ को दोषी पाते हुए 4 वर्ष की कठोर कैद और ₹20,000 के जुर्माने की सजा सुनाई। यह फैसला सरकारी सेवा में भ्रष्टाचार के खिलाफ न्यायिक कड़ाई का एक स्पष्ट संदेश है। गौरतलब है कि सीबीआई कोर्टों में भ्रष्टाचार के मामलों में सजा की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रही है।
व्यापक संदर्भ
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब सरकारी विभागों में ठेकेदारों से रिश्वत वसूली के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। रेलवे जैसे बड़े सार्वजनिक उपक्रमों में ठेका-आधारित भुगतान प्रणाली को भ्रष्टाचार का एक संवेदनशील बिंदु माना जाता है। सीबीआई की इस कार्रवाई को भ्रष्ट अधिकारियों के प्रति जीरो-टॉलरेंस नीति की दिशा में एक अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है।
इस फैसले के बाद अब यह देखना होगा कि क्या गौड़ उच्च न्यायालय में अपील करते हैं या सजा को स्वीकार करते हैं।