स्यूटा संकट: मोरक्को से 60,000 प्रवासियों की घुसपैठ, 41 की मौत; स्पेन के PM ने तस्करों को ठहराया दोषी
सारांश
मुख्य बातें
स्पेन के उत्तरी अफ्रीकी क्षेत्र स्यूटा में 1 अगस्त को हाल के इतिहास का सबसे बड़ा प्रवासन संकट सामने आया, जब 24 घंटों के भीतर 60,000 से अधिक प्रवासी मोरक्को से स्यूटा में दाखिल हो गए और यूरोप में प्रवेश की इस जानलेवा कोशिश में कम से कम 41 लोगों की मौत हो गई। स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने स्यूटा का दौरा कर इस घटनाक्रम को देश की क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन करार दिया और मानव तस्करी नेटवर्क को हजारों प्रवासियों को खतरनाक यात्रा के लिए उकसाने का दोषी ठहराया।
मुख्य घटनाक्रम
स्यूटा और मेलिला — अफ्रीकी महाद्वीप पर स्थित स्पेन के दो शहर — यूरोपीय संघ की अफ्रीका के साथ एकमात्र जमीनी सीमाएँ हैं। यूरोपीय संघ का हिस्सा होने के कारण यहाँ पहुँचते ही प्रवासियों को यूरोप में प्रवेश मिल जाता है। प्रवासी मुख्यतः मोरक्को के फनिदेक और बेल्योनेच शहरों से तैरकर या नाव से स्यूटा पहुँचने का प्रयास करते हैं, जबकि कुछ भारी किलेबंदी वाली सीमा की बाड़ को फाँदने या तोड़ने की कोशिश करते हैं।
स्पेनिश अधिकारियों ने प्रवासियों की इस अचानक बढ़ोतरी को स्पेन के सर्वोच्च न्यायालय के एक हालिया फैसले से जोड़ा है, जिसमें कहा गया था कि समुद्र में पकड़े गए प्रवासियों को तत्काल वापस नहीं भेजा जा सकता।
तस्करों ने फैलाई अफवाह
प्रधानमंत्री सांचेज के अनुसार, मानव तस्करी नेटवर्क ने सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले को तोड़-मरोड़कर प्रचारित किया। तस्करों ने हजारों प्रवासियों को यह झूठा भरोसा दिलाया कि यदि वे समुद्र के रास्ते स्पेन पहुँच गए तो उन्हें वहाँ रहने की अनुमति मिल जाएगी। सांचेज ने कहा, 'ऐसा लगता है कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला मानव तस्करी संगठनों के नेटवर्क में आग की तरह फैल गया।'
उन्होंने यह भी कहा कि 'तस्कर बहुत सारे युवाओं को धोखा देते हैं और आखिर में उनमें से कई को मौत के घाट उतार देते हैं — चाहे समुद्र में या इस मामले में स्पेन की सीमा पर स्यूटा में।'
प्रवासन का कारण
मोरक्को में व्याप्त बेरोजगारी, गरीबी और बेहतर जीवन की तलाश इस संकट की जड़ में है। स्पेन भौगोलिक रूप से यूरोप का सबसे निकटतम देश है, जिससे यह प्रवासियों के लिए सबसे पहली पसंद बन जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब यूरोप में प्रवासन का दबाव पहले से ही राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषय बना हुआ है।
यूरोपीय प्रतिक्रिया
इस संकट के बीच फ्रांस और इटली ने अपनी-अपनी सीमाओं पर नियंत्रण और कड़ा कर दिया है। गौरतलब है कि यूरोपीय देशों में प्रवासन नीति को लेकर पहले से ही गहरे मतभेद हैं और यह नया संकट उन्हें और उजागर करता है।
आगे क्या
स्पेन की सरकार ने स्यूटा में स्थिति को नियंत्रित करने के लिए तेजी से कदम उठाने शुरू किए हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की नजर इस बात पर टिकी है कि स्पेन और मोरक्को मिलकर इस संकट से कैसे निपटते हैं और क्या प्रवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाती है।