8 अक्टूबर 2026
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मोहन यादव का कांग्रेस पर निशाना: चुनाव आयोग पर दोष नहीं, आत्ममंथन करे पार्टी

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मोहन यादव का कांग्रेस पर निशाना: चुनाव आयोग पर दोष नहीं, आत्ममंथन करे पार्टी

सारांश

मध्य प्रदेश के CM मोहन यादव ने कांग्रेस की चुनाव आयोग-विरोधी मुहिम को सीधी चुनौती दी — जिस संस्था ने केरल और हिमाचल में पार्टी को सत्ता दिलाई, उसी पर सवाल उठाना दोहरा मापदंड है। राहुल गांधी से आत्ममंथन की माँग।

मुख्य बातें

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 8 अक्टूबर 2026 को भोपाल में कांग्रेस की चुनाव आयोग-विरोधी मुहिम को दोहरे मापदंड का उदाहरण बताया।
यादव ने कहा कि केरल और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार उसी चुनाव प्रक्रिया से बनी जिस पर पार्टी अब सवाल उठा रही है।
तमिलनाडु , पश्चिम बंगाल , उत्तर प्रदेश और बिहार में कांग्रेस की कमज़ोरी के लिए पार्टी के संगठन को जिम्मेदार ठहराया।
नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से पार्टी के प्रदर्शन और नेतृत्व का आत्ममंथन करने की अपील की।
संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं बताया।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 8 अक्टूबर 2026 को भोपाल में पत्रकारों से बातचीत के दौरान भारत निर्वाचन आयोग के खिलाफ कांग्रेस की मुहिम पर कड़ा प्रहार किया और कहा कि पार्टी को अपनी चुनावी पराजय का ठीकरा संवैधानिक संस्थाओं पर फोड़ने के बजाय आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से भी अपील की कि वे पार्टी के प्रदर्शन और नेतृत्व की गहन समीक्षा करें।

कांग्रेस के दोहरे मापदंड पर सवाल

मुख्यमंत्री यादव ने तर्क दिया कि जिस चुनाव आयोग की प्रक्रिया के माध्यम से कांग्रेस को केरल और हिमाचल प्रदेश में सरकार बनाने का अवसर मिला, उसी संस्था पर लगातार सवाल उठाना तर्कसंगत नहीं है। उन्होंने कहा, 'यदि चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर ही अविश्वास है, तो केरल में कांग्रेस की जीत का क्या अर्थ है?' यह टिप्पणी कांग्रेस की उस रणनीति को सीधी चुनौती है जिसमें वह चुनावी नतीजों पर निर्वाचन आयोग की भूमिका को लेकर सवाल उठाती रही है।

राज्यवार कमज़ोरी का ज़िक्र

यादव ने कांग्रेस की क्षेत्रीय कमज़ोरियों की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि पार्टी को यह विचार करना चाहिए कि तमिलनाडु में वह लंबे समय से हाशिए पर क्यों है, पश्चिम बंगाल में दशकों से सत्ता से बाहर क्यों है, और उत्तर प्रदेश तथा बिहार सहित अनेक राज्यों में उसका जनाधार क्यों सिकुड़ता जा रहा है। उनके अनुसार, इन प्रश्नों के उत्तर चुनाव आयोग को दोष देने में नहीं, बल्कि पार्टी के संगठन और नेतृत्व की कमियों की ईमानदार पड़ताल में मिलेंगे।

संवैधानिक संस्थाओं पर हमले को लोकतंत्र के लिए खतरा बताया

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और यहाँ चुनावी प्रक्रिया संविधान प्रदत्त व्यवस्था के अंतर्गत संचालित होती है। उन्होंने कहा कि चुनावी पराजय को स्वीकार करने के बजाय संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कई मंचों पर अपनी आपत्तियाँ दर्ज करा रहे हैं।

