त्रिपुरा मेडिकल कॉलेज में युवती की संदिग्ध मौत: सीपीआई (एम) ने SIT जांच की माँग की, मजिस्ट्रियल जांच शुरू
सारांश
मुख्य बातें
अगरतला के पश्चिम त्रिपुरा जिले के मधुबन स्थित एक निजी मेडिकल कॉलेज में कार्यरत 24 वर्षीय युवती की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत के मामले ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मचा दी है। 10 जून की रात कॉलेज परिसर से शव बरामद होने के बाद राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई (एम)] ने मामले की विशेष जांच दल (SIT) या न्यायिक जांच कराने की माँग की है। परिजनों ने भी हत्या की आशंका जताते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की अपील की है।
मुख्य घटनाक्रम
युवती का शव 10 जून की रात कॉलेज परिसर से बरामद हुआ। अगले दिन परिजनों और कॉलेज प्रशासन की मौजूदगी में शव को पोस्टमार्टम के लिए अगरतला सरकारी मेडिकल कॉलेज एवं गोविंद बल्लभ पंत अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने जांच शुरू करते हुए मामले में एक युवक को गिरफ्तार भी किया है। यह निजी मेडिकल कॉलेज पश्चिम बंगाल के बीरभूम स्थित एक गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) द्वारा संचालित है।
जानकारी के अनुसार, पीड़िता पहले मेडिकल कॉलेज में केयरटेकर के रूप में कार्यरत थी और हाल ही में उसे एग्जामिनेशन सेल में स्थानांतरित किया गया था।
सीपीआई (एम) के आरोप और माँगें
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं सीपीआई (एम) के राज्य सचिव जितेंद्र चौधरी रविवार को पीड़िता के घर पहुँचे और परिजनों से मुलाकात की। उनके साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता और युवा संगठन के राज्य सचिव नबरुण देब भी मौजूद रहे।
परिजनों और स्थानीय लोगों से बातचीत के बाद चौधरी ने दावा किया कि यह मामला आत्महत्या नहीं, बल्कि कथित तौर पर हत्या हो सकती है। उन्होंने सवाल उठाया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने से पहले पुलिस किसी निष्कर्ष पर कैसे पहुँच सकती है। उन्होंने कहा, 'जब तक SIT या न्यायिक जांच नहीं होगी, तब तक घटना की सच्चाई सामने नहीं आ पाएगी।'
चौधरी ने यह भी आरोप लगाया कि घटना से पहले युवती की माँ ने उसे घर बुलाया था, लेकिन कथित तौर पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने तीन दिनों तक उसे जाने की अनुमति नहीं दी। इसके अलावा, उन्होंने दावा किया कि युवती की इच्छा के विरुद्ध उसे नाइट शिफ्ट में काम करने के लिए लगाया गया था।
पुलिस जांच पर सवाल
सीपीआई (एम) नेता ने जांच अधिकारियों की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि संबंधित एसडीपीओ ने जांच पूरी होने से पहले ही इसे प्रेम प्रसंग से जुड़ा मामला बताने वाले बयान सार्वजनिक कर दिए। परिजनों और स्थानीय लोगों ने भी पुलिस जांच की प्रगति से असंतोष जताया है। कुछ स्थानीय लोगों ने कथित तौर पर मौत से पहले यौन उत्पीड़न की आशंका भी व्यक्त की है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
सरकार की प्रतिक्रिया
त्रिपुरा सरकार के गृह विभाग ने 11 जून को मामले में मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जारी किए। अतिरिक्त सचिव तरित कांति चकमा द्वारा जारी आदेश के अनुसार, पश्चिम त्रिपुरा के जिलाधिकारी एवं कलेक्टर डॉ. विशाल कुमार को जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। उन्हें घटना के सभी पहलुओं की जांच कर 15 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट गृह विभाग को सौंपनी होगी।
आगे क्या होगा
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और मजिस्ट्रियल जांच के निष्कर्ष इस मामले की दिशा तय करेंगे। विपक्ष के दबाव और परिजनों की माँगों को देखते हुए राज्य सरकार पर SIT गठित करने का दबाव बढ़ सकता है। गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में कार्यस्थल पर महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।