18 अगस्त 2026
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कैग रिपोर्ट के बाद वैष्णव का बड़ा आदेश: 20,000 जगहों पर 'टैंक टू टैप' सिस्टम से सुधरेगा रेलवे का पेयजल

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कैग रिपोर्ट के बाद वैष्णव का बड़ा आदेश: 20,000 जगहों पर 'टैंक टू टैप' सिस्टम से सुधरेगा रेलवे का पेयजल

सारांश

कैग की चौंकाने वाली रिपोर्ट — जिसमें 8 स्टेशनों पर ई. कोलाई और 89% स्टेशनों पर मानक-उल्लंघन सामने आया — के बाद रेल मंत्री वैष्णव ने 20,000 जल-बिंदुओं पर 'टैंक टू टैप' निगरानी प्रणाली लागू करने का आदेश दिया है। यह भारतीय रेलवे के इतिहास में पेयजल सुरक्षा का सबसे व्यापक सुधार अभियान है।

मुख्य बातें

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 18 अगस्त 2026 को देशभर के रेलवे स्टेशनों पर 'टैंक टू टैप' जल-शुद्धीकरण प्रणाली लागू करने का आदेश दिया।
यह प्रणाली लगभग 20,000 स्थानों पर लागू होगी — पुराने टैंकों का प्रतिस्थापन, नियमित परीक्षण और समयबद्ध सफाई शामिल।
कैग ने 512 में से 458 स्टेशनों (लगभग 89% ) को यात्री सुविधा मानकों में अनुत्तीर्ण पाया।
8 स्टेशनों — कोयंबटूर, पलक्कड़ जंक्शन, हैदराबाद, CSMT, भिवंडी रोड, कल्याण, लोनावला, मधुपुर — के वॉटर-कूलर में ई.
कोलाई बैक्टीरिया पाया गया।
2023-24 में 56 स्टेशनों पर जल-प्रदूषण दर्ज हुआ, जो 2022-23 के 49 स्टेशनों से अधिक है।
रेलवे बोर्ड कार्यक्रम की निगरानी करेगा और नियमित प्रगति रिपोर्ट जारी करेगा।

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 18 अगस्त 2026 को देशभर के रेलवे स्टेशनों पर पीने के पानी की व्यवस्था में आमूलचूल सुधार का आदेश दिया है — यह कदम भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की उस ऑडिट रिपोर्ट के बाद उठाया गया है जिसमें सैकड़ों स्टेशनों पर जलापूर्ति में गंभीर खामियाँ उजागर हुई थीं। इस पहल के तहत लगभग 20,000 स्थानों पर 'टैंक टू टैप' फिल्टरेशन और मॉनिटरिंग प्रणाली लागू की जाएगी, जो स्रोत से लेकर उपभोग बिंदु तक जल की शुद्धता सुनिश्चित करेगी।

कैग ऑडिट में क्या सामने आया

कैग ने 512 गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों का ऑडिट किया, जिसमें पाया गया कि इनमें से 458 स्टेशन — यानी लगभग 89 प्रतिशत — यात्री सुविधाओं के निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। रिपोर्ट के अनुसार 2,035 स्थानों पर पेयजल के नलों की कमी थी, 403 स्टेशनों पर यूरिनल की अपर्याप्त व्यवस्था थी और 201 स्टेशनों पर शौचालय सुविधाएँ कम पाई गईं।

सबसे गंभीर निष्कर्ष जल प्रदूषण से जुड़े थे। ऑडिट के दौरान कोयंबटूर, पलक्कड़ जंक्शन, हैदराबाद, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT), भिवंडी रोड, कल्याण, लोनावला और मधुपुर — इन आठ स्टेशनों के वॉटर-कूलर के पानी के नमूनों में ई. कोलाई बैक्टीरिया पाया गया। प्लेटफॉर्म के नलों के नमूनों में टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी भी दर्ज की गई।

आँकड़े बताते हैं कि 2022-23 में 49 स्टेशनों और 2023-24 में 56 स्टेशनों पर पानी में प्रदूषण पाया गया — यह एक साल में 14 प्रतिशत की वृद्धि है, जो समस्या की बढ़ती गंभीरता को रेखांकित करती है।

'टैंक टू टैप' प्रणाली में क्या होगा

नई व्यवस्था के तहत पानी की आपूर्ति की पूरी शृंखला को निगरानी के दायरे में लाया जाएगा। रेलवे पुराने जल-टैंकों को बदलेगा, स्रोत और आउटलेट दोनों बिंदुओं पर नियमित परीक्षण करेगा और टैंकों की समयबद्ध सफाई व रखरखाव सुनिश्चित करेगा। जल गुणवत्ता संबंधी समस्याओं की शीघ्र पहचान और समाधान के लिए मॉनिटरिंग तंत्र को भी सुदृढ़ किया जाएगा।

