स्यूटा संकट: PM पेड्रो सांचेज 3 सितंबर को संसद में देंगे जवाब, 80,000 प्रवासियों के आने पर मचा था हड़कंप
सारांश
मुख्य बातें
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज 3 सितंबर 2026 को संसद के समक्ष उपस्थित होकर स्यूटा संकट से निपटने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का विस्तृत ब्योरा पेश करेंगे। प्रवक्ताओं की समिति ने बुधवार, 26 अगस्त को यह तारीख तय की। यह संकट जुलाई 2026 के अंत में उस समय उत्पन्न हुआ जब लगभग 70,000 से 80,000 प्रवासी मोरक्को से तैरकर या बाड़ पार करके स्पेनिश क्षेत्र स्यूटा में दाखिल हो गए थे।
संसद में पेशी की पृष्ठभूमि
समाचार माध्यम एल पायस की रिपोर्टों के अनुसार, स्वयं सांचेज ने 30 जुलाई को संसद में पेश होने का अनुरोध किया था, ताकि वे इस अभूतपूर्व प्रवासी आमद पर स्पष्टीकरण दे सकें। प्रवक्ताओं की समिति ने उनके इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए 3 सितंबर की तारीख निर्धारित की। यह ऐसे समय में आया है जब सरकार के भीतर ही विरोधाभासी बयानों को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा चुका है।
राष्ट्रीय सुरक्षा आदेश और एकीकृत कमान
बुधवार, 26 अगस्त को ही आधिकारिक सरकारी गजट (बीओई) ने एक महत्वपूर्ण शाही आदेश प्रकाशित किया, जिसमें स्यूटा में 'राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण स्थिति' घोषित की गई है। इस आदेश के तहत 31 दिसंबर 2026 तक एक एकीकृत कमान स्थापित की गई है, जिसके प्रमुख मंत्री एंजेल विक्टर टोरेस को बनाया गया है। टोरेस ने नेशनल इंटेलिजेंस सेंटर (सीएनआई) द्वारा जारी चेतावनियों के संदर्भ में गृह मंत्री फर्नांडो ग्रांडे-मार्लास्का के पक्ष का समर्थन किया है।
विपक्ष के आरोप और राजनीतिक विवाद
विपक्षी दल पीपल्स पार्टी (पीपी) के नेता अल्बर्टो नुनेज फीजो ने 'ऑफिशियल सीक्रेट्स कमेटी' (आधिकारिक गोपनीयता समिति) की बैठक बुलाने की माँग की है। उनका कहना है कि सीएनआई को यह स्पष्ट करना चाहिए कि घटनाओं के बारे में सरकार का 'पक्ष' क्या था, क्योंकि रक्षा मंत्री मार्गरीटा रोबल्स और गृह मंत्री मार्लास्का के बयान आपस में विरोधाभासी रहे हैं। फीजो ने सरकार पर सीधे तौर पर झूठ बोलने का आरोप भी लगाया है।
स्यूटा संकट: क्या हुआ था
जुलाई 2026 के अंत में मोरक्को से लगभग 70,000 से 80,000 प्रवासी अवैध रूप से स्पेनिश स्वायत्त क्षेत्र स्यूटा में दाखिल हो गए — कुछ तैरकर, कुछ समुद्र तट और बाड़ पार करके। इस अचानक और भारी भीड़ ने स्यूटा के प्रशासन को पूरी तरह हैरान कर दिया। इस छोटे से क्षेत्र की प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा गई, जिससे व्यापक अराजकता और गंभीर मानवीय संकट पैदा हुआ। भगदड़ और डूबने की घटनाओं में 70 से अधिक लोगों की जान चली गई।
आगे क्या होगा
3 सितंबर को संसद में सांचेज की पेशी यह तय करेगी कि सरकार इस संकट की जिम्मेदारी किस तरह स्वीकार करती है और भविष्य की रणनीति क्या होगी। गौरतलब है कि एकीकृत कमान 31 दिसंबर 2026 तक सक्रिय रहेगी, और इस दौरान स्यूटा में प्रवासी प्रबंधन की समीक्षा जारी रहेगी। विपक्ष की माँगें और सरकार के भीतर के विरोधाभास इस सत्र को राजनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाते हैं।