स्यूटा प्रवासी संकट: ईयू गृह मंत्रियों की आपात वीडियो बैठक, 69,500 प्रवासी मोरक्को वापस
सारांश
मुख्य बातें
यूरोपीय संघ (ईयू) के सदस्य देशों के गृह मंत्री मंगलवार, 4 अगस्त को स्यूटा प्रवासी संकट पर आपात वीडियो कॉन्फ्रेंस बैठक कर रहे हैं। स्पेन के उत्तर अफ्रीकी क्षेत्र स्यूटा में अवैध प्रवासियों की बड़े पैमाने पर घुसपैठ के बाद ईयू सदस्य देशों के बीच गहरे राजनीतिक मतभेद उभर आए हैं। बैठक का उद्देश्य मौजूदा हालात की समीक्षा करना और साझा रणनीति तय करना है।
मृतकों की संख्या और प्रवासियों की वापसी
स्पेनिश मीडिया आउटलेट एल पेस की रिपोर्ट के अनुसार, स्पेन सरकार के ताज़ा आँकड़ों के मुताबिक अब तक लगभग 69,500 प्रवासियों को मोरक्को वापस भेजा जा चुका है — जो शुरुआती अनुमान 50,000 से काफी अधिक है। मृतकों की संख्या को लेकर दोनों देशों के बीच विरोधाभास है: स्पेन की ओर से मृतकों की संख्या 72 बताई गई है, जबकि मोरक्को के अनुसार 11 लोगों की जान गई है।
यूरोप में बँटे सुर — शेंगेन पर विवाद
सीमा सुरक्षा के मसले पर यूरोपीय देशों की प्रतिक्रियाएँ एकजुट नहीं रही हैं। इटली ने एहतियातन स्पेन के साथ शेंगेन व्यवस्था को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया, और फिनलैंड तथा डेनमार्क ने इस कदम का समर्थन किया। चेक गणराज्य के प्रधानमंत्री ने तो स्पेन की शेंगेन सदस्यता को ही अस्थायी रूप से निलंबित करने की माँग उठा दी।
इन बयानों पर स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कुछ यूरोपीय सरकारों की प्रतिक्रिया 'चिंता पैदा करने वाली' है। सांचेज ने यह भी स्पष्ट किया कि स्यूटा शेंगेन क्षेत्र का हिस्सा नहीं है, इसलिए इस मुद्दे पर कई भ्रांतियाँ फैलाई जा रही हैं।
सांचेज की यूरोप को दो-टूक
सांचेज ने कहा कि अधिकांश यूरोपीय देशों ने संकट की घड़ी में स्पेन के प्रति एकजुटता दिखाई, लेकिन कुछ सरकारों ने 'पूर्वाग्रह, भ्रामक सूचनाओं और राजनीतिक हितों' के कारण स्पेन की आलोचना को प्राथमिकता दी। यह बयान यूरोपीय एकता की दरारों को उजागर करता है — ऐसे समय में जब ब्लॉक को एकस्वर में बोलने की ज़रूरत है।
यूरोपीय आयोग का रुख
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने प्रधानमंत्री सांचेज को भेजे पत्र में संकट से निपटने की उनकी त्वरित कार्रवाई की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि ईयू को अपने बाहरी सीमाई क्षेत्रों की सुरक्षा और अधिक मज़बूत करनी होगी। वॉन डेर लेयेन ने रेखांकित किया कि ईयू की बाहरी सीमाओं की रक्षा सभी सदस्य देशों की साझा जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि इसके लिए सीमाओं पर कड़ी निगरानी, आवश्यक स्थानों पर भौतिक अवरोधों का उपयोग, मानव तस्करी नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई और अवैध प्रवासियों की शीघ्र वापसी सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।
बैठक से क्या उम्मीद
वॉन डेर लेयेन के अनुसार, मंगलवार की आपात बैठक स्यूटा संकट से सबक लेने और भविष्य की साझा रणनीति तैयार करने का अवसर होगी। गौरतलब है कि यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब यूरोप में प्रवासन को लेकर दक्षिणपंथी राजनीतिक दलों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना समन्वित यूरोपीय नीति के, इस तरह के संकट बार-बार उभरते रहेंगे।