केरल में महिलाओं को KSRTC बसों में मुफ्त यात्रा 15 जून से, तीन महीने में ₹57 करोड़ का बोझ
सारांश
मुख्य बातें
केरल सरकार की महिला मुफ्त बस यात्रा योजना 15 जून 2026 से लागू होगी, जिसके तहत केरल राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) की साधारण (ऑर्डिनरी) बस सेवाओं में सभी महिलाओं को निःशुल्क यात्रा की सुविधा मिलेगी। KSRTC के अनुमान के अनुसार, केवल पहले तीन महीनों में इस योजना से निगम पर ₹57 करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा।
योजना का दायरा और शर्तें
मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और परिवहन मंत्री सी.पी. जॉन की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में यह निर्णय लिया गया। परिवहन मंत्री जॉन ने स्पष्ट किया कि योजना की विस्तृत घोषणा मुख्यमंत्री सतीशन करेंगे और इससे पहले कैबिनेट में औपचारिक चर्चा होगी।
यह योजना यूडीएफ सरकार के चुनावी वादों में शामिल 'इंदिरा गारंटी' कार्यक्रम का हिस्सा है। शुरुआती 100 दिनों तक इसे परीक्षण के आधार पर लागू किया जाएगा, जिसके दौरान यात्री संख्या, राजस्व हानि और परिचालन प्रभाव का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह सुविधा सभी महिलाओं के लिए होगी — जाति, आय या किसी अन्य आधार पर कोई पात्रता शर्त नहीं होगी। योजना के दुरुपयोग को रोकने के लिए आधार से जुड़े स्मार्ट कार्ड जारी करने पर विचार किया जा रहा है।
वित्तीय बोझ का पूरा हिसाब
KSRTC के आंकड़ों के अनुसार, निगम की सेवाओं में प्रतिदिन लगभग 23 लाख यात्री सफर करते हैं, जिनमें 10 से 12 लाख महिलाएं हैं। इतनी बड़ी संख्या में मुफ्त यात्रा देने से राजस्व पर गहरा असर पड़ना तय है।
KSRTC के अनुमान के मुताबिक वित्तीय भार का ब्यौरा इस प्रकार है: केवल साधारण बसों में मुफ्त यात्रा से तीन महीने में ₹57 करोड़; सिटी फास्ट सेवाएं जोड़ने पर ₹65 करोड़; साधारण, फास्ट पैसेंजर और सुपर फास्ट बसें शामिल करने पर ₹90 करोड़; और सभी श्रेणी की बसों में लागू करने पर ₹112 करोड़ का खर्च आने का अनुमान है।
सरकार ने आश्वासन दिया है कि टिकट राजस्व की पूरी भरपाई सब्सिडी के रूप में सीधे KSRTC को दी जाएगी और बजट में इसके लिए विशेष प्रावधान किया जाएगा। अतिरिक्त धन की व्यवस्था के लिए केरल फाइनेंशियल कॉरपोरेशन के माध्यम से विकल्पों पर भी विचार हो रहा है। वित्त सचिव को ऐसी प्रणाली तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है जिसमें खर्च पहले वहन हो और सरकार बाद में प्रतिपूर्ति करे।
उत्तरी केरल की महिलाओं की चिंता
पहले चरण में केवल साधारण बसों को शामिल किए जाने से मालाबार क्षेत्र सहित उत्तरी जिलों की महिलाओं को लेकर चिंता जताई जा रही है, क्योंकि वहाँ साधारण बसों की संख्या दक्षिणी जिलों की तुलना में काफी कम है। इस असमानता को दूर करने के लिए सरकार ऐसे क्षेत्रों में नई साधारण बस सेवाएं शुरू करने पर विचार कर रही है जहाँ फिलहाल यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।
कर्मचारी संगठनों की माँगें
KSRTC कर्मचारी संगठनों ने योजना के वित्तीय प्रभाव को लेकर अपनी आशंकाएं जाहिर की हैं। सीआईटीयू ने माँग की है कि अतिरिक्त वित्तीय बोझ पूरी तरह सरकार वहन करे, जबकि बीएमएस ने KSRTC को सरकारी विभाग में तब्दील करने की माँग रखी है। सरकार पहले से ही KSRTC के वेतन और पेंशन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।
आगे की राह
परिवहन आयुक्त को परीक्षण अवधि के दौरान वित्तीय प्रभाव का विश्लेषण करते हुए सरकार को रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। इसी रिपोर्ट के आधार पर फास्ट पैसेंजर और लंबी दूरी की अन्य बस सेवाओं तक योजना विस्तार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यह योजना केरल में सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है, बशर्ते वित्तीय प्रबंधन की चुनौती सफलतापूर्वक पार की जाए।