माकपा केंद्रीय समिति की चुनाव समीक्षा: पश्चिम बंगाल में भाजपा की सत्ता और हिंदुत्व विस्तार पर गहरी चिंता
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) — माकपा — की केंद्रीय समिति ने 22 से 24 मई 2026 के बीच नई दिल्ली में आयोजित बैठक में हालिया विधानसभा चुनाव परिणामों की प्रारंभिक समीक्षा की। पार्टी ने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सत्ता में वापसी और देश में हिंदुत्व सांप्रदायिक ताकतों के बढ़ते प्रभाव को 'गंभीर चिंता का विषय' करार दिया।
समीक्षा की प्रक्रिया और राज्यवार कार्यक्रम
बैठक के बाद जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, केरल में मिले चुनावी झटके के कारणों को समझने के लिए राज्य समिति विभिन्न स्तरों से राय एकत्र कर रही है। इन सुझावों पर 5 से 8 जून 2026 के बीच तिरुवनंतपुरम में होने वाली राज्य सचिवालय और राज्य समिति की संयुक्त बैठकों में विस्तार से विचार-विमर्श होगा, जिसमें पोलित ब्यूरो के सदस्य भी भाग लेंगे।
पश्चिम बंगाल में सभी इकाइयों से राय लेने के बाद जून 2026 के अंत तक राज्य समिति अपनी समीक्षा रिपोर्ट को अंतिम रूप देगी। तमिलनाडु और असम में भी इसी प्रक्रिया के तहत समीक्षा की जाएगी।
सकारात्मक पहलू: बंगाल में वापसी और माहे की जीत
माकपा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में पार्टी की आंशिक वापसी को सकारात्मक संकेत बताया। इसके अतिरिक्त, पुडुचेरी के माहे निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी-समर्थित एक उम्मीदवार ने निर्दलीय के रूप में जीत दर्ज की। केंद्रीय समिति ने उन सभी राज्यों के मतदाताओं का आभार व्यक्त किया जिन्होंने पार्टी और उसके सहयोगियों को समर्थन दिया।
हिंदुत्व विस्तार पर माकपा की चेतावनी
केंद्रीय समिति ने स्पष्ट किया कि इन चुनावों की व्यापक प्रवृत्ति समाज में हिंदुत्व सांप्रदायिक ताकतों का सुदृढ़ होना है। पार्टी के अनुसार, पश्चिम बंगाल में RSS-BJP की सत्ता और असम में उनकी वापसी 'सभी धर्मनिरपेक्ष, प्रगतिशील और लोकतांत्रिक ताकतों के लिए चिंताजनक' है।
पार्टी ने यह भी कहा कि भले ही BJP को केरल और तमिलनाडु में सीमित सीटें मिली हों, लेकिन उसका संगठनात्मक विस्तार चिंता का विषय बना हुआ है। माकपा ने आश्वासन दिया कि वह सांप्रदायिक सौहार्द और जनता के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी।
तमिलनाडु सरकार से अपेक्षाएँ
माकपा ने तमिलनाडु में नवगठित TVK सरकार — जिसका नेतृत्व विजय कर रहे हैं — से अपेक्षा जताई कि वह संविधान, संघीय ढाँचे, धर्मनिरपेक्षता और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के अपने चुनावी वादों के अनुरूप शासन करे।
आगे की राह: जुलाई में व्यापक विश्लेषण
माकपा की केंद्रीय समिति जुलाई 2026 के दूसरे पखवाड़े में पुनः बैठक करेगी। इस बैठक में राज्यों की समीक्षा रिपोर्टों के आधार पर चुनाव परिणामों का व्यापक विश्लेषण किया जाएगा और शीर्ष से लेकर ज़मीनी स्तर तक संगठनात्मक कमज़ोरियों को दूर करने के लिए ठोस कदम तय किए जाएंगे। पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह 'सत्तावादी तथा हिंदुत्व-कॉरपोरेट हमलों' का विरोध करने में अग्रिम पंक्ति में बनी रहेगी और निर्वाचित जनप्रतिनिधि जनता के मुद्दों को सदनों में उठाते रहेंगे।