12 अक्टूबर 2026
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गोल्डमैन सैश ने ब्रेंट क्रूड अनुमान बढ़ाकर $90 प्रति बैरल किया, पश्चिम एशिया तनाव बड़ी वजह

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गोल्डमैन सैश ने ब्रेंट क्रूड अनुमान बढ़ाकर $90 प्रति बैरल किया, पश्चिम एशिया तनाव बड़ी वजह

सारांश

गोल्डमैन सैश ने पश्चिम एशिया तनाव और होर्मुज़ शिपिंग बाधाओं के मद्देनज़र ब्रेंट क्रूड का दिसंबर 2026 अनुमान 6% बढ़ाकर $90 प्रति बैरल किया। चरम परिदृश्य में 2027 में $125 तक पहुँचने की चेतावनी, जबकि 2027 का बेस अनुमान $80 पर बरकरार।

मुख्य बातें

गोल्डमैन सैश ने ब्रेंट क्रूड का दिसंबर 2026 औसत अनुमान 85 डॉलर से बढ़ाकर 90 डॉलर प्रति बैरल किया — पिछले अनुमान से 6% अधिक।
मौजूदा बाज़ार कीमत लगभग 103 डॉलर प्रति बैरल है; संशोधित अनुमान इससे 13% कम।
2027 के लिए 80 डॉलर प्रति बैरल का ब्रेंट अनुमान अपरिवर्तित रखा गया।
होर्मुज़ स्ट्रेट पर शिपिंग बाधाओं के कारण कीमत 70 डॉलर से बढ़कर 125 डॉलर से ऊपर गई थी।
चरम परिदृश्य: खाड़ी उत्पादन 50 लाख बैरल प्रति दिन कम रहा तो 2027 में ब्रेंट 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकता है।
WTI का अनुमान दिसंबर 2026 में 81 डॉलर और 2027 में 73 डॉलर प्रति बैरल ।

गोल्डमैन सैश ने 12 अक्टूबर 2026 को जारी अपनी रिपोर्ट में ब्रेंट क्रूड के लिए दिसंबर 2026 तक का औसत मूल्य अनुमान 85 डॉलर प्रति बैरल से बढ़ाकर 90 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है — यानी पिछले अनुमान से 6 प्रतिशत की वृद्धि। पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव और होर्मुज़ स्ट्रेट पर शिपिंग बाधाओं के कारण कच्चे तेल की कीमतें उच्च स्तर पर बनी हुई हैं, जो इस संशोधन की मुख्य वजह बताई गई है।

मुख्य संशोधन: क्या बदला और क्यों

गोल्डमैन सैश की रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2026 के अनुमान में यह बढ़ोतरी मुख्यतः आपूर्ति से जुड़े जोखिमों के कारण टाइम स्प्रेड रिस्क प्रीमियम में धीमी कमी के चलते हुई है, जिसे वर्तमान में 20 डॉलर से थोड़ा अधिक आंका गया है। हालाँकि, यह संशोधित अनुमान 103 डॉलर प्रति बैरल की मौजूदा बाज़ार कीमत से लगभग 13 प्रतिशत कम है।

उल्लेखनीय है कि 2027 के लिए 80 डॉलर प्रति बैरल का औसत ब्रेंट अनुमान अपरिवर्तित रखा गया है। फर्म ने इस अनुमान में आपूर्ति जोखिमों, कम इन्वेंट्री स्तर और ब्याज दरों के तेल कीमतों पर पड़ने वाले प्रभाव को शामिल किया है, जो फिजिकल रीस्टॉकिंग और फाइनेंशियल हेजिंग दोनों को समर्थन देते हैं।

पश्चिम एशिया संघर्ष और कीमतों पर असर

फरवरी 2026 के अंत में पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ने के समय ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल थी। इसके बाद होर्मुज़ स्ट्रेट — जो वैश्विक तेल शिपमेंट का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है — पर शिपिंग बाधाएँ उत्पन्न होने के कारण कीमत 125 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा पहुँची।

तेल बुनियादी ढाँचे को नुकसान, शिपिंग मार्गों पर बढ़ते हमले और लगातार बना रहने वाला जोखिम प्रीमियम — ये तीन प्रमुख कारक हैं जो रिपोर्ट के अनुसार कीमतों को और ऊँचा धकेल सकते हैं।