गौरतलब है कि CSMT, हावड़ा, सियालदह, नई दिल्ली और मुंबई सेंट्रल जैसे बड़े NSG-1 श्रेणी के स्टेशनों पर भी बुनियादी सुविधाओं में कमियाँ पाई गईं — यह इसलिए और चिंताजनक है क्योंकि ये देश के सर्वाधिक व्यस्त यात्री केंद्र हैं।

जवाबदेही और निगरानी का ढाँचा

रेलवे बोर्ड 'टैंक टू टैप' कार्यक्रम के क्रियान्वयन की निगरानी करेगा और समय-समय पर जल गुणवत्ता तथा प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक करेगा। इस पहल का मूल उद्देश्य जवाबदेही को संस्थागत रूप देना है, ताकि यात्रियों को मिलने वाला पानी स्रोत से लेकर उपयोग-बिंदु तक सुरक्षित रहे।

कैग ने अपनी सिफारिशों में जल आपूर्ति निरीक्षण प्रक्रिया का सख्ती से पालन करने और 'यूनिफॉर्म ड्रिंकिंग वॉटर क्वालिटी प्रोटोकॉल' के तहत व्यापक परीक्षण करने पर जोर दिया है।

आम यात्रियों पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय रेलवे प्रतिदिन करोड़ों यात्रियों को सेवाएँ देती है और स्टेशनों पर स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सीधे सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी है। यदि 'टैंक टू टैप' प्रणाली प्रभावी रूप से लागू होती है, तो 20,000 जल-बिंदुओं पर स्वच्छता मानकों में उल्लेखनीय सुधार संभव है। अब देखना यह होगा कि रेलवे बोर्ड इस कार्यक्रम की प्रगति रिपोर्ट कितनी पारदर्शिता से जारी करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन व्यवस्थागत सुधार की गति हमेशा धीमी रही। 'टैंक टू टैप' का ऐलान सही दिशा में है, पर असली कसौटी यह है कि क्या रेलवे बोर्ड की प्रगति रिपोर्टें सार्वजनिक और स्वतंत्र रूप से सत्यापन-योग्य होंगी। NSG-1 जैसे प्रीमियम स्टेशनों पर भी खामियाँ मिलना यह बताता है कि समस्या बजट की नहीं, प्राथमिकता और जवाबदेही की है — और वह अंतर महज एक आदेश से नहीं पटेगा।
RashtraPress
18 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'टैंक टू टैप' रेलवे जल प्रणाली क्या है?
'टैंक टू टैप' एक एकीकृत जल-शुद्धीकरण और निगरानी प्रणाली है जो पानी के स्रोत-टैंक से लेकर यात्री उपयोग-बिंदु तक की पूरी आपूर्ति शृंखला को नियमित परीक्षण और रखरखाव के दायरे में लाती है। रेल मंत्री वैष्णव ने कैग रिपोर्ट के बाद इसे देशभर के लगभग 20,000 रेलवे जल-बिंदुओं पर लागू करने का आदेश दिया है।
कैग ने रेलवे स्टेशनों पर क्या कमियाँ पाईं?
कैग ने 512 गैर-उपनगरीय स्टेशनों के ऑडिट में पाया कि 458 स्टेशन (लगभग 89%) यात्री सुविधा मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें 2,035 स्थानों पर पेयजल नलों की कमी, 8 स्टेशनों के वॉटर-कूलर में ई. कोलाई बैक्टीरिया और प्लेटफॉर्म नलों में टोटल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की मौजूदगी शामिल थी।
किन स्टेशनों पर ई. कोलाई पाया गया?
कैग ऑडिट में कोयंबटूर, पलक्कड़ जंक्शन, हैदराबाद, छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT), भिवंडी रोड, कल्याण, लोनावला और मधुपुर — इन आठ स्टेशनों के वॉटर-कूलर के पानी में ई. कोलाई बैक्टीरिया पाया गया। ये स्टेशन देश के अलग-अलग रेल मंडलों में हैं।
इस सुधार से यात्रियों को क्या फायदा होगा?
यदि यह प्रणाली प्रभावी रूप से लागू होती है, तो 20,000 जल-बिंदुओं पर स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। पुराने टैंकों का प्रतिस्थापन, नियमित परीक्षण और रेलवे बोर्ड द्वारा जारी प्रगति रिपोर्टें जल-जनित बीमारियों के जोखिम को कम करने में सहायक होंगी।
रेलवे बोर्ड इस कार्यक्रम की निगरानी कैसे करेगा?
रेलवे बोर्ड 'टैंक टू टैप' कार्यक्रम के क्रियान्वयन की निगरानी करेगा और समय-समय पर जल गुणवत्ता व प्रगति रिपोर्ट जारी करेगा। कैग ने 'यूनिफॉर्म ड्रिंकिंग वॉटर क्वालिटी प्रोटोकॉल' के तहत व्यापक परीक्षण और निरीक्षण प्रक्रिया के सख्त पालन की सिफारिश की है।
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