केरल की पूर्व डीजीपी आर. श्रीलेखा ने तिरुवनंतपुरम में भाजपा पार्षद पद छोड़ा, पार्टी में हलचल
सारांश
मुख्य बातें
केरल की पहली महिला पुलिस महानिदेशक (DGP) रहीं आर. श्रीलेखा ने 30 सितंबर 2026 को तिरुवनंतपुरम नगर निगम के शास्तमंगलम वार्ड से भारतीय जनता पार्टी (BJP) पार्षद पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने यह इस्तीफा मेयर वी.वी. राजेश को सौंपा और अपने वार्डवासियों को भेजे संदेश में इसकी जानकारी दी। इस्तीफे के लिए उन्होंने केवल व्यक्तिगत कारणों का हवाला दिया है।
इस्तीफे की परिस्थितियाँ
श्रीलेखा ने अपना इस्तीफा पत्र मेयर वी.वी. राजेश को सौंपा और कहा कि इसकी एक प्रति तिरुवनंतपुरम के जिला कलेक्टर को भी दी जाएगी। हालाँकि, नगर निगम के सचिव ने स्पष्ट किया कि उन्हें अभी तक इस्तीफा पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। नियमों के अनुसार, पार्षद का इस्तीफा नगर निगम सचिव को सौंपा जाना अनिवार्य है।
नगर निगम की डिप्टी मेयर आशा जी. नाथ ने कहा कि उन्हें श्रीलेखा के इस्तीफे की जानकारी मीडिया के माध्यम से मिली — यह तथ्य पार्टी के भीतर संवाद की कमी को उजागर करता है। इस्तीफा सचिव तक न पहुँचने के कारण अब यह संभावना भी जताई जा रही है कि श्रीलेखा को इसे वापस लेने के लिए मनाया जा सकता है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और मतभेद
श्रीलेखा ने दिसंबर 2025 में शास्तमंगलम वार्ड से आरामदायक बहुमत के साथ नगर निगम चुनाव जीता था। पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद भाजपा के हाई-प्रोफाइल उम्मीदवार के रूप में उनकी उम्मीदवारी को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना गया था, क्योंकि कथित तौर पर यह चर्चा थी कि निगम में भाजपा सत्ता में आने पर उन्हें मेयर बनाया जा सकता है।
गौरतलब है कि 101 सदस्यीय तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। निर्दलीय पार्षद पी. राधाकृष्णन के समर्थन से भाजपा ने निगम प्रशासन बनाया। लेकिन मेयर पद के लिए श्रीलेखा की जगह पूर्णकालिक राजनेता वी.वी. राजेश को चुना गया। इस फैसले से श्रीलेखा के समर्थकों में निराशा व्याप्त हुई थी और पार्टी के भीतर भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बना था।
नगर निगम में प्रवेश के समय से ही श्रीलेखा और पार्टी नेतृत्व के कुछ वर्गों के बीच कथित मतभेदों की खबरें आती रही थीं। उनके इस्तीफे के बाद इन चर्चाओं ने एक बार फिर जोर पकड़ लिया है।
विधानसभा चुनाव में भी तीसरे स्थान पर रहीं
नगर निगम चुनाव में जीत के कुछ महीने बाद भाजपा ने श्रीलेखा को वट्टियोरकावु विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया था। इस चुनाव में वह तीसरे स्थान पर रहीं। यह ऐसे समय में आया है जब उनका राजनीतिक करियर अभी एक वर्ष भी पूरा नहीं कर पाया था।
भाजपा पर राजनीतिक असर
श्रीलेखा के इस्तीफे के बाद भाजपा के पार्षदों की संख्या 50 से घटकर 49 रह जाएगी। 101 सदस्यीय निगम में निर्दलीय पार्षदों का समर्थन पार्टी के प्रशासन के लिए और भी अहम हो जाएगा। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर फिलहाल राजधानी से बाहर हैं, और राज्य नेतृत्व श्रीलेखा को इस्तीफा वापस लेने के लिए मनाने की कोशिश में जुटा है।
शास्तमंगलम वार्ड में संभावित उपचुनाव इस इस्तीफे को राजनीतिक रूप से और अधिक महत्वपूर्ण बना देता है। आने वाले हफ्तों में यह स्पष्ट होगा कि क्या श्रीलेखा अपना फैसला बदलती हैं या भाजपा को नई रणनीति अपनानी होगी।