कच्चे तेल का दाम 2027 तक $80 प्रति बैरल तक गिरने का अनुमान: गोल्डमैन सैश रिपोर्ट
सारांश
मुख्य बातें
गोल्डमैन सैश की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें 2027 में औसतन $80 प्रति बैरल तक आ सकती हैं — मध्य पूर्व से आपूर्ति की क्रमिक बहाली और वैश्विक बाज़ार के अधिशेष की स्थिति में लौटने की संभावना के चलते। हालाँकि, निकट अवधि में अमेरिका-इज़रायल-ईरान संघर्ष से जुड़े जोखिमों के कारण दिसंबर 2026 तक ब्रेंट क्रूड के $90 प्रति बैरल बने रहने का अनुमान है।
निकट अवधि में कीमतों पर दबाव
रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी कच्चे तेल की कीमतों में लगभग $25 प्रति बैरल का 'रिस्क प्रीमियम' शामिल है। यह प्रीमियम इसलिए है क्योंकि संघर्ष के बढ़ने पर आपूर्ति श्रृंखला में रुकावट आ सकती है और मौजूदा भंडार पर दबाव बढ़ सकता है। इस सप्ताहांत ब्रेंट क्रूड की कीमत $110 प्रति बैरल तक पहुँच गई — मई के बाद पहली बार — क्योंकि निकट भविष्य में आपूर्ति सुधार की उम्मीदें कमज़ोर पड़ गईं और व्यापारियों ने सप्ताहांत से पहले तेज़ी के दाँव लगाए। फिज़िकल ब्रेंट क्रूड की निकट-अवधि डिलीवरी के लिए कीमतें $130 प्रति बैरल से ऊपर निकल चुकी हैं, जबकि बेंचमार्क ब्रेंट फ्यूचर्स हाल ही में $100 प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहे थे।
आपूर्ति में सुधार के संकेत
गोल्डमैन सैश के अनुसार, निर्यातकों ने संघर्ष के माहौल में खुद को ढाला है और परिवहन क्षमता बढ़ाई है। सितंबर के अंत तक फारस की खाड़ी से तेल का निर्यात वापस 2025 के औसत स्तर के करीब पहुँच गया। मध्य पूर्व से निर्यात में सुधार, फारस की खाड़ी के बाहर उत्पादन में वृद्धि और वैश्विक माँग में कमी के कारण आपूर्ति की कुल कमी काफी सिकुड़ गई है। सितंबर में बाज़ार लगभग संतुलित स्थिति में था — माँग, आपूर्ति से केवल 0.3 मिलियन बैरल प्रति दिन अधिक थी, जबकि मार्च में यह अंतर 7.2 मिलियन बैरल प्रति दिन था।
2026-27 में अधिशेष की ओर बाज़ार
रिपोर्ट के अनुमान के मुताबिक, 2026 की चौथी तिमाही में वैश्विक तेल बाज़ार अधिशेष की स्थिति में आ जाएगा और 2027 में भी यही परिदृश्य बना रहेगा। यही कारण है कि निवेश बैंक ने दिसंबर 2026 के लिए अपना ब्रेंट अनुमान पहले के $85 से बढ़ाकर $90 प्रति बैरल किया है, लेकिन 2027 के लिए औसत $80 प्रति बैरल रहने की उम्मीद जताई है। यह ऐसे समय में आया है जब अमेरिका-इज़रायल-ईरान तनाव के दोबारा तेज़ होने की स्थिति में कीमतें दीर्घकाल तक ऊँची बनी रह सकती हैं।
माँग पक्ष: चीन और एशिया में कमज़ोरी
चीन, मध्य पूर्व और विकसित एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में वैश्विक तेल की खपत कमज़ोर बनी हुई है। रिपोर्ट में अनुमान है कि जैसे-जैसे परिष्कृत तेल उत्पादों की उपलब्धता बढ़ेगी और वे किफायती होंगे, माँग में धीरे-धीरे सुधार आएगा। गौरतलब है कि वैश्विक माँग में यह सुस्ती कीमतों पर दबाव का एक प्रमुख संरचनात्मक कारण है।
भारत पर संभावित असर
भारत अपनी कुल तेल ज़रूरत का 85% से अधिक आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का सीधा असर आयात बिल, चालू खाते के घाटे और घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है। यदि 2027 में कीमतें $80 के करीब आती हैं, तो भारतीय रुपये पर दबाव कम हो सकता है और महँगाई नियंत्रण में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को राहत मिल सकती है। हालाँकि, निकट अवधि में $100-$110 के स्तर बने रहने से आर्थिक दबाव जारी रहने की संभावना है।