सेंट्रल रेलवे का पेयजल सुधार अभियान: 20,000 स्थानों पर लगेंगे नए फिल्ट्रेशन सिस्टम, CAG रिपोर्ट के बाद कार्रवाई
सारांश
मुख्य बातें
सेंट्रल रेलवे ने 20 सितंबर 2026 को यात्रियों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुधार अभियान की घोषणा की, जिसके तहत रेलवे नेटवर्क के करीब 20,000 स्थानों पर नई फिल्ट्रेशन प्रणाली, वाटर कूलर और जल गुणवत्ता निगरानी व्यवस्था स्थापित की जाएगी। यह कदम नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में पेयजल गुणवत्ता पर उठाई गई गंभीर टिप्पणियों के बाद उठाया गया है।
CAG रिपोर्ट और केंद्रीय समीक्षा
पेयजल की गुणवत्ता को लेकर CAG की रिपोर्ट सामने आने के बाद रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव, रेलवे बोर्ड के चेयरमैन एवं सीईओ तथा वरिष्ठ अधिकारियों ने स्थिति की व्यापक समीक्षा की। इस समीक्षा के बाद भारतीय रेलवे के सभी ज़ोन को तत्काल सुधारात्मक उपाय लागू करने के निर्देश दिए गए। रेलवे बोर्ड के इन निर्देशों के अनुपालन में सेंट्रल रेलवे ने युद्धस्तर पर कार्रवाई शुरू की है।
मुख्य सुधार उपाय
सेंट्रल रेलवे अपने स्टेशनों, कोचिंग डिपो और यात्री सुविधा केंद्रों पर नई फिल्ट्रेशन प्रणाली और वाटर कूलर तेजी से स्थापित कर रहा है। पुराने और खराब हो चुके पानी के स्टोरेज टैंकों की पहचान कर उन्हें चरणबद्ध तरीके से बदला जा रहा है।
पानी के स्रोत और आउटलेट दोनों स्थानों पर गुणवत्ता की नियमित जांच, केंद्रीकृत निगरानी और स्टोरेज टैंकों की निर्धारित समय पर सफाई एवं रखरखाव को अनिवार्य किया गया है। नियमित जांच को और प्रभावी बनाने के लिए संबंधित इंस्पेक्टर ऑफ वर्क्स कार्यालयों में ई. कोलाई टेस्टिंग किट भी उपलब्ध कराई गई हैं।
चार स्टेशनों पर विशेष अभियान
वर्ष 2023-24 के दौरान छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस, भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावला स्टेशनों से लिए गए पेयजल नमूनों पर CAG की विशेष टिप्पणियों के बाद इन चारों स्टेशनों पर एक विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान में पानी के नमूनों की भौतिक, रासायनिक और बैक्टीरियोलॉजिकल जांच कराई गई।
सेंट्रल रेलवे के अनुसार जांच में सभी नमूने संतोषजनक पाए गए और किसी भी नमूने में ई. कोलाई या बैक्टीरियोलॉजिकल संदूषण नहीं मिला। विशेष अभियान के दौरान चारों स्टेशनों पर पाइपलाइन व्यवस्था की पूरी जांच की गई, पानी की टंकियों के वेंट और ओवरफ्लो व्यवस्था पर जालीयुक्त मजबूत ढक्कन लगाए गए, वाटर कूलरों की सफाई और गाद हटाने का काम पूरा किया गया तथा लीकेज वाले नलों को बदला गया।
निगरानी और पारदर्शिता
पेयजल गुणवत्ता सुधारने के लिए उठाए जा रहे इन कदमों की निगरानी रेलवे बोर्ड के स्तर पर प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी। प्रगति और पानी की गुणवत्ता से जुड़ी रिपोर्ट समय-समय पर सार्वजनिक की जाएगी, ताकि व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके।
गौरतलब है कि यह पहल CAG की टिप्पणियों पर कार्रवाई के साथ-साथ भारतीय रेलवे में यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने के व्यापक अभियान का हिस्सा है। आने वाले महीनों में पूरे रेलवे नेटवर्क में इस व्यवस्था के विस्तार की योजना है।