स्वतंत्रता दिवस पर हेमंत सोरेन ने रांची में फहराया तिरंगा, युवाओं से बोले — आपका भविष्य मेरी व्यक्तिगत ज़िम्मेदारी
सारांश
मुख्य बातें
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 15 अगस्त 2026 को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में राष्ट्रीय ध्वज फहराया। ध्वजारोहण के बाद उन्होंने परेड का निरीक्षण किया और राज्यवासियों को संबोधित करते हुए युवाओं को आश्वस्त किया कि उनके भविष्य और मेहनत की रक्षा करना उनकी सरकार का व्यक्तिगत दायित्व है।
स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि
अपने संबोधन की शुरुआत में मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद और डॉ. भीमराव अंबेडकर समेत देश के स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने झारखंड के अमर नायकों — भगवान बिरसा मुंडा, सिद्धू-कानू, चांद-भैरव, तिलका मांझी, फूलो-झानो, नीलांबर-पीतांबर और शेख भिखारी — को भी नमन किया। शिबू सोरेन के संघर्षों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनका पूरा जीवन जल, जंगल, जमीन और आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए समर्पित रहा है।
भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता का वादा
छात्र आंदोलन और पेपर लीक की घटनाओं का सीधा उल्लेख करते हुए सोरेन ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में इस तरह की घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन दूसरे राज्यों की विफलताओं को झारखंड की ज़िम्मेदारी से बचने का बहाना नहीं बनाया जाएगा। उन्होंने घोषणा की कि जेपीएससी और अन्य भर्ती एजेंसियों के ज़रिए समयबद्ध नियुक्तियाँ की जाएंगी, वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी होगा और ओएमआर तथा उत्तर कुंजी समय पर सार्वजनिक की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी भ्रष्ट तंत्र या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी। इसके साथ ही सरकार ने 'छात्रों की बात छात्रों के साथ' अभियान शुरू किया है, जिसके तहत विद्यार्थियों, शिक्षकों और विशेषज्ञों से सुझाव लेकर नियमों के दायरे में ज़रूरी बदलाव किए जाएंगे।
रोज़गार के नए अवसर और विकास का मॉडल
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल सरकारी पदों को भरना नहीं है। एमएसएमई, कृषि, डेयरी, मत्स्य पालन, पर्यटन, डिजिटल सेवाओं और स्टार्टअप के क्षेत्र में भी रोज़गार के नए अवसर सृजित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि सरकार लाह, तसर, औषधीय पौधों और लघु वनोपज को बेहतर बाज़ार से जोड़ने की दिशा में काम कर रही है, और वैल्यू एडिशन तथा ब्रांडिंग के ज़रिए इनसे जुड़े परिवारों की आय बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
सतत विकास और आदिवासी पहचान
झारखंड के विकास मॉडल पर बोलते हुए सोरेन ने कहा कि राज्य की पहचान केवल खनिज संपदा के दोहन से नहीं, बल्कि सतत विकास, पारंपरिक ज्ञान और सामाजिक न्याय पर आधारित मॉडल से होनी चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि झारखंड की पारंपरिक जीवनशैली सदियों से प्रकृति के साथ संतुलन पर आधारित रही है — एक ऐसी विरासत जो आज वैश्विक जलवायु संकट के बीच और भी प्रासंगिक हो गई है। ग्राम सभा, स्थानीय ज्ञान और आधुनिक तकनीक को साथ लेकर विकास की नई व्यवस्था तैयार करने का संकल्प भी उन्होंने दोहराया।
झारखंड का रजत जयंती वर्ष
सोरेन ने याद दिलाया कि झारखंड अपने गठन के 25वें वर्ष में प्रवेश कर चुका है — यह राज्य के लिए आगे की दिशा तय करने का ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने कहा कि यह पड़ाव केवल उत्सव का नहीं, बल्कि संकल्प और जवाबदेही का भी क्षण है। आने वाले वर्षों में राज्य के युवाओं, किसानों और वनवासी समुदायों के लिए ठोस नीतिगत बदलाव सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता के साथ मुख्यमंत्री ने अपना संबोधन समाप्त किया।