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केरल: सीपीआई (एम) नेता केपी उदयभानु ने कांग्रेस की श्रीना देवी से माँगा ₹50 लाख हर्जाना, फेसबुक पोस्ट पर मानहानि का नोटिस

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केरल: सीपीआई (एम) नेता केपी उदयभानु ने कांग्रेस की श्रीना देवी से माँगा ₹50 लाख हर्जाना, फेसबुक पोस्ट पर मानहानि का नोटिस

सारांश

एक फेसबुक पोस्ट ने केरल में वाम-कांग्रेस रंजिश को कानूनी अखाड़े में खींचा। सीपीआई (एम) नेता केपी उदयभानु ने कांग्रेस पंचायत सदस्य श्रीना देवी कुंजम्मा को ₹50 लाख हर्जाने का नोटिस दिया है — पुलिस एफआईआर पहले ही दर्ज हो चुकी है।

मुख्य बातें

सीपीआई (एम) नेता केपी उदयभानु ने ₹50 लाख हर्जाने की माँग करते हुए कानूनी नोटिस भेजा।
नोटिस कांग्रेस पंचायत सदस्य श्रीना देवी कुंजम्मा को भेजा गया, जिसमें 15 दिनों में पोस्ट हटाने और माफी माँगने की शर्त है।
अदूर पुलिस ने उदयभानु की शिकायत के आधार पर श्रीना देवी कुंजम्मा के विरुद्ध एफआईआर भी दर्ज की है।
विवादित फेसबुक पोस्ट में पथानामथिट्टा जिला पंचायत अध्यक्ष के कार्यकाल से जुड़े व्यक्तिगत आरोप लगाए गए थे — जो अभी केवल दावे हैं।
श्रीना देवी कुंजम्मा पहले सीपीआई में थीं और बाद में कांग्रेस में शामिल हुईं; विवाद का राजनीतिक संदर्भ भी उतना ही जटिल है।

सीपीआई (एम) राज्य समिति के सदस्य केपी उदयभानु ने पथानामथिट्टा जिला पंचायत की कांग्रेस सदस्य श्रीना देवी कुंजम्मा को कानूनी नोटिस भेजकर ₹50 लाख हर्जाने की माँग की है। नोटिस में कथित मानहानिकारक फेसबुक पोस्ट को 15 दिनों के भीतर हटाने और लिखित माफी माँगने की शर्त रखी गई है। 22 अक्टूबर 2026 को सामने आया यह विवाद केरल की स्थानीय राजनीति में सोशल मीडिया के बढ़ते कानूनी निहितार्थों को उजागर करता है।

विवाद की जड़ — वह फेसबुक पोस्ट

श्रीना देवी कुंजम्मा की विवादित फेसबुक पोस्ट में उस दौर की कुछ घटनाओं पर सवाल उठाए गए थे, जब उदयभानु पथानामथिट्टा जिला पंचायत के अध्यक्ष पद पर थे। पोस्ट में कथित तौर पर आरोप लगाया गया था कि उदयभानु आधिकारिक कार्य चर्चा के बहाने पेरिंगानाड में एक महिला पंचायत कर्मचारी के घर गए थे।

इसके अलावा, पोस्ट में उनके वर्तमान वाहन के उपयोग पर भी सवाल उठाए गए और कुछ अन्य व्यक्तिगत आरोप भी लगाए गए थे। उल्लेखनीय है कि ये सभी आरोप अब तक केवल दावे हैं और किसी भी आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

पुलिस मामला और कानूनी कार्रवाई

उदयभानु ने इन आरोपों को 'पूरी तरह झूठा और मानहानिकारक' बताते हुए न केवल हर्जाने का नोटिस भेजा, बल्कि उनकी शिकायत के आधार पर अदूर पुलिस ने श्रीना देवी कुंजम्मा के विरुद्ध प्राथमिकी भी दर्ज की। एफआईआर के अनुसार, शिकायत में आरोप लगाया गया कि फेसबुक पोस्ट के ज़रिए उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुँचाने और उन्हें गलत जीवनशैली वाला व्यक्ति चित्रित करने की कोशिश की गई।

कानूनी नोटिस में तीन शर्तें हैं — पोस्ट हटाना, लिखित माफी और 15 दिनों के भीतर जवाब देना। यदि इन शर्तों का पालन नहीं हुआ, तो मामला सीधे अदालत में जाने की संभावना है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

