18 अक्टूबर 2026
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चोरबागान हादसे के बाद हावड़ा के सहयात्री क्लब पंडाल में प्रवेश बंद, ढाँचा कमज़ोर होने की आशंका

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चोरबागान हादसे के बाद हावड़ा के सहयात्री क्लब पंडाल में प्रवेश बंद, ढाँचा कमज़ोर होने की आशंका

सारांश

चोरबागान में 19 श्रद्धालुओं की भगदड़ में मौत के बाद हावड़ा प्रशासन ने सहयात्री क्लब के 'केदारनाथ दर्शन' थीम पंडाल में प्रवेश बंद कर दिया — लकड़ी-बांस के ढाँचे की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए। दुर्गापूजा के अंतिम दिनों में भीड़ प्रबंधन की यह चूक पश्चिम बंगाल में पंडाल सुरक्षा मानकों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।

मुख्य बातें

चोरबागान दुर्गापूजा पंडाल में शनिवार, 18 अक्टूबर 2026 को भगदड़ जैसी स्थिति में 19 दर्शनार्थियों की मौत हुई।
हावड़ा सिटी पुलिस ने रविवार शाम 5 बजे से सहयात्री सार्वजनिक दुर्गोत्सव कमेटी पंडाल में प्रवेश बंद कर दिया।
दीपाप्रिया की अगुवाई में PWD इंजीनियरों और पुलिस की टीम ने पंडाल का निरीक्षण किया।
पंडाल का ढाँचा लकड़ी, बांस और ईंटों से बना था — लोहे के ढाँचे की जगह — जिसे प्रशासन ने असुरक्षित माना।
इस वर्ष पंडाल की थीम 'केदारनाथ दर्शन' थी और पिछले तीन दिनों से शाम को भारी भीड़ उमड़ रही थी।
क्लब पदाधिकारी देवाशीष मित्र ने कहा कि कमेटी प्रशासन के निर्देशों पर काम कर रही है।

उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गापूजा पंडाल में शनिवार, 18 अक्टूबर 2026 को भगदड़ जैसी स्थिति में 19 दर्शनार्थियों की मौत के बाद प्रशासन ने हावड़ा के कदमतला स्थित सहयात्री सार्वजनिक दुर्गोत्सव कमेटी के पूजा पंडाल में भी आम दर्शकों का प्रवेश तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है। हावड़ा सिटी पुलिस ने रविवार शाम पंडाल के मुख्य प्रवेश द्वार पर नोटिस चस्पा कर गार्ड रेल लगा दी, जिससे दर्शन के लिए पहुँचे सैकड़ों श्रद्धालुओं को खाली हाथ लौटना पड़ा।

चोरबागान हादसे का पृष्ठभूमि

शनिवार शाम उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गोत्सव कमेटी के पंडाल में अचानक भारी भीड़ उमड़ने से धक्का-मुक्की और भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। इस दुखद घटना में 19 दर्शनार्थियों की जान चली गई। घटना ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन को तत्काल अलर्ट मोड में ला दिया, और अन्य बड़े पूजा पंडालों की सुरक्षा समीक्षा के आदेश दिए गए।

सहयात्री क्लब पंडाल का निरीक्षण

रविवार दोपहर हावड़ा की जिलाधिकारी पी. दीपाप्रिया के नेतृत्व में लोक निर्माण विभाग (PWD) के इंजीनियरों और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की एक संयुक्त टीम ने मध्य हावड़ा के कदमतला स्थित सहयात्री क्लब के पूजा पंडाल का विस्तृत निरीक्षण किया।

इस वर्ष सहयात्री क्लब की पूजा की थीम 'केदारनाथ दर्शन' थी। पंडाल में संकरे पहाड़ी रास्ते की अनुकृति बनाते हुए ऊपर जाने पर केदारनाथ मंदिर की प्रतिकृति तैयार की गई थी और भीतर माँ दुर्गा की भव्य प्रतिमा स्थापित थी। उत्तराखंड के इस प्रसिद्ध तीर्थ को आकर्षक रूप में प्रस्तुत किया गया था, जिसके कारण पिछले तीन दिनों से शाम होते ही यहाँ भारी भीड़ जुट रही थी।

