पी.के. श्रीमती के खिलाफ फर्जी पेंशन अभियान: केरल सीएम सतीशन ने दिए सख्त कानूनी कार्रवाई के आदेश
सारांश
मुख्य बातें
केरल के मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने 24 जुलाई 2026 को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) [सीपीआई(एम)] की केंद्रीय समिति की सदस्य और पूर्व स्वास्थ्य मंत्री पी.के. श्रीमती के खिलाफ सोशल मीडिया पर चलाए गए कथित फर्जी प्रचार अभियान पर तत्काल और कड़ी कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। श्रीमती ने मुख्यमंत्री को औपचारिक शिकायत सौंपकर आरोप लगाया था कि झूठी खबरें फैलाकर उनकी छवि को जानबूझकर नुकसान पहुँचाया जा रहा है।
फर्जी अभियान की जड़: आरटीआई दस्तावेज़ की गलत व्याख्या
यह पूरा विवाद पूर्व विधायकों को मिलने वाली पेंशन से संबंधित एक आरटीआई (सूचना का अधिकार) के जवाब के बाद शुरू हुआ। उस दस्तावेज़ में दो अलग-अलग प्रविष्टियाँ थीं — एक ओर 'पी.के. श्रीमती, पत्नी पी.आर. कृष्णन' को मिलने वाली पारिवारिक पेंशन का उल्लेख था, जबकि दूसरी ओर कन्नूर की पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री पी.के. श्रीमती की पेंशन संबंधी अलग जानकारी दर्ज थी।
आरोप है कि इन दोनों भिन्न प्रविष्टियों को एक साथ जोड़कर यह झूठा दावा फैलाया गया कि सीपीआई(एम) नेता ने विधायक परिवार पेंशन धोखाधड़ी से हासिल की है। इसके बाद सोशल मीडिया और कुछ ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर यह भ्रामक अभियान तेज़ी से फैल गया।
जाँच में सामने आई सच्चाई: नाम की समानता बनी भ्रम की वजह
सरकारी हस्तक्षेप के बाद हुई जाँच में स्पष्ट हुआ कि जिस पेंशन का जिक्र किया जा रहा था, वह सीपीआई(एम) नेता पी.के. श्रीमती को नहीं, बल्कि स्वतंत्रता सेनानी और कांग्रेस नेता पी.आर. कृष्णन की दिवंगत पत्नी पी.के. श्रीमती को मिलती थी। पी.आर. कृष्णन पूर्व त्रावणकोर-कोचीन विधानसभा और बाद में कुन्नमकुलम विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे थे।
थ्रिसूर के पूचट्टी स्थित ए.के.एम. हायर सेकेंडरी स्कूल की सेवानिवृत्त शिक्षिका रहीं पी.के. श्रीमती को वर्ष 1993 में अपने पति के निधन के बाद यह पारिवारिक पेंशन मिलनी शुरू हुई थी। फरवरी 2020 में उनके निधन के बाद यह पेंशन बंद कर दी गई। उनके बेटे अजीत (प्रिंटेक्स अजीत) ने स्पष्ट किया कि पिछले छह वर्षों से किसी ने भी यह पेंशन प्राप्त नहीं की है।
सरकार की प्रतिक्रिया: गृह मंत्री को सौंपा मामला
मुख्यमंत्री सतीशन ने शिकायत मिलते ही इसे राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला को अग्रेषित करते हुए तत्काल और उचित कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। यह मामला अब केवल एक नेता की प्रतिष्ठा से जुड़ा विवाद नहीं रहा — इसे केरल सरकार की फेक न्यूज़ के विरुद्ध कार्रवाई की गंभीरता की परीक्षा के रूप में भी देखा जा रहा है।
पी.के. श्रीमती का रुख: माफी नहीं, मानहानि का मुकदमा
पी.के. श्रीमती गुरुवार को मीडिया से बात करते हुए भावुक हो गईं और कहा कि बिना किसी गलती के उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। शुक्रवार को उन्होंने स्पष्ट किया कि झूठे आरोप फैलाने वालों को वे कभी माफ नहीं करेंगी और उनके खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर करेंगी।
उन्होंने कहा, 'फर्जी खबर चलाने वाले कई लोगों ने मुझे फोन किया। कुछ ने तो मेरे पैरों पर गिरकर माफी माँगने की बात भी कही।' श्रीमती ने यह भी बताया कि कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई नेताओं ने उनसे संपर्क कर इस मामले में अपना समर्थन जताया है।
आगे क्या होगा
मुख्यमंत्री के निर्देश और संभावित मानहानि मुकदमे के बाद यह मामला केरल में सोशल मीडिया पर फर्जी खबरों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की एक मिसाल बन सकता है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भ्रामक सूचनाओं के प्रसार को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं। अजीत ने कहा कि उनके पिता का नाम बेवजह विवाद में घसीटा गया और संभव है कि जानबूझकर जनता को गुमराह करने की कोशिश की गई।