सीएमएफआरआई का 'शार्क अवेयर' ऐप लॉन्च, संकटग्रस्त शार्क-रे प्रजातियों की पहचान अब डिजिटल तकनीक से
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) ने 28 जुलाई 2025 को कोच्चि स्थित अपने मुख्यालय में 'शार्क अवेयर' मोबाइल ऐप और एक इंटरैक्टिव ई-लर्निंग मॉड्यूल लॉन्च किया, जो संकटग्रस्त शार्क और रे मछलियों की प्रजातियों की पहचान और उनके संरक्षण को डिजिटल माध्यम से सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम पहल है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अंतर्गत आने वाले इस संस्थान ने यह दोनों प्लेटफॉर्म नेशनल फिशरीज डेवलपमेंट बोर्ड (एनएफडीबी) की वित्तीय सहायता से तैयार किए हैं।
लॉन्च कार्यक्रम और नेतृत्व
केरल के मत्स्य पालन मंत्री वी.ई. अब्दुल गफूर ने कोच्चि स्थित सीएमएफआरआई मुख्यालय में इन दोनों पहलों का औपचारिक उद्घाटन किया। इस परियोजना का नेतृत्व सीएमएफआरआई के फिनफिश मत्स्य पालन विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. लिवी विल्सन ने किया। उन्होंने बताया कि यह ऐप समुद्री मत्स्य पालन और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े लोगों के बीच जानकारी की गहरी खाई को पाटने के लिए विकसित किया गया है।
ऐप की मुख्य विशेषताएँ
'शार्क अवेयर' ऐप वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (2022 में संशोधित) की अनुसूची-1, अनुसूची-2 और अनुसूची-4 में सूचीबद्ध संरक्षित शार्क और रे मछलियों की प्रजातियों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराता है। इसके अतिरिक्त यह ऐप उपयोगकर्ताओं को इन समुद्री जीवों से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारी, कानूनी सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधी नियम और संरक्षण का पर्यावरणीय महत्व सरल भाषा में समझाता है।
डॉ. विल्सन के अनुसार, 'यह ऐप लोगों को संरक्षित शार्क और रे मछलियों की सही पहचान करने में मदद करेगा। साथ ही, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू करने और इन प्रजातियों के संरक्षण के प्रयासों को भी मजबूत करेगा।' यह ऐप जल्द ही गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध होने की उम्मीद है।
ई-लर्निंग मॉड्यूल और लक्षित वर्ग
इन प्लेटफॉर्म का प्राथमिक लक्ष्य मछुआरों, मत्स्य विभाग के अधिकारियों, वन्यजीव संरक्षण एजेंसियों, शोधकर्ताओं और छात्रों को एक ही डिजिटल माध्यम पर एकजुट करना है। इंटरैक्टिव ई-लर्निंग मॉड्यूल में प्रश्नोत्तरी, तत्काल मूल्यांकन और व्यक्तिगत सीखने की प्रगति की निगरानी जैसी सुविधाएँ शामिल हैं, जिससे उपयोगकर्ता अपनी सुविधा के अनुसार प्रशिक्षण ले सकेंगे।
यह डिजिटल मंच वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, लुप्तप्राय वन्य जीवों और वनस्पतियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार संबंधी सम्मेलन (साइट्स/CITES), प्रजाति-पहचान की वैज्ञानिक पद्धतियों और संरक्षित शार्क तथा रे मछलियों के संरक्षण के महत्व पर केंद्रित सामग्री उपलब्ध कराता है।
संरक्षण की व्यापक पृष्ठभूमि
यह पहल ऐसे समय में आई है जब भारत के तटीय जल में शार्क और रे मछलियों की कई प्रजातियाँ अत्यधिक मछली पकड़ने और अवैध व्यापार के कारण संकट में हैं। गौरतलब है कि साइट्स के तहत कई शार्क प्रजातियों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर नियंत्रण लागू है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर पहचान और अनुपालन की कमी एक बड़ी चुनौती रही है। सीएमएफआरआई का मानना है कि वैज्ञानिक और कानूनी जानकारी को सुलभ बनाने से जागरूकता बढ़ेगी और अधिक लोग संरक्षण प्रयासों में सक्रिय भागीदारी करेंगे।
आगे की राह
सीएमएफआरआई टिकाऊ मत्स्य पालन और जैव विविधता संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए डिजिटल तकनीक के उपयोग पर निरंतर बल दे रहा है। 'शार्क अवेयर' ऐप के गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध होने के बाद इसकी पहुँच देशभर के मछुआरों और संरक्षण कार्यकर्ताओं तक होने की उम्मीद है, जो भारत के समुद्री जैव विविधता संरक्षण प्रयासों को एक नई दिशा दे सकती है।