तिरुवनंतपुरम मेयर वीवी राजेश ने सीपीआई(एम) नेता एसपी दीपक को भेजा ₹5 करोड़ का मानहानि नोटिस
सारांश
मुख्य बातें
तिरुवनंतपुरम के महापौर वीवी राजेश ने 8 अक्टूबर 2026 को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई(एम)] के पार्षद और नगर निगम के एलडीएफ संसदीय दल के नेता एसपी दीपक को ₹5 करोड़ के मुआवजे की माँग करते हुए मानहानि का कानूनी नोटिस जारी किया। यह नोटिस निगम के रिकॉर्ड में एक पार्षद के हस्ताक्षर की कथित जालसाजी से जुड़े उन बयानों के संदर्भ में है, जो दीपक ने सार्वजनिक रूप से दिए थे।
विवाद की जड़
यह पूरा मामला नगर निगम पार्षद आर. सुगथन की उपस्थिति से जुड़ा है। आरोप है कि 26 फरवरी, 11 मार्च और 27 अप्रैल को आयोजित परिषद की बैठकों में सुगथन की अनुपस्थिति के बावजूद उनके हस्ताक्षर जाली तरीके से उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज किए गए।
दीपक ने 4 अक्टूबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह आरोप लगाया था कि यह जालसाजी मेयर के कार्यालय में राजेश की जानकारी और कथित मिलीभगत से की गई। दीपक का यह भी दावा था कि उन्होंने सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत निगम के उपस्थिति रजिस्टर की प्रति प्राप्त की और उसमें हस्ताक्षर जाली पाए।
नोटिस में क्या कहा गया
अधिवक्ता सेंथिल कुमार एस. के माध्यम से जारी इस नोटिस में दीपक को 15 दिन के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। राजेश ने नोटिस में दीपक के सभी आरोपों को 'पूरी तरह झूठा, दुर्भावनापूर्ण और निराधार' बताया है।
नोटिस के अनुसार, दीपक ने बिना किसी पुख्ता सबूत के आरोप लगाए और राजेश पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ मिलकर निगम की कार्यवाही में हेरफेर करने का आरोप भी मढ़ा। राजेश ने इन आरोपों को अपनी प्रतिष्ठा और मेयर पद की गरिमा पर सीधा हमला बताया है।
प्रतिष्ठा को नुकसान का दावा
राजेश ने कहा कि दीपक के बयान समाचार चैनलों और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक रूप से प्रसारित हुए, जिससे उनकी सार्वजनिक छवि को गंभीर क्षति पहुँची। उन्होंने दावा किया कि उनका राजनीतिक रिकॉर्ड हमेशा बेदाग रहा है और इन आरोपों के कारण उन्हें अपमान, मानसिक पीड़ा और प्रतिष्ठा की हानि झेलनी पड़ी है।
नोटिस में यह भी कहा गया है कि दीपक के बयान राजेश के नेतृत्व में चल रही निगम की विकास गतिविधियों को बाधित करने के उद्देश्य से दिए गए थे और इनसे निगम के अधिकारियों व कर्मचारियों के मनोबल पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
आगे की कानूनी कार्रवाई
नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि दीपक तय समयसीमा में संतोषजनक कदम नहीं उठाते, तो राजेश उनके विरुद्ध दीवानी और आपराधिक दोनों प्रकार की कानूनी कार्यवाही शुरू करेंगे। यह मामला तिरुवनंतपुरम नगर निगम में सत्ताधारी एलडीएफ और विपक्षी खेमे के बीच गहरे होते राजनीतिक टकराव का संकेत देता है। आने वाले दिनों में इस विवाद के कानूनी और राजनीतिक — दोनों मोर्चों पर नए मोड़ आने की संभावना है।