बिहार बाढ़: CM सम्राट चौधरी का पश्चिम चंपारण में हवाई सर्वेक्षण, दशहरे से पहले ₹7,000 की सहायता का निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 30 सितंबर 2026 को पश्चिम चंपारण के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण कर राहत कार्यों का जायजा लिया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि दशहरे से पहले प्रत्येक प्रभावित परिवार को ₹7,000 की अनुग्रह सहायता राशि अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही उन्होंने सारण जिले के मकेर प्रखंड के हैजलपुर पंचायत क्षेत्र में टूटे तटबंध का भी हवाई निरीक्षण किया।
हवाई सर्वेक्षण और प्रभावित क्षेत्र
मुख्यमंत्री ने पटना से पश्चिम चंपारण पहुँचने के दौरान विभिन्न नदियों के जलस्तर और बाढ़ग्रस्त इलाकों की स्थिति का आकलन किया। उन्होंने बगहा, बैरिया प्रखंड के बथना, योगापट्टी प्रखंड के मच्छरगांवा तथा नौतन प्रखंड के शिवराजपुर, बनकटवा और आसपास के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने बैरिया प्रखंड के बथना स्थित पीएम श्री राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय परिसर में संचालित बाढ़ राहत शिविर का सीधे निरीक्षण किया। उन्होंने सामुदायिक रसोई, चिकित्सा शिविर, पेयजल व्यवस्था, शौचालय, पशु राहत शिविर, पशु शेड तथा महिलाओं एवं पुरुषों के लिए आवासन सुविधाओं की विस्तृत जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने परोसा भोजन, बच्चों से की बातचीत
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सामुदायिक रसोई में स्वयं बाढ़ पीड़ितों को भोजन परोसा — एक ऐसा कदम जो प्रशासनिक संवेदनशीलता का प्रतीक माना जा रहा है। उन्होंने राहत शिविर में संचालित अस्थायी आंगनबाड़ी बाल शिविर का भी निरीक्षण किया और बच्चों से उनकी पढ़ाई तथा उपलब्ध सुविधाओं के बारे में सीधे बातचीत की।
चिकित्सा शिविर में दवाओं और उपचार की व्यवस्था का जायजा लेने के बाद उन्होंने शिविर में रह रहे लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को तत्काल समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
नेपाल से आया अब तक का सर्वाधिक पानी: जल संसाधन सचिव
बथना स्थित जिला स्तरीय कंट्रोल रूम में समीक्षा बैठक के दौरान जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि नेपाल की ओर से इस बार अब तक का सर्वाधिक पानी आया है। बगहा, रेवा घाट, लालगंज और गोपालगंज में उच्चतम जलस्तर दर्ज किया गया है।
उन्होंने बताया कि गंगा का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर है, हालाँकि पानी धीरे-धीरे घट रहा है। डुमरिया पुल के समीप जलस्तर स्थिर है और पानी का दबाव भी कम हो रहा है। पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी तरनजोत सिंह ने जिले के मानचित्र के माध्यम से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों, तटबंधों, राहत एवं चिकित्सा शिविरों तथा NDRF व SDRF की तैनाती की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री के निर्देश और आगे की योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि नेपाल की तराई से पानी आने के कारण इस बार बाढ़ की विकट स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने बताया कि कोसी और महानंदा नदी का सर्वे कराया जा रहा है, ताकि स्थायी समाधान की दिशा में काम किया जा सके। उनके अनुसार अगले दो-तीन दिनों में पानी निकलने की संभावना है।
अधिकारियों को दिए गए प्रमुख निर्देशों में शामिल हैं — पर्याप्त संख्या में सामुदायिक रसोई का संचालन, स्लुइस गेट खोलकर जल निकासी सुनिश्चित करना, नदियों के जलस्तर और तटबंधों की निरंतर निगरानी, पर्याप्त नावों की व्यवस्था, सूखा राशन व अन्य राहत सामग्री का वितरण, तथा पशुओं के लिए चारा और आश्रय की समुचित व्यवस्था। NDRF और SDRF की तैनाती बनाए रखने और राहत-बचाव कार्य अनवरत जारी रखने का भी निर्देश दिया गया।
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार हर वर्ष मानसून के दौरान बड़े पैमाने पर बाढ़ की मार झेलता है, और नेपाल से आने वाले जल की मात्रा पर नियंत्रण एक दीर्घकालिक चुनौती बनी हुई है। राज्य सरकार के अनुसार स्थिति पूरी तरह सामान्य होने तक सामुदायिक रसोई और राहत शिविर चालू रहेंगे।