प्रवेश बंद होने का कारण

निरीक्षण के दौरान प्रशासन को पंडाल के ढाँचे को लेकर गंभीर चिंता हुई। अधिकारियों के अनुसार, पंडाल का निर्माण लोहे के ढाँचे की जगह लकड़ी, बांस और ईंटों से किया गया था, जो इतनी बड़ी भीड़ के लिए पर्याप्त सुरक्षित नहीं माना गया। इसी कारण रविवार शाम पाँच बजे से पंडाल में दर्शनार्थियों का प्रवेश पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया गया।

क्लब के पदाधिकारी देवाशीष मित्र ने बताया कि कमेटी पूरी तरह प्रशासन के निर्देशों के अनुसार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी संभावित दुर्घटना से बचने के लिए यह एहतियाती कदम उठाया गया है।

दर्शनार्थियों पर असर

प्रवेश बंद होने के बाद दर्शन के लिए पहुँचे सैकड़ों श्रद्धालुओं को निराश होकर लौटना पड़ा। कई लोग दूर से ही पंडाल का दर्शन करके वापस चले गए। गार्ड रेल से मुख्य द्वार बंद होने के बाद पंडाल के बाहर एकत्रित भीड़ को पुलिस ने शांतिपूर्वक वहाँ से हटाया।

व्यापक सुरक्षा सतर्कता

गौरतलब है कि दुर्गापूजा के अंतिम दिनों में भीड़ का प्रबंधन हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। चोरबागान हादसे ने एक बार फिर पंडाल की संरचनात्मक सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की अनिवार्यता को रेखांकित किया है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल के विभिन्न ज़िलों में हज़ारों पंडाल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित कर रहे हैं। आने वाले दिनों में प्रशासन अन्य बड़े पंडालों की भी सुरक्षा समीक्षा जारी रख सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि दुर्भाग्यपूर्ण संयोग। हादसे के बाद की प्रतिक्रिया भले ही त्वरित हो, लेकिन असली जवाबदेही यह होगी कि इस त्योहारी सत्र से पहले अनुमति देने की प्रक्रिया में सुरक्षा मानक कहाँ थे।
RashtraPress
18 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हावड़ा के सहयात्री क्लब पंडाल में प्रवेश क्यों बंद किया गया?
चोरबागान पंडाल हादसे में 19 मौतों के बाद प्रशासनिक निरीक्षण में पाया गया कि सहयात्री क्लब का पंडाल लोहे की जगह लकड़ी, बांस और ईंटों से बना है, जो भारी भीड़ के लिए असुरक्षित है। इसी कारण रविवार शाम 5 बजे से प्रवेश बंद कर दिया गया।
चोरबागान दुर्गापूजा हादसे में कितने लोगों की जान गई?
उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गोत्सव कमेटी के पंडाल में शनिवार शाम भारी भीड़ के कारण धक्का-मुक्की और भगदड़ जैसी स्थिति बनी, जिसमें 19 दर्शनार्थियों की मौत हो गई।
सहयात्री क्लब के पंडाल का निरीक्षण किसने किया?
हावड़ा की जिलाधिकारी पी. दीपाप्रिया के नेतृत्व में PWD इंजीनियरों और पुलिस अधिकारियों की संयुक्त टीम ने रविवार दोपहर कदमतला स्थित सहयात्री क्लब पंडाल का निरीक्षण किया।
इस वर्ष सहयात्री क्लब पंडाल की थीम क्या थी?
इस वर्ष सहयात्री क्लब के पूजा पंडाल की थीम 'केदारनाथ दर्शन' थी, जिसमें संकरे पहाड़ी रास्ते और केदारनाथ मंदिर की आकर्षक प्रतिकृति बनाई गई थी। भव्य सजावट के कारण पिछले तीन दिनों से शाम को यहाँ भारी भीड़ उमड़ रही थी।
क्या अन्य पूजा पंडालों पर भी प्रतिबंध लगाया जा सकता है?
चोरबागान हादसे के बाद प्रशासन ने अन्य पूजा पंडालों की सुरक्षा समीक्षा का काम तेज़ कर दिया है। जिन पंडालों का ढाँचा मानकों पर खरा नहीं उतरेगा, उनमें भी इसी तरह प्रवेश बंद किया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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