इस विवाद की राजनीतिक परत और भी पेचीदा है। श्रीना देवी कुंजम्मा पहले सीपीआई से जुड़ी थीं और बाद में कांग्रेस में शामिल हो गईं। यह ऐसे समय में आया जब विवादित पोस्ट कथित तौर पर तब सामने आई, जब उदयभानु ने कांग्रेस के पूर्व पलक्कड विधायक राहुल मामकूटथिल की आलोचना की थी। राहुल मामकूटथिल को यौन दुराचार के आरोप सामने आने के बाद कांग्रेस से बाहर किया जा चुका है।

गौरतलब है कि केरल में वाम और कांग्रेस के बीच की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता पंचायत स्तर तक गहरी है, और सोशल मीडिया इस रस्साकशी का नया मैदान बन चुका है।

आगे क्या होगा

अब यह देखना होगा कि श्रीना देवी कुंजम्मा 15 दिनों की निर्धारित समयसीमा में माफी माँगती हैं, समझौते का रास्ता अपनाती हैं या फिर यह विवाद अदालती लड़ाई में तब्दील हो जाता है। एक स्थानीय फेसबुक पोस्ट से शुरू हुआ यह मामला अब पुलिस एफआईआर और ₹50 लाख के हर्जाने की माँग तक पहुँच चुका है — जो केरल की स्थानीय राजनीति में डिजिटल अभिव्यक्ति की सीमाओं पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि पंचायत स्तर की राजनीतिक प्रतिशोध की बानगी है। ₹50 लाख हर्जाने की माँग और एफआईआर एक साथ — यह कानूनी दबाव का वह संयोजन है जो प्रतिद्वंद्वियों को चुप कराने के लिए इस्तेमाल होता देखा गया है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूकती है वह यह है कि इस विवाद की पृष्ठभूमि में पलक्कड के पूर्व विधायक राहुल मामकूटथिल का यौन दुराचार प्रकरण है — जो बताता है कि यह तनाव कहीं अधिक गहरा है।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

केपी उदयभानु ने कांग्रेस नेता को कानूनी नोटिस क्यों भेजा?
सीपीआई (एम) नेता केपी उदयभानु ने कांग्रेस पंचायत सदस्य श्रीना देवी कुंजम्मा के विरुद्ध कानूनी नोटिस इसलिए भेजा, क्योंकि उन पर आरोप है कि उन्होंने एक कथित मानहानिकारक फेसबुक पोस्ट के ज़रिए उदयभानु की सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुँचाने की कोशिश की। नोटिस में ₹50 लाख हर्जाने के साथ 15 दिनों में पोस्ट हटाने और माफी माँगने की माँग की गई है।
विवादित फेसबुक पोस्ट में क्या था?
पोस्ट में कथित तौर पर उदयभानु के पथानामथिट्टा जिला पंचायत अध्यक्ष रहने के दौरान की घटनाओं पर सवाल उठाए गए थे। इनमें एक महिला पंचायत कर्मचारी के घर जाने और उनके वाहन उपयोग से जुड़े आरोप शामिल थे — हालाँकि ये सभी अभी केवल दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
क्या इस मामले में पुलिस एफआईआर भी दर्ज हुई है?
हाँ, उदयभानु की शिकायत के आधार पर अदूर पुलिस ने श्रीना देवी कुंजम्मा के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की है। एफआईआर में आरोप है कि फेसबुक पोस्ट के ज़रिए उनकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुँचाने और उन्हें गलत जीवनशैली वाला व्यक्ति दिखाने की कोशिश की गई।
इस विवाद की राजनीतिक पृष्ठभूमि क्या है?
श्रीना देवी कुंजम्मा पहले सीपीआई की सदस्य थीं और बाद में कांग्रेस में शामिल हुईं। कथित तौर पर यह विवादित पोस्ट तब आई जब उदयभानु ने कांग्रेस के पूर्व पलक्कड विधायक राहुल मामकूटथिल की आलोचना की थी, जिन्हें यौन दुराचार के आरोपों के बाद पार्टी से हटाया जा चुका है।
अब यह मामला किस दिशा में जा सकता है?
नोटिस में 15 दिनों की समयसीमा दी गई है, जिसमें श्रीना देवी कुंजम्मा माफी माँग सकती हैं, समझौता कर सकती हैं या फिर मामला अदालत में पहुँच सकता है। पुलिस एफआईआर पहले से दर्ज होने के कारण आपराधिक और दीवानी — दोनों मोर्चों पर कानूनी लड़ाई की संभावना बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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