30 सितंबर 2026
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बिहार बाढ़: CM सम्राट चौधरी का पश्चिम चंपारण में हवाई सर्वेक्षण, दशहरे से पहले ₹7,000 की सहायता का निर्देश

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बिहार बाढ़: CM सम्राट चौधरी का पश्चिम चंपारण में हवाई सर्वेक्षण, दशहरे से पहले ₹7,000 की सहायता का निर्देश

सारांश

बिहार में नेपाल की तराई से आए अब तक के सर्वाधिक पानी ने पश्चिम चंपारण समेत कई जिलों को बाढ़ में डुबो दिया है। CM सम्राट चौधरी ने हवाई सर्वेक्षण कर दशहरे से पहले हर प्रभावित परिवार को ₹7,000 देने का निर्देश दिया और कोसी-महानंदा के स्थायी समाधान की भी बात कही।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 30 सितंबर 2026 को पश्चिम चंपारण के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया।
प्रत्येक बाढ़ पीड़ित परिवार को दशहरे से पहले ₹7,000 की अनुग्रह सहायता राशि देने का निर्देश जारी।
चंद्रशेखर सिंह के अनुसार नेपाल से इस बार अब तक का सर्वाधिक पानी आया; गंगा अभी भी खतरे के निशान से ऊपर।
कोसी और महानंदा नदी का सर्वे शुरू; स्थायी समाधान की दिशा में काम होगा।
अगले दो-तीन दिनों में जलस्तर घटने की संभावना; NDRF व SDRF की तैनाती जारी रहेगी।
सारण जिले के हैजलपुर पंचायत में टूटे तटबंध का भी हवाई निरीक्षण किया गया।

बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 30 सितंबर 2026 को पश्चिम चंपारण के बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण कर राहत कार्यों का जायजा लिया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि दशहरे से पहले प्रत्येक प्रभावित परिवार को ₹7,000 की अनुग्रह सहायता राशि अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए। इसके साथ ही उन्होंने सारण जिले के मकेर प्रखंड के हैजलपुर पंचायत क्षेत्र में टूटे तटबंध का भी हवाई निरीक्षण किया।

हवाई सर्वेक्षण और प्रभावित क्षेत्र

मुख्यमंत्री ने पटना से पश्चिम चंपारण पहुँचने के दौरान विभिन्न नदियों के जलस्तर और बाढ़ग्रस्त इलाकों की स्थिति का आकलन किया। उन्होंने बगहा, बैरिया प्रखंड के बथना, योगापट्टी प्रखंड के मच्छरगांवा तथा नौतन प्रखंड के शिवराजपुर, बनकटवा और आसपास के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया।

इसके बाद मुख्यमंत्री ने बैरिया प्रखंड के बथना स्थित पीएम श्री राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय परिसर में संचालित बाढ़ राहत शिविर का सीधे निरीक्षण किया। उन्होंने सामुदायिक रसोई, चिकित्सा शिविर, पेयजल व्यवस्था, शौचालय, पशु राहत शिविर, पशु शेड तथा महिलाओं एवं पुरुषों के लिए आवासन सुविधाओं की विस्तृत जानकारी ली।

मुख्यमंत्री ने परोसा भोजन, बच्चों से की बातचीत

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सामुदायिक रसोई में स्वयं बाढ़ पीड़ितों को भोजन परोसा — एक ऐसा कदम जो प्रशासनिक संवेदनशीलता का प्रतीक माना जा रहा है। उन्होंने राहत शिविर में संचालित अस्थायी आंगनबाड़ी बाल शिविर का भी निरीक्षण किया और बच्चों से उनकी पढ़ाई तथा उपलब्ध सुविधाओं के बारे में सीधे बातचीत की।

चिकित्सा शिविर में दवाओं और उपचार की व्यवस्था का जायजा लेने के बाद उन्होंने शिविर में रह रहे लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को तत्काल समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

नेपाल से आया अब तक का सर्वाधिक पानी: जल संसाधन सचिव

बथना स्थित जिला स्तरीय कंट्रोल रूम में समीक्षा बैठक के दौरान जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने बताया कि नेपाल की ओर से इस बार अब तक का सर्वाधिक पानी आया है। बगहा, रेवा घाट, लालगंज और गोपालगंज में उच्चतम जलस्तर दर्ज किया गया है।

उन्होंने बताया कि गंगा का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर है, हालाँकि पानी धीरे-धीरे घट रहा है। डुमरिया पुल के समीप जलस्तर स्थिर है और पानी का दबाव भी कम हो रहा है। पश्चिम चंपारण के जिलाधिकारी तरनजोत सिंह ने जिले के मानचित्र के माध्यम से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों, तटबंधों, राहत एवं चिकित्सा शिविरों तथा NDRF व SDRF की तैनाती की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री के निर्देश और आगे की योजना

