मुख्यमंत्री योगी ने गो-सेवा में योगदान देने वालों को देने का किया ऐलान

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मुख्यमंत्री योगी ने गो-सेवा में योगदान देने वालों को देने का किया ऐलान

सारांश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गो-आश्रय स्थलों की आत्मनिर्भरता को बढ़ाने के लिए विशेष योजना बनाई है। ये प्रयास न केवल गोसेवा को सम्मानित करेंगे, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाएंगे। जानिए इस महत्वपूर्ण निर्णय के बारे में।

Key Takeaways

  • मुख्यमंत्री योगी का गो-सेवा के प्रति समर्पण
  • गो-आश्रय स्थलों में तकनीकी सुधार
  • स्थानीय किसानों के साथ समन्वय
  • गोबर गैस संयंत्रों का विस्तार
  • भूसा बैंक की स्थापना

लखनऊ, 21 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गो-रक्षा और गो-आश्रय स्थलों को आत्मनिर्भर बनाने में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि गोसेवा भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इस क्षेत्र में समर्पित लोगों का सार्वजनिक सम्मान होना चाहिए।

सीएम योगी ने शनिवार को गोसेवा आयोग की बैठक में निराश्रित गो-आश्रय स्थलों की व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने प्रत्येक गोशाला में 'भूसा बैंक' की स्थापना पर जोर दिया। स्थानीय किसानों के साथ समन्वय स्थापित कर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने और प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों को गो-आश्रय स्थलों से जोड़ने के लिए निर्देश दिए।

उन्होंने सभी गो-आश्रय स्थलों में सीसीटीवी कैमरों की स्थापना और सतत निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए और इसके लिए सीएसआर फंड के प्रभावी उपयोग पर बल दिया। पारदर्शिता और तकनीक आधारित निगरानी से व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

मुख्यमंत्री ने गोसेवा आयोग के अधिकारियों और पशुधन विभाग के अधिकारियों को नियमित रूप से गो-आश्रय स्थलों का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। आयोग के सदस्य 2-2 के समूह में मंडलवार भ्रमण कर 'भूसा बैंक' की स्थापना और गोचर भूमि के विस्तार कार्य को गति देने को कहा गया है। प्रत्येक भ्रमण की रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपी जाएगी। आयोग के भ्रमण में वरिष्ठ विभागीय अधिकारी भी शामिल होंगे। साथ ही, विभागीय मंत्री के नेतृत्व में राज्यव्यापी निरीक्षण और मुख्यालय स्तर से निदेशक द्वारा मासिक औचक निरीक्षण भी सुनिश्चित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि गो-संरक्षण केवल आस्था का विषय नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था, प्राकृतिक खेती और सतत विकास का एक मजबूत आधार है। इस दृष्टि से गो-आश्रय स्थलों के संचालन में पारदर्शिता, तकनीक और जनसहभागिता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। डीबीटी प्रणाली के माध्यम से समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने और प्रत्येक गो-आश्रय स्थल पर गोवंश की दैनिक संख्या का अनिवार्य रजिस्टर संचालित करने के निर्देश भी दिए गए।

बैठक में जानकारी दी गई कि प्रदेश में वर्तमान में 7,527 गो-आश्रय स्थलों में 12.39 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं। इनमें 6,433 अस्थायी स्थलों में 9.89 लाख, 518 वृहद गो-संरक्षण केंद्रों में 1.58 लाख, 323 कान्हा गो-आश्रयों में 77,925 तथा 253 कांजी हाउस में 13,576 गोवंश संरक्षित हैं। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत 1.14 लाख लाभार्थियों को 1.83 लाख गोवंश सौंपे गए हैं, जिनके सत्यापन और उचित भरण-पोषण के निर्देश दिए गए हैं।

भूसा और साइलेज की उपलब्धता के संबंध में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए टेंडर प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूरी की जा रही है। निगरानी व्यवस्था के तहत 74 जनपदों में 5,446 गो-आश्रय स्थलों पर 7,592 सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जा चुके हैं। 52 जनपदों में कमांड एंड कंट्रोल रूम स्थापित हैं, जबकि शेष में प्रक्रिया प्रगति पर है। गोचर भूमि के प्रभावी उपयोग के लिए 61,118 हेक्टेयर से अधिक भूमि उपलब्ध है, जिसमें से 10,641.99 हेक्टेयर को गो-आश्रय स्थलों से जोड़ा गया है और 7,364.03 हेक्टेयर में हरे चारे का विकास किया जा चुका है।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में 97 गोबर गैस संयंत्र संचालित हैं, जो स्वच्छ ऊर्जा और आय सृजन का प्रभावी माध्यम बन रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इनके विस्तार पर जोर दिया। साथ ही, विभिन्न जनपदों में स्वयं सहायता समूहों और एनजीओ द्वारा गो-पेंट, वर्मी कम्पोस्ट, गो-दीप सहित अन्य उत्पादों के निर्माण को आत्मनिर्भरता का सफल मॉडल बताया।

मुजफ्फरनगर का गो-अभयारण्य इस दिशा में एक उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में उभर रहा है। वृहद गो-संरक्षण केंद्रों की प्रगति की समीक्षा में बताया गया कि 630 स्वीकृत केंद्रों में से 518 पूर्ण हो चुके हैं, जबकि शेष निर्माणाधीन हैं। पशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में खुरपका-मुंहपका, गलाघोटू और लंपी स्किन डिजीज के खिलाफ व्यापक टीकाकरण अभियान चलाए जा रहे हैं और पशुपालकों को निरंतर प्रशिक्षित किया जा रहा है।

Point of View

तकनीक और जनसहभागिता को प्राथमिकता देने से ग्रामीण समुदाय को लाभ होगा। इस तरह के कदम से न केवल गोवंश की सुरक्षा होगी, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था भी सुदृढ़ होगी।
NationPress
21/03/2026

Frequently Asked Questions

मुख्यमंत्री योगी ने गो-सेवा में योगदान देने वालों को कैसे सम्मानित करने का निर्णय लिया है?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोसेवा आयोग के माध्यम से उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित करने का निर्णय लिया है।
गो-आश्रय स्थलों में क्या नई व्यवस्थाएं लागू की जाएंगी?
गो-आश्रय स्थलों में सीसीटीवी कैमरों की स्थापना, भूसा बैंक का गठन और प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों को जोड़ा जाएगा।
प्रदेश में गो-आश्रय स्थलों की वर्तमान स्थिति क्या है?
प्रदेश में वर्तमान में 7,527 गो-आश्रय स्थल हैं, जिनमें 12.39 लाख से अधिक गोवंश संरक्षित हैं।
गोबर गैस संयंत्रों का क्या महत्व है?
गोबर गैस संयंत्र स्वच्छ ऊर्जा और आय सृजन का एक प्रभावी माध्यम हैं, जिनका विस्तार किया जाएगा।
क्या गो-संरक्षण केवल आस्था का विषय है?
नहीं, गो-संरक्षण ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सतत विकास का एक मजबूत आधार भी है।
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