इकरा हसन कांग्रेस गठबंधन से बनी सांसद, बयान पर असीम वकार का पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
सपा सांसद इकरा हसन के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में भाजपा को केवल अखिलेश यादव हरा सकते हैं और कांग्रेस अकेले कुछ नहीं कर पाएगी — कांग्रेस नेताओं ने 22 सितंबर 2026 को तीखी प्रतिक्रिया दी। कांग्रेस नेता असीम वकार ने सीधे कहा कि इकरा हसन खुद कांग्रेस के गठबंधन की बदौलत लोकसभा तक पहुँची हैं।
असीम वकार का सीधा पलटवार
कांग्रेस नेता असीम वकार ने कहा, 'कांग्रेस के गठबंधन से इकरा हसन सांसद बनी हैं। इकरा हसन की जुबान फिसल गई या उनकी याददाश्त कमजोर हो, या उनको नहीं पता है कि राजनीति में किस तरह का बयान देना है।' वकार ने आगे कहा कि अगर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन न होता, तो इकरा हसन लोकसभा नहीं पहुँच पातीं।
उदित राज ने आँकड़ों से दिया जवाब
कांग्रेस नेता उदित राज ने 2019 और 2024 के चुनावी आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि जब 2024 में इंडी गठबंधन बना, तो समाजवादी पार्टी ने 36 सीटें जीतीं। इससे पहले 2019 में सपा के पास महज छह सांसद थे।
उदित राज ने कहा, 'राजनीति में एक और एक हमेशा दो नहीं होते; एक और एक ग्यारह भी हो सकते हैं।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि इकरा हसन को अपनी राजनीतिक समझ को दुरुस्त करना चाहिए।
कांग्रेस प्रवक्ता ने गठबंधन को बताया अटूट
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश में इंडी गठबंधन चुनाव लड़ेगा। उन्होंने कहा, 'पानी में लाठी मारने से पानी अलग नहीं होता।' राजपूत ने यह भी कहा कि राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच गठबंधन सुनिश्चित है।
भाजपा ने बताया आपसी विवाद
भाजपा प्रवक्ता गुरु प्रकाश ने इस घटनाक्रम पर कहा कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच खींचतान काफी दिनों से जारी है। उन्होंने दावा किया कि दोनों पार्टियों के बीच कोई साझा नीति नहीं है, केवल विवाद है।
पृष्ठभूमि: यूपी 2027 और गठबंधन की अनिश्चितता
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर सपा और कांग्रेस के बीच अब तक कोई औपचारिक गठबंधन नहीं हुआ है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने अखिलेश यादव से जल्द गठबंधन को अंतिम रूप देने की अपील की थी और यह भी कहा था कि कांग्रेस के बिना किसी भी राज्य में माहौल नहीं बन सकता।
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब 2027 के चुनाव की तैयारियाँ तेज हो रही हैं और दोनों दलों के भीतर रणनीतिक दबाव बढ़ रहा है। आने वाले हफ्तों में दोनों दलों के बीच गठबंधन वार्ता की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है।