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तिरुवनंतपुरम निगम फर्जी हस्ताक्षर विवाद: BJP मेयर राजेश ने CPM पार्षद दीपक पर लगाया जालसाजी का आरोप

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तिरुवनंतपुरम निगम फर्जी हस्ताक्षर विवाद: BJP मेयर राजेश ने CPM पार्षद दीपक पर लगाया जालसाजी का आरोप

सारांश

तिरुवनंतपुरम नगर निगम में फर्जी हस्ताक्षरों का आरोप अब दोनों ओर से उठ रहा है — पहले CPM पार्षद दीपक ने मेयर पर आरोप लगाए, अब मेयर राजेश ने दीपक पर जवाबी शिकायत का ऐलान किया। दिसंबर 2025 में BJP के ऐतिहासिक सत्ता-परिवर्तन के बाद से यह सबसे तीखा टकराव है।

मुख्य बातें

भाजपा के मेयर वी.वी.
राजेश ने सीपीआई(एम) पार्षद एस.पी.
दीपक पर काउंसिल विशेष बैठक के पत्र में हस्ताक्षर हेरफेर का आरोप लगाया और म्यूजियम पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की घोषणा की।
विवाद की शुरुआत दीपक की उस शिकायत से हुई थी जिसमें 26 फरवरी , 11 मार्च और 27 अप्रैल की बैठकों में पार्षद आर.
सुगाथन की उपस्थिति के लिए जाली हस्ताक्षर का आरोप लगाया गया था।
म्यूजियम पुलिस ने पहले ही राजेश को पहला, सुगाथन को दूसरा और कॉर्पोरेशन सचिव को तीसरा आरोपी बनाकर मामला दर्ज किया है।
मेयर ने दावा किया कि कॉर्पोरेशन के आधिकारिक फोटोग्राफर की डिजिटल तस्वीरें पुलिस को सौंप दी गई हैं, जिनमें सुगाथन तीनों बैठकों में मौजूद दिख रहे हैं।
दिसंबर 2025 में भाजपा ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम में चार दशकों के सीपीआई(एम) शासन को समाप्त कर पहली बार सत्ता हासिल की थी।
अब म्यूजियम पुलिस दोनों पक्षों के जालसाजी के दावों की समानांतर जाँच करेगी।

तिरुवनंतपुरम नगर निगम में कथित फर्जी हस्ताक्षरों का विवाद 9 अक्टूबर 2026 को नए मोड़ पर पहुँच गया, जब भाजपा (BJP) के मेयर वी.वी. राजेश ने भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [CPI(M)] के पार्षद एस.पी. दीपक पर काउंसिल बैठक बुलाने से जुड़े पत्र में हस्ताक्षरों में हेरफेर का आरोप लगाया और म्यूजियम पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की घोषणा की। यह आरोप-प्रत्यारोप की लड़ाई उस नगर निगम में और तीखी हो गई है जिसमें दिसंबर 2025 में भाजपा ने पहली बार सत्ता हासिल करके सीपीआई(एम) के चार दशक से अधिक पुराने वर्चस्व को समाप्त किया था।

विवाद की शुरुआत कैसे हुई

इस पूरे प्रकरण की शुरुआत सीपीआई(एम) पार्षद एस.पी. दीपक की शिकायत से हुई थी। दीपक ने आरोप लगाया था कि 26 फरवरी, 11 मार्च और 27 अप्रैल को हुई काउंसिल की बैठकों में पार्षद आर. सुगाथन की उपस्थिति दर्ज कराने के लिए जाली हस्ताक्षर किए गए। उनके अनुसार, उस दौरान सुगाथन केरल एंटी-सोशल एक्टिविटीज (प्रिवेंशन) एक्ट (KAAPA) के तहत मामला दर्ज होने के बाद फरार थे।

इस शिकायत के आधार पर म्यूजियम पुलिस ने मामला दर्ज किया, जिसमें वी.वी. राजेश को पहला, आर. सुगाथन को दूसरा और कॉर्पोरेशन सचिव को तीसरा आरोपी बनाया गया।

मेयर राजेश का पलटवार

मेयर राजेश ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया। उन्होंने दावा किया कि सुगाथन तीनों बैठकों में भौतिक रूप से उपस्थित थे और कॉर्पोरेशन के आधिकारिक फोटोग्राफर ने उनकी तस्वीरें खींची थीं। राजेश के अनुसार, तारीख और समय की जानकारी युक्त डिजिटल तस्वीरें पुलिस को सौंप दी गई हैं।

इससे भी आगे, राजेश ने यह भी बताया कि पार्षद दीपक ने स्वयं 27 अप्रैल की बैठक में सुगाथन की मौजूदगी दिखाने वाले लाइव वीडियो और तस्वीरें अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा की थीं। मेयर ने कहा कि दीपक ने अपने ही सोशल मीडिया पोस्ट की जाँच किए बिना पुलिस से शिकायत की, जो उनके दावों को कमज़ोर करती है।

नया मोर्चा: विशेष बैठक वाले पत्र पर विवाद

अब मेयर राजेश ने आरोप लगाया है कि एलडीएफ (LDF) पार्षदों की ओर से कॉर्पोरेशन काउंसिल की विशेष बैठक बुलाने के लिए सौंपे गए पत्र में एस.पी. दीपक ने हस्ताक्षरों में हेरफेर की है। राजेश ने कहा कि पत्र में हस्ताक्षरों में स्पष्ट गड़बड़ियाँ मौजूद हैं और उन्होंने म्यूजियम पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की घोषणा की है।

