केरल में समुद्री जैव विविधता के दूत बनेंगे टूरिस्ट गाइड, CMFRI ने 24 गाइडों को दिया वैज्ञानिक प्रशिक्षण
सारांश
मुख्य बातें
कोच्चि में आईसीएआर–केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (सीएमएफआरआई) ने 17 जुलाई 2026 को एक अभिनव पहल के तहत 24 सरकार-प्रमाणित टूरिस्ट गाइडों को समुद्री जैव विविधता और तटीय पारिस्थितिकी तंत्र पर गहन वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया, ताकि वे केरल के समुद्र तटों और बैकवॉटर पर आने वाले पर्यटकों को संरक्षण के प्रति जागरूक कर सकें। केरल में अपनी तरह की यह पहली पहल पर्यटन को सतत यात्रा और पर्यावरण जागरूकता का सशक्त माध्यम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
पहल की पृष्ठभूमि और उद्देश्य
यह कार्यक्रम सीएमएफआरआई के पिछले वर्ष शुरू किए गए लोकप्रिय 'फिश वॉक' आउटरीच कार्यक्रम का विस्तार है। इसका मूल उद्देश्य टूरिस्ट गाइडों को समुद्री संरक्षण का प्रभावी संवाहक बनाना है, जो हर वर्ष हज़ारों घरेलू और विदेशी पर्यटकों तक वैज्ञानिक जानकारी पहुँचा सकें। गौरतलब है कि पर्यटन गाइड किसी भी क्षेत्र की पहली छवि बनाने में निर्णायक भूमिका निभाते हैं, और उनके माध्यम से संरक्षण का संदेश व्यापक जन-समुदाय तक पहुँचाना अधिक प्रभावी सिद्ध हो सकता है।
प्रशिक्षण में क्या शामिल था
गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम में केरल के विविध तटीय और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्रों को शामिल किया गया — जिनमें समुद्र तट, मुहाने, मैंग्रोव, बैकवॉटर, चट्टानी भित्तियाँ, खुला समुद्र और गहरे समुद्री आवास सम्मिलित थे। प्रतिभागियों को राज्य की समृद्ध समुद्री जैव विविधता, पारंपरिक एवं आधुनिक मत्स्य पालन, मैरीकल्चर पद्धतियों और केरल की अर्थव्यवस्था में समुद्री क्षेत्र के योगदान की विस्तृत जानकारी दी गई।
कक्षा-आधारित शिक्षण के साथ-साथ गाइडों ने चेलानम फिशिंग हार्बर, पुथेथोडु बीच, कोट्टापुरम फिश केज फार्म और पनम्बुकड मैंग्रोव का प्रत्यक्ष भ्रमण भी किया। इससे उन्हें तटीय पारिस्थितिकी तंत्र, टिकाऊ मछली पकड़ने की विधियों और जलकृषि (एक्वाकल्चर) का सीधा व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।
विशेषज्ञ की राय
सीएमएफआरआई के निदेशक डॉ. ग्रिन्सन जॉर्ज ने कहा, 'यह पहल एक नया सामुदायिक सहभागिता मॉडल है जो विज्ञान और पर्यटन को एक साझा उद्देश्य के लिए एकजुट करता है। टूरिस्ट गाइड हर वर्ष हज़ारों पर्यटकों से मिलते हैं और वे हमारे समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र को संरक्षित करने तथा सतत मत्स्य पालन को बढ़ावा देने की अहमियत बताने के लिए सबसे उपयुक्त व्यक्ति हैं।' उन्होंने आगे कहा कि वैज्ञानिक जानकारी से लैस करके संस्थान समुद्री संरक्षण के संदेशों को सामान्य जागरूकता कार्यक्रमों की तुलना में कहीं अधिक दूर तक पहुँचा रहा है।
प्रमाण-पत्र वितरण समारोह
इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च (आईसीएआर) के 98वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एक विशेष समारोह में कोच्चि की मेयर वीके मिनिमोले ने सभी 24 प्रतिभागी गाइडों को पाठ्यक्रम पूर्णता का प्रमाण-पत्र प्रदान किया। यह आयोजन इस पहल को संस्थागत मान्यता देने की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहा।
आगे की राह
सीएमएफआरआई को उम्मीद है कि इस प्रशिक्षण के बाद केरल के तट पर होने वाला हर गाइडेड पर्यटन दौरा न केवल राज्य की प्राकृतिक सुंदरता दिखाने का अवसर बनेगा, बल्कि पर्यटकों को उसके संरक्षण के लिए प्रेरित भी करेगा। यह पहल इस बढ़ती वैश्विक समझ को रेखांकित करती है कि जब पर्यटकों को किसी स्थान के पर्यावरण को समझने और उसकी सराहना करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, तो पर्यटन स्वयं प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र की सुरक्षा में एक सशक्त भूमिका निभा सकता है।