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केरल में समुद्री जैव विविधता के दूत बनेंगे टूरिस्ट गाइड, CMFRI ने 24 गाइडों को दिया वैज्ञानिक प्रशिक्षण

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केरल में समुद्री जैव विविधता के दूत बनेंगे टूरिस्ट गाइड, CMFRI ने 24 गाइडों को दिया वैज्ञानिक प्रशिक्षण

सारांश

केरल में सीएमएफआरआई ने 24 सरकार-प्रमाणित टूरिस्ट गाइडों को समुद्री जैव विविधता और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र पर वैज्ञानिक प्रशिक्षण देकर उन्हें संरक्षण का दूत बनाया है। यह 'फिश वॉक' कार्यक्रम का विस्तार है और केरल में पर्यटन को पर्यावरण जागरूकता से जोड़ने की अपनी तरह की पहली पहल है।

मुख्य बातें

सीएमएफआरआई ने कोच्चि में 24 सरकार-प्रमाणित टूरिस्ट गाइडों को समुद्री जैव विविधता पर गहन वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया।
यह पहल सीएमएफआरआई के 'फिश वॉक' आउटरीच कार्यक्रम का विस्तार है और केरल में अपनी तरह की पहली है।
प्रशिक्षण में चेलानम फिशिंग हार्बर, पुथेथोडु बीच, कोट्टापुरम फिश केज फार्म और पनम्बुकड मैंग्रोव के प्रत्यक्ष भ्रमण शामिल थे।
आईसीएआर के 98वें स्थापना दिवस पर कोच्चि मेयर वीके मिनिमोले ने प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए।
सीएमएफआरआई निदेशक डॉ.
ग्रिन्सन जॉर्ज ने इसे विज्ञान और पर्यटन को जोड़ने वाला नया सामुदायिक सहभागिता मॉडल बताया।

कोच्चि में आईसीएआर–केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) ने 17 जुलाई 2026 को एक अभिनव पहल के तहत 24 सरकार-प्रमाणित टूरिस्ट गाइडों को समुद्री जैव विविधता और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र पर गहन वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया, ताकि वे केरल के समुद्र तटों और बैकवॉटर पर आने वाले पर्यटकों को संरक्षण के प्रति जागरूक कर सकें। केरल में अपनी तरह की यह पहली पहल पर्यटन को सतत यात्रा और पर्यावरण जागरूकता का सशक्त माध्यम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पहल की पृष्ठभूमि और उद्देश्य

यह कार्यक्रम सीएमएफआरआई के पिछले वर्ष शुरू किए गए लोकप्रिय 'फिश वॉक' आउटरीच कार्यक्रम का विस्तार है। इसका मूल उद्देश्य टूरिस्ट गाइडों को समुद्री संरक्षण का प्रभावी संवाहक बनाना है, जो हर वर्ष हज़ारों घरेलू और विदेशी पर्यटकों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुँचा सकें। गौरतलब है कि पर्यटन गाइड किसी भी क्षेत्र की पहली छवि बनाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं, और उनके माध्यम से संरक्षण का संदेश व्यापक जन-समुदाय तक पहुँचाना अधिक प्रभावी सिद्ध हो सकता है।

प्रशिक्षण में क्या शामिल था

गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम में केरल के विविध तटीय और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों को शामिल किया गया — जिनमें समुद्र तट, मुहाने, मैंग्रोव, बैकवॉटर, चट्टानी भित्तियाँ, खुला समुद्र और गहरे समुद्री आवास सम्मिलित थे। प्रतिभागियों को राज्य की समृद्ध समुद्री जैव विविधता, पारंपरिक एवं आधुनिक मत्स्य पालन, मैरीकल्चर पद्धतियों और केरल की अर्थव्यवस्था में समुद्री क्षेत्र के योगदान की विस्तृत जानकारी दी गई।

कक्षा-आधारित शिक्षण के साथ-साथ गाइडों ने चेलानम फिशिंग हार्बर, पुथेथोडु बीच, कोट्टापुरम फिश केज फार्म और पनम्बुकड मैंग्रोव का प्रत्यक्ष भ्रमण भी किया। इससे उन्हें तटीय पारिस्थितिकी तंत्र, टिकाऊ मछली पकड़ने की विधियों और जलकृषि (एक्वाकल्चर) का सीधा व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।

विशेषज्ञ की राय

सीएमएफआरआई के निदेशक डॉ. ग्रिन्सन जॉर्ज ने कहा, 'यह पहल एक नया सामुदायिक सहभागिता मॉडल है जो विज्ञान और पर्यटन को एक साझा उद्देश्य के लिए एकजुट करता है। टूरिस्ट गाइड हर वर्ष हज़ारों पर्यटकों से मिलते हैं और वे हमारे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने तथा सतत मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की अहमियत बताने के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति हैं।' उन्होंने आगे कहा कि वैज्ञानिक जानकारी से लैस करके संस्थान समुद्री संरक्षण के संदेशों को सामान्य जागरूकता कार्यक्रमों की तुलना में कहीं अधिक दूर तक पहुँचा रहा है।