गौरतलब है कि इससे मामला अब दोहरे स्तर पर पुलिस जाँच का विषय बन चुका है — एक ओर दीपक की शिकायत पर दर्ज मामला, और दूसरी ओर राजेश की आगामी शिकायत।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह टकराव ऐसे समय में और भी तीखा हो गया है जब दिसंबर 2025 में भाजपा ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम में पहली बार सत्ता हासिल करके सीपीआई(एम) के चार दशकों से अधिक के प्रभुत्व को समाप्त किया था। यह अब तक की सबसे बड़ी शहरी सत्ता-परिवर्तन में से एक थी और दोनों पार्टियों के बीच राजनीतिक तनाव को नई ऊँचाई पर ले गई।

कड़वी राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से पहले से ही बँटी हुई इस काउंसिल में हस्ताक्षर विवाद ने प्रशासनिक कामकाज को और जटिल बना दिया है। आलोचकों का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच यह तकरार निगम के नागरिक विकास कार्यों को प्रभावित कर सकती है।

आगे की राह: पुलिस जाँच पर टिकी नज़रें

अब म्यूजियम पुलिस को दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र जाँच करनी होगी — पहले दर्ज मामले में राजेश और सुगाथन के खिलाफ आरोपों की, और राजेश की आगामी शिकायत में दीपक के खिलाफ आरोपों की। विशेषज्ञों के अनुसार, दस्तावेज़ी साक्ष्यों, डिजिटल तस्वीरों और फोरेंसिक हस्ताक्षर परीक्षण से ही यह स्पष्ट होगा कि किसके दावे तथ्यों पर खरे उतरते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो आरोपों की विश्वसनीयता गंभीर रूप से कमज़ोर पड़ती है। दूसरी ओर, मेयर की जवाबी शिकायत भी पुलिस जाँच का सामना करेगी और तब तक महज एक राजनीतिक कदम ही कही जाएगी। असली परीक्षा फोरेंसिक साक्ष्यों की होगी — और जो पक्ष उनमें खरा उतरेगा, उसे न सिर्फ कानूनी, बल्कि राजनीतिक जीत भी हासिल होगी।
RashtraPress
9 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तिरुवनंतपुरम नगर निगम में फर्जी हस्ताक्षर विवाद क्या है?
तिरुवनंतपुरम नगर निगम में सीपीआई(एम) पार्षद एस.पी. दीपक ने आरोप लगाया था कि भाजपा मेयर वी.वी. राजेश और पार्षद आर. सुगाथन ने काउंसिल की तीन बैठकों — 26 फरवरी, 11 मार्च और 27 अप्रैल — में सुगाथन की उपस्थिति दर्ज कराने के लिए जाली हस्ताक्षर किए। इस शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज किया, जिसके बाद मेयर ने जवाबी आरोप लगाते हुए दीपक पर ही जालसाजी का इल्जाम लगाया है।
मेयर वी.वी. राजेश ने दीपक पर क्या आरोप लगाए हैं?
मेयर राजेश ने आरोप लगाया है कि एस.पी. दीपक ने एलडीएफ पार्षदों की ओर से काउंसिल की विशेष बैठक बुलाने के लिए सौंपे गए पत्र में हस्ताक्षरों में हेरफेर की है। राजेश ने कहा कि पत्र में हस्ताक्षरों में स्पष्ट गड़बड़ियाँ हैं और उन्होंने म्यूजियम पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की घोषणा की है।
मेयर राजेश ने अपनी बेगुनाही के लिए क्या सबूत पेश किए हैं?
मेयर राजेश ने दावा किया है कि कॉर्पोरेशन के आधिकारिक फोटोग्राफर ने सुगाथन की तीनों बैठकों में तस्वीरें खींची थीं और तारीख-समय युक्त डिजिटल तस्वीरें पुलिस को सौंप दी गई हैं। इसके अलावा उन्होंने बताया कि दीपक ने खुद 27 अप्रैल की बैठक में सुगाथन को दिखाते हुए सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो और तस्वीरें साझा की थीं।
भाजपा ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम में सत्ता कब और कैसे हासिल की?
दिसंबर 2025 में हुए नगर निगम चुनावों में भाजपा ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम में पहली बार सत्ता हासिल की, जिससे सीपीआई(एम) का चार दशकों से अधिक पुराना शासन समाप्त हुआ। यह केरल में भाजपा की शहरी राजनीति में एक ऐतिहासिक सफलता मानी जाती है।
इस विवाद में आगे क्या होगा?
म्यूजियम पुलिस को अब दोनों पक्षों के दावों की समानांतर जाँच करनी होगी — पहले दर्ज मामले में मेयर और सुगाथन के खिलाफ आरोपों की, और मेयर राजेश की आगामी शिकायत में पार्षद दीपक के खिलाफ आरोपों की। फोरेंसिक हस्ताक्षर परीक्षण और डिजिटल साक्ष्यों की जाँच से मामले की दिशा तय होगी।
राष्ट्र प्रेस
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