मुख्यमंत्री ने कहा कि नेपाल की तराई से पानी आने के कारण इस बार बाढ़ की विकट स्थिति उत्पन्न हुई है। उन्होंने बताया कि कोसी और महानंदा नदी का सर्वे कराया जा रहा है, ताकि स्थायी समाधान की दिशा में काम किया जा सके। उनके अनुसार अगले दो-तीन दिनों में पानी निकलने की संभावना है।

अधिकारियों को दिए गए प्रमुख निर्देशों में शामिल हैं — पर्याप्त संख्या में सामुदायिक रसोई का संचालन, स्लुइस गेट खोलकर जल निकासी सुनिश्चित करना, नदियों के जलस्तर और तटबंधों की निरंतर निगरानी, पर्याप्त नावों की व्यवस्था, सूखा राशन व अन्य राहत सामग्री का वितरण, तथा पशुओं के लिए चारा और आश्रय की समुचित व्यवस्था। NDRF और SDRF की तैनाती बनाए रखने और राहत-बचाव कार्य अनवरत जारी रखने का भी निर्देश दिया गया।

यह ऐसे समय में आया है जब बिहार हर वर्ष मानसून के दौरान बड़े पैमाने पर बाढ़ की मार झेलता है, और नेपाल से आने वाले जल की मात्रा पर नियंत्रण एक दीर्घकालिक चुनौती बनी हुई है। राज्य सरकार के अनुसार स्थिति पूरी तरह सामान्य होने तक सामुदायिक रसोई और राहत शिविर चालू रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 की सहायता की घोषणा राहत की दृष्टि से स्वागत योग्य है, लेकिन बिहार में बाढ़ की यह पुनरावृत्ति एक गहरे संरचनात्मक प्रश्न को उजागर करती है — नेपाल से आने वाले जल पर निर्भरता और तटबंधों की कमज़ोरी दशकों पुरानी समस्या है। कोसी और महानंदा के सर्वे की बात हर साल होती है, लेकिन स्थायी अंतरराष्ट्रीय जल-प्रबंधन समझौते और तटबंध सुदृढ़ीकरण की गति सवालों के घेरे में रहती है। दशहरे की समयसीमा से जुड़ी सहायता राशि राजनीतिक संवेदनशीलता दर्शाती है, पर असली परीक्षा यह होगी कि वितरण वास्तव में समय पर और पारदर्शी तरीके से हो — जो अतीत में अक्सर चुनौतीपूर्ण रहा है।
RashtraPress
30 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में बाढ़ पीड़ितों को ₹7,000 की सहायता कब तक मिलेगी?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने निर्देश दिया है कि दशहरे से पहले प्रत्येक बाढ़ प्रभावित परिवार को ₹7,000 की अनुग्रह सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए। यह सहायता एसओपी के अनुसार वितरित की जाएगी।
पश्चिम चंपारण में इस बार बाढ़ इतनी गंभीर क्यों है?
जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह के अनुसार नेपाल की तराई से इस बार अब तक का सर्वाधिक पानी आया है, जिससे बगहा, रेवा घाट, लालगंज और गोपालगंज में उच्चतम जलस्तर दर्ज हुआ। गंगा का जलस्तर भी खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है।
CM सम्राट चौधरी ने बाढ़ राहत शिविरों में क्या व्यवस्थाएं देखीं?
मुख्यमंत्री ने बैरिया प्रखंड के बथना स्थित पीएम श्री राजकीयकृत प्लस टू उच्च विद्यालय परिसर में संचालित राहत शिविर का निरीक्षण किया। उन्होंने सामुदायिक रसोई, चिकित्सा शिविर, पेयजल, शौचालय, पशु राहत शिविर और आंगनबाड़ी बाल शिविर की व्यवस्थाओं की जानकारी ली और स्वयं पीड़ितों को भोजन परोसा।
बिहार में बाढ़ की स्थिति कब तक सामान्य होने की उम्मीद है?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि अगले दो-तीन दिनों में पानी निकलने की संभावना है। डुमरिया पुल के समीप जलस्तर स्थिर है और पानी का दबाव भी कम हो रहा है, हालाँकि गंगा अभी खतरे के निशान से ऊपर बनी हुई है।
कोसी और महानंदा नदी के सर्वे का उद्देश्य क्या है?
मुख्यमंत्री के अनुसार कोसी और महानंदा नदी का सर्वे कराया जा रहा है ताकि बाढ़ की समस्या का समग्र अध्ययन कर स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाए जा सकें। यह नेपाल की तराई से आने वाले अतिरिक्त जल की चुनौती से निपटने की दीर्घकालिक योजना का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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