स्यूटा प्रवासी संकट: सांचेज की अपील पर ईयू गृह मंत्रियों की आपात बैठक मंगलवार को, 67 की मौत
सारांश
मुख्य बातें
स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज की लिखित अपील पर यूरोपीय संघ (ईयू) के गृह मंत्रियों की एक आपात बैठक मंगलवार, 5 अगस्त को बुलाई गई है, जो स्यूटा प्रवासी संकट पर केंद्रित होगी। उत्तर मोरक्को से 50,000 से अधिक प्रवासियों के महज 24 घंटों में स्पेन के स्वायत्त क्षेत्र स्यूटा में प्रवेश करने की कोशिश के बाद भगदड़ में 67 लोगों की मौत हो गई। सांचेज ने शनिवार को लिखे पत्र में स्पष्ट किया था कि यह संकट केवल स्पेन का नहीं, बल्कि पूरे यूरोपीय संघ की बाहरी सीमा और साझा सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
मुख्य घटनाक्रम
गुरुवार से शुक्रवार के बीच के 24 घंटों में मोरक्को की ओर से 50,000 से अधिक लोगों ने स्यूटा में प्रवेश करने का प्रयास किया। स्पेन के गृह मंत्रालय के अनुसार इस दौरान 67 लोगों की मौत हुई — कुछ समुद्र में डूबे, कुछ अफरा-तफरी और भगदड़ में मारे गए। यह यूरोप के किसी एकल स्थान पर इतने कम समय में दर्ज किए गए सबसे बड़े प्रवासी प्रवाहों में से एक है।
आपात बैठक बुलाने का निर्णय ईयू सदस्य देशों और फ्रॉन्टेक्स बॉर्डर एजेंसी के विशेषज्ञों ने संयुक्त रूप से लिया। सदस्य देशों के बीच प्रवासन नीति पर व्याप्त मतभेदों को दूर करने और एक समान दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता को देखते हुए यह निर्णय सर्वसम्मति से किया गया।
सीमा सुरक्षा के उपाय
स्पेन ने स्यूटा में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तत्काल कदम उठाए। पुलिस ने मोरक्को के साथ लगती सीमा पर समुद्री क्षेत्र में 500 मीटर (1,640 फीट) लंबा फ्लोटिंग बैरियर लगाना शुरू किया, जिसके बाद रात के समय प्रवासियों का प्रवेश बंद हो गया। स्पेन सरकार के अनुसार स्यूटा पहुँचे लगभग सभी प्रवासियों को 48 घंटे के भीतर मोरक्को वापस भेज दिया गया और सांचेज ने स्पष्ट किया कि "कोई भी स्पेन के मुख्य भूभाग या यूरोप के अन्य हिस्सों तक नहीं पहुँच सका।"
यूरोपीय देशों की प्रतिक्रिया
संकट पर यूरोपीय देशों की प्रतिक्रिया एकजुट नहीं रही। इटली, डेनमार्क, पोलैंड और स्वीडन ने शनिवार को एक अलग बैठक कर स्पेन के रवैए की आलोचना की। वहीं, ब्रिटिश प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने शनिवार को कहा, "मैं स्पेनिश पीएम के संपर्क में हूँ और हम जो मदद कर सकते हैं, वह कर रहे हैं।"
सांचेज ने कुछ यूरोपीय देशों की प्रतिक्रिया पर नाराज़गी जताते हुए कहा कि संकट की घड़ी में एकजुटता दिखाने के बजाय कुछ देशों ने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को तरजीह दी, जिससे यूरोपीय एकता कमज़ोर हुई।
आम जनता और प्रवासियों पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब यूरोपीय संघ प्रवासन पर एक साझा नीति बनाने के प्रयासों में पहले से ही विभाजित है। आलोचकों का कहना है कि सदस्य देशों के बीच मतभेद इस तरह के संकटों को और जटिल बनाते हैं। गौरतलब है कि स्यूटा भौगोलिक रूप से अफ्रीकी महाद्वीप पर स्थित यूरोपीय संघ का हिस्सा है, जो इसे प्रवासियों के लिए एक संवेदनशील प्रवेश बिंदु बनाता है।
आगे क्या होगा
मंगलवार की आपात बैठक में ईयू गृह मंत्री प्रवासन के लिए एक समान नीति पर विचार करेंगे और फ्रॉन्टेक्स की भूमिका को मज़बूत करने पर चर्चा होने की संभावना है। बैठक का परिणाम यह तय करेगा कि ईयू भविष्य में इस तरह के सीमा संकटों से किस प्रकार निपटेगा।