प्रमाण-पत्र वितरण समारोह

इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (आईसीएआर) के 98वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एक विशेष समारोह में कोच्चि की मेयर वीके मिनिमोले ने सभी 24 प्रतिभागी गाइडों को पाठ्यक्रम पूर्णता का प्रमाण-पत्र प्रदान किया। यह आयोजन इस पहल को संस्थागत मान्यता देने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा।

आगे की राह

सीएमएफआरआई को उम्मीद है कि इस प्रशिक्षण के बाद केरल के तट पर होने वाला हर गाइडेड पर्यटन दौरा न केवल राज्य की प्राकृतिक सुंदरता दिखाने का अवसर बनेगा, बल्कि पर्यटकों को उसके संरक्षण के लिए प्रेरित भी करेगा। यह पहल इस बढ़ती वैश्विक समझ को रेखांकित करती है कि जब पर्यटकों को किसी स्थान के पर्यावरण को समझने और उसकी सराहना करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, तो पर्यटन स्वयं प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा में एक सशक्त भूमिका निभा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसका असली महत्व यह है कि यह संरक्षण विज्ञान को उस अंतिम कड़ी से जोड़ती है जहाँ आम नागरिक सबसे अधिक ग्रहणशील होता है — पर्यटन के दौरान। केरल के तटों पर बढ़ते पर्यटन दबाव और मछुआरा समुदायों पर जलवायु परिवर्तन के असर को देखते हुए, यह कदम समय पर है। हालाँकि असली परीक्षा यह होगी कि ये प्रशिक्षित गाइड पर्यटकों के व्यवहार में वास्तविक बदलाव ला पाते हैं या नहीं — और क्या इस मॉडल को व्यापक पैमाने पर दोहराया जाएगा। 24 गाइडों से शुरुआत उत्साहजनक है, लेकिन केरल की विशाल पर्यटन अर्थव्यवस्था को देखते हुए यह संख्या अभी बहुत सीमित है।
RashtraPress
18 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीएमएफआरआई का टूरिस्ट गाइड प्रशिक्षण कार्यक्रम क्या है?
यह कोच्चि स्थित आईसीएआर–सीएमएफआरआई द्वारा शुरू की गई एक पहल है जिसमें 24 सरकार-प्रमाणित टूरिस्ट गाइडों को केरल के तटीय पारिस्थितिकी तंत्र, समुद्री जैव विविधता और सतत मत्स्य पालन पर वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया गया। इसका उद्देश्य गाइडों को समुद्री संरक्षण का प्रभावी संवाहक बनाना है।
इस प्रशिक्षण में गाइडों को क्या-क्या सिखाया गया?
प्रशिक्षण में समुद्र तट, मुहाने, मैंग्रोव, बैकवॉटर, चट्टानी भित्तियाँ और गहरे समुद्री आवास जैसे पारिस्थितिकी तंत्र शामिल थे। इसके अलावा पारंपरिक एवं आधुनिक मत्स्य पालन, मैरीकल्चर और केरल की अर्थव्यवस्था में समुद्री क्षेत्र के योगदान की जानकारी भी दी गई। गाइडों ने चेलानम हार्बर और पनम्बुकड मैंग्रोव सहित कई स्थलों का प्रत्यक्ष भ्रमण भी किया।
यह पहल केरल के पर्यटन के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
केरल में अपनी तरह की यह पहली पहल पर्यटन को पर्यावरण जागरूकता और सतत यात्रा का माध्यम बनाती है। टूरिस्ट गाइड हर वर्ष हज़ारों घरेलू और विदेशी पर्यटकों से मिलते हैं, इसलिए उनके माध्यम से समुद्री संरक्षण का संदेश व्यापक स्तर पर पहुँचाया जा सकता है।
प्रमाण-पत्र वितरण समारोह कब और कहाँ हुआ?
प्रमाण-पत्र वितरण आईसीएआर के 98वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में हुआ। कोच्चि की मेयर वीके मिनिमोले ने सभी 24 प्रतिभागी गाइडों को पाठ्यक्रम पूर्णता का प्रमाण-पत्र प्रदान किया।
यह कार्यक्रम 'फिश वॉक' से कैसे जुड़ा है?
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम सीएमएफआरआई के पिछले वर्ष शुरू किए गए 'फिश वॉक' आउटरीच कार्यक्रम का विस्तार है। जहाँ 'फिश वॉक' आम जनता को समुद्री जीवन से परिचित कराता है, वहीं यह नया कार्यक्रम विशेष रूप से टूरिस्ट गाइडों को वैज्ञानिक रूप से सक्षम बनाकर उनकी पहुँच को और व्यापक करता है।
राष्ट्र प्रेस
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