चंपावत में खड़ी होली महोत्सव का उद्घाटन: सीएम धामी ने सांस्कृतिक संरक्षण की प्रतिबद्धता जताई
सारांश
Key Takeaways
- खड़ी होली महोत्सव का आयोजन कुमाऊं की संस्कृति को संरक्षित करने का प्रयास है।
- मुख्यमंत्री धामी ने सांस्कृतिक विरासत के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता जाहिर की।
- इस महोत्सव से स्थानीय कलाकारों को पहचान मिलती है।
- सामाजिक एकता और सद्भाव को बढ़ावा देने का यह एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
- कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
चंपावत, २४ फरवरी (राष्ट्र प्रेस)। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चंपावत में कलश संगीत कला समिति द्वारा आयोजित खड़ी होली महोत्सव का वर्चुअल माध्यम से औपचारिक शुभारम्भ किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कुमाऊं की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को एक बार फिर से स्पष्ट किया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि कुमाऊं क्षेत्र की खड़ी होली और बैठकी होली सिर्फ एक पर्व या सांस्कृतिक आयोजन नहीं हैं, बल्कि यह हमारी समृद्ध लोकसंस्कृति, पारंपरिक लोकसंगीत और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि यह परंपरा, जो पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है, हमारी लोक आस्था, सांस्कृतिक चेतना और सामूहिक एकता को मजबूत करती आई है।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करते हैं। होली के पारंपरिक गीत, वाद्ययंत्र और सामूहिक सहभागिता से भरा यह उत्सव लोगों को अपने बचपन की मधुर यादों से जोड़ता है और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से अवगत कराने का माध्यम बनता है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लोककला, लोकभाषा और लोकसंस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्रदेश में विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों, मेलों और महोत्सवों को प्रोत्साहन देकर स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान किया जा रहा है। इससे न केवल सांस्कृतिक विरासत को मजबूती मिल रही है, बल्कि स्थानीय कलाकारों को भी नई पहचान और अवसर प्राप्त हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के आयोजन प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को नई ऊर्जा प्रदान करेंगे और सामाजिक सौहार्द तथा सामूहिकता की भावना को और अधिक मजबूत करेंगे। उन्होंने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि कलश संगीत कला समिति इस प्रकार के आयोजनों के माध्यम से क्षेत्र की सांस्कृतिक समृद्धि को संरक्षित रखने में अहम भूमिका निभा रही है।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, जनप्रतिनिधि, कलाकार और सांस्कृतिक प्रेमी उपस्थित रहे।