8 अक्टूबर 2026
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तिरुवनंतपुरम मेयर वीवी राजेश ने सीपीआई(एम) नेता एसपी दीपक को भेजा ₹5 करोड़ का मानहानि नोटिस

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तिरुवनंतपुरम मेयर वीवी राजेश ने सीपीआई(एम) नेता एसपी दीपक को भेजा ₹5 करोड़ का मानहानि नोटिस

सारांश

तिरुवनंतपुरम मेयर वीवी राजेश ने सीपीआई(एम) नेता एसपी दीपक पर ₹5 करोड़ का मानहानि नोटिस ठोका है। विवाद की जड़ में है — निगम बैठकों में एक पार्षद की कथित जाली उपस्थिति। यह मामला केरल में एलडीएफ के भीतर और सत्ता पक्ष बनाम विपक्ष के बीच बढ़ते तनाव को उजागर करता है।

मुख्य बातें

तिरुवनंतपुरम महापौर वीवी राजेश ने 8 अक्टूबर 2026 को ₹5 करोड़ के मुआवजे की माँग करते हुए मानहानि नोटिस जारी किया।
नोटिस सीपीआई(एम) पार्षद व एलडीएफ संसदीय दल नेता एसपी दीपक को भेजा गया है।
सुगथन की 26 फरवरी, 11 मार्च और 27 अप्रैल की बैठकों में कथित जाली उपस्थिति से जुड़ा है।
दीपक को 15 दिन में जवाब देना होगा, अन्यथा दीवानी व आपराधिक कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा।
राजेश ने दीपक के BJP-RSS मिलीभगत के आरोपों को 'झूठा और दुर्भावनापूर्ण' बताकर खारिज किया।

तिरुवनंतपुरम के महापौर वीवी राजेश ने 8 अक्टूबर 2026 को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई(एम)] के पार्षद और नगर निगम के एलडीएफ संसदीय दल के नेता एसपी दीपक को ₹5 करोड़ के मुआवजे की माँग करते हुए मानहानि का कानूनी नोटिस जारी किया। यह नोटिस निगम के रिकॉर्ड में एक पार्षद के हस्ताक्षर की कथित जालसाजी से जुड़े उन बयानों के संदर्भ में है, जो दीपक ने सार्वजनिक रूप से दिए थे।

विवाद की जड़

यह पूरा मामला नगर निगम पार्षद आर. सुगथन की उपस्थिति से जुड़ा है। आरोप है कि 26 फरवरी, 11 मार्च और 27 अप्रैल को आयोजित परिषद की बैठकों में सुगथन की अनुपस्थिति के बावजूद उनके हस्ताक्षर जाली तरीके से उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज किए गए।

दीपक ने 4 अक्टूबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह आरोप लगाया था कि यह जालसाजी मेयर के कार्यालय में राजेश की जानकारी और कथित मिलीभगत से की गई। दीपक का यह भी दावा था कि उन्होंने सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत निगम के उपस्थिति रजिस्टर की प्रति प्राप्त की और उसमें हस्ताक्षर जाली पाए।

नोटिस में क्या कहा गया

अधिवक्ता सेंथिल कुमार एस. के माध्यम से जारी इस नोटिस में दीपक को 15 दिन के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है। राजेश ने नोटिस में दीपक के सभी आरोपों को 'पूरी तरह झूठा, दुर्भावनापूर्ण और निराधार' बताया है।

नोटिस के अनुसार, दीपक ने बिना किसी पुख्ता सबूत के आरोप लगाए और राजेश पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के साथ मिलकर निगम की कार्यवाही में हेरफेर करने का आरोप भी मढ़ा। राजेश ने इन आरोपों को अपनी प्रतिष्ठा और मेयर पद की गरिमा पर सीधा हमला बताया है।

प्रतिष्ठा को नुकसान का दावा

राजेश ने कहा कि दीपक के बयान समाचार चैनलों और सोशल मीडिया के माध्यम से व्यापक रूप से प्रसारित हुए, जिससे उनकी सार्वजनिक छवि को गंभीर क्षति पहुँची। उन्होंने दावा किया कि उनका राजनीतिक रिकॉर्ड हमेशा बेदाग रहा है और इन आरोपों के कारण उन्हें अपमान, मानसिक पीड़ा और प्रतिष्ठा की हानि झेलनी पड़ी है।

नोटिस में यह भी कहा गया है कि दीपक के बयान राजेश के नेतृत्व में चल रही निगम की विकास गतिविधियों को बाधित करने के उद्देश्य से दिए गए थे और इनसे निगम के अधिकारियों व कर्मचारियों के मनोबल पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

आगे की कानूनी कार्रवाई

नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि यदि दीपक तय समयसीमा में संतोषजनक कदम नहीं उठाते, तो राजेश उनके विरुद्ध दीवानी और आपराधिक दोनों प्रकार की कानूनी कार्यवाही शुरू करेंगे। यह मामला तिरुवनंतपुरम नगर निगम में सत्ताधारी एलडीएफ और विपक्षी खेमे के बीच गहरे होते राजनीतिक टकराव का संकेत देता है। आने वाले दिनों में इस विवाद के कानूनी और राजनीतिक — दोनों मोर्चों पर नए मोड़ आने की संभावना है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तिरुवनंतपुरम मेयर वीवी राजेश ने मानहानि नोटिस क्यों भेजा?
मेयर वीवी राजेश ने सीपीआई(एम) नेता एसपी दीपक द्वारा 4 अक्टूबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए उन आरोपों के कारण ₹5 करोड़ का मानहानि नोटिस भेजा, जिनमें दावा किया गया था कि मेयर कार्यालय में राजेश की जानकारी से जालसाजी हुई। राजेश ने इन आरोपों को झूठा और दुर्भावनापूर्ण बताया है।
इस मामले में जालसाजी का आरोप क्या है?
आरोप है कि नगर निगम पार्षद आर. सुगथन 26 फरवरी, 11 मार्च और 27 अप्रैल को हुई परिषद बैठकों में अनुपस्थित थे, लेकिन उनकी उपस्थिति जाली हस्ताक्षर के ज़रिए रजिस्टर में दर्ज की गई। दीपक ने RTI के तहत प्राप्त रजिस्टर की प्रति के आधार पर यह दावा किया था।
एसपी दीपक को नोटिस का जवाब कब तक देना है?
नोटिस में दीपक को 15 दिन के भीतर आवश्यक कार्रवाई करने का समय दिया गया है। यदि वे निर्धारित समयसीमा में जवाब नहीं देते, तो मेयर राजेश उनके विरुद्ध दीवानी और आपराधिक दोनों प्रकार की कार्यवाही शुरू कर सकते हैं।
दीपक ने राजेश पर क्या-क्या आरोप लगाए थे?
दीपक ने आरोप लगाया था कि जालसाजी मेयर कार्यालय में राजेश की जानकारी और मिलीभगत से हुई। उन्होंने यह भी कहा था कि राजेश BJP और RSS के साथ मिलकर निगम की कार्यवाही में हेरफेर कर रहे हैं और अनियमितताएँ कर रहे हैं।
इस विवाद का तिरुवनंतपुरम नगर निगम पर क्या असर हो सकता है?
नोटिस में कहा गया है कि दीपक के बयानों से निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल प्रभावित हो सकता है और विकास कार्यों में बाधा आ सकती है। यह विवाद एलडीएफ के भीतर आंतरिक राजनीतिक तनाव को भी उजागर करता है, जो आगे चलकर निगम की कार्यप्रणाली पर असर डाल सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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