मोदी की लोकप्रियता पर टिप्पणी

यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि एक साधारण परिवार से निकलकर प्रधानमंत्री पद तक पहुँचे मोदी ने देश का मान-सम्मान बढ़ाया है और उनकी लोकप्रियता को कम करने के प्रयास सफल नहीं होंगे। गौरतलब है कि यह बयान भारतीय जनता पार्टी (BJP) की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसमें विपक्ष पर संस्थाओं की विश्वसनीयता को चुनौती देने का आरोप लगाया जाता है।

कांग्रेस के लिए संदेश

मुख्यमंत्री यादव ने कांग्रेस को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि पार्टी अपनी कमज़ोरियों को स्वीकार करे, संगठन को मज़बूत बनाए और जनता के बीच अपना विश्वास पुनः स्थापित करे। लगातार हार के बाद अराजकता का वातावरण बनाने का प्रयास लोकतंत्र के हित में नहीं है — यह उनकी बात का सार था। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह बयान आगामी चुनावी मौसम से पहले सत्तापक्ष द्वारा विपक्ष को रक्षात्मक स्थिति में रखने की रणनीति का हिस्सा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उन राज्यों का नहीं जहाँ विपक्ष ने ईवीएम या प्रशासनिक पक्षपात को लेकर विशिष्ट और दस्तावेज़ीकृत आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं। संवैधानिक संस्थाओं की आलोचना और उन्हें कमज़ोर करना — दोनों अलग-अलग हैं; इस अंतर को पाटना सत्तापक्ष के लिए राजनीतिक रूप से सुविधाजनक है। साथ ही, BJP स्वयं उन राज्यों में हार के बाद मतगणना प्रक्रिया पर सवाल उठाती रही है — इस दोहरेपन पर यादव का बयान चुप है। असली सवाल यह है कि क्या सत्तापक्ष किसी भी संस्थागत सवाल को 'अराजकता' की संज्ञा देकर वैध जवाबदेही की माँग को भी दबाने की कोशिश तो नहीं कर रहा।
RashtraPress
8 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मोहन यादव ने कांग्रेस को लेकर क्या कहा?
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 8 अक्टूबर 2026 को कहा कि कांग्रेस को अपनी चुनावी पराजय का दोष भारत निर्वाचन आयोग पर मढ़ने के बजाय पार्टी के संगठन और नेतृत्व की कमज़ोरियों का आत्ममंथन करना चाहिए। उन्होंने केरल और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस की सरकार का उदाहरण देते हुए पार्टी के दोहरे मापदंड पर सवाल उठाया।
कांग्रेस चुनाव आयोग पर क्यों सवाल उठा रही है?
कांग्रेस कई राज्यों में चुनावी नतीजों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर आपत्तियाँ जताती रही है। पार्टी का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है, हालाँकि इन आरोपों को सत्तापक्ष खारिज करता है।
यादव ने राहुल गांधी से क्या माँग की?
मुख्यमंत्री यादव ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से अपील की कि वे कांग्रेस के प्रदर्शन और नेतृत्व की गहन समीक्षा करें। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने के बजाय पार्टी को अपने कार्यकर्ताओं का विश्वास पुनः अर्जित करने पर ध्यान देना चाहिए।
किन राज्यों में कांग्रेस की कमज़ोरी का उल्लेख यादव ने किया?
मुख्यमंत्री यादव ने तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और बिहार का नाम लेते हुए कहा कि इन राज्यों में कांग्रेस के जनाधार की गिरावट के लिए पार्टी को खुद ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए, न कि चुनाव आयोग को दोष देना चाहिए।
क्या यह बयान किसी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के संदर्भ में आया है?
यह बयान उस समय आया है जब विपक्षी दल, विशेष रूप से कांग्रेस, भारत निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विभिन्न मंचों पर अपनी आपत्तियाँ दर्ज करा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, BJP द्वारा यह पलटवार आगामी चुनावी मौसम से पहले विपक्ष को रक्षात्मक स्थिति में रखने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
राष्ट्र प्रेस
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