WTI और चरम परिदृश्य

रिपोर्ट में वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) के लिए दिसंबर 2026 में 81 डॉलर प्रति बैरल और 2027 में 73 डॉलर प्रति बैरल का अनुमान लगाया गया है। ब्रेंट और WTI के बीच यह असामान्य रूप से बड़ा अंतर अमेरिका से यूरोप तक की शिपिंग लागत में वृद्धि के कारण बताया गया है।

चरम जोखिम परिदृश्य की बात करें तो रिपोर्ट का अनुमान है कि यदि 2027 में खाड़ी देशों का औसत उत्पादन फरवरी 2026 के स्तर से 50 लाख बैरल प्रति दिन कम रहता है, तो 2027 में ब्रेंट की औसत कीमत लगभग 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती है।

गोल्डमैन सैश का बयान

गोल्डमैन सैश ने अपनी रिपोर्ट में कहा, '2027 के लिए हमारा ब्रेंट क्रूड का औसत अनुमान 80 डॉलर प्रति बैरल बना हुआ है। यह अनुमान गल्फ देशों से आपूर्ति में उम्मीद से अधिक तेजी से हुए बदलावों से कीमतों पर पड़ने वाले दबाव और रिस्क प्रीमियम में धीमी कमी के बीच संतुलन बनाता है।'

भारत पर संभावित प्रभाव

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक आयात के ज़रिये पूरा करता है। ब्रेंट क्रूड के 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँचने की स्थिति में देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ेगा, जिसका असर पेट्रोल-डीज़ल की खुदरा कीमतों, मुद्रास्फीति और चालू खाते के घाटे पर पड़ सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) मुद्रास्फीति नियंत्रण और विकास के बीच संतुलन साधने में जुटा है। आने वाले हफ्तों में होर्मुज़ स्ट्रेट पर स्थिति और खाड़ी देशों के उत्पादन निर्णय वैश्विक तेल बाज़ार की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन 125 डॉलर के चरम परिदृश्य की चेतावनी यह बताती है कि सबसे बड़े जोखिम अभी सामने आने बाकी हैं। भारत जैसे तेल-आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए यह विशेष रूप से चिंताजनक है — हर बड़ी कीमत वृद्धि सीधे मुद्रास्फीति, चालू खाते के घाटे और आम आदमी की जेब पर असर डालती है। मुख्यधारा की कवरेज मूल्य अनुमान पर केंद्रित रहती है, जबकि असली प्रश्न यह है कि होर्मुज़ स्ट्रेट की नाजुकता के बावजूद भारत की ऊर्जा विविधीकरण रणनीति कितनी तैयार है।
RashtraPress
12 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोल्डमैन सैश ने ब्रेंट क्रूड का नया अनुमान क्या रखा है?
गोल्डमैन सैश ने दिसंबर 2026 के लिए ब्रेंट क्रूड का औसत अनुमान 85 डॉलर से बढ़ाकर 90 डॉलर प्रति बैरल कर दिया है — यह पिछले अनुमान से 6 प्रतिशत अधिक है। 2027 के लिए 80 डॉलर प्रति बैरल का अनुमान अपरिवर्तित रखा गया है।
ब्रेंट क्रूड की कीमतें इतनी क्यों बढ़ी हैं?
फरवरी 2026 के अंत में पश्चिम एशिया में युद्ध छिड़ने और होर्मुज़ स्ट्रेट पर शिपिंग बाधाओं के कारण ब्रेंट की कीमत 70 डॉलर से बढ़कर 125 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गई। होर्मुज़ स्ट्रेट वैश्विक तेल शिपमेंट का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा संभालता है।
2027 में ब्रेंट क्रूड 125 डॉलर तक पहुँच सकता है — कैसे?
गोल्डमैन सैश के अनुसार, यदि 2027 में खाड़ी देशों का औसत उत्पादन फरवरी 2026 के स्तर से 50 लाख बैरल प्रति दिन कम रहता है, तो ब्रेंट की औसत कीमत लगभग 125 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती है। तेल बुनियादी ढाँचे को नुकसान और शिपिंग पर हमले इस चरम परिदृश्य के प्रमुख कारक हैं।
WTI और ब्रेंट के बीच इतना बड़ा अंतर क्यों है?
गोल्डमैन सैश की रिपोर्ट के अनुसार, WTI का दिसंबर 2026 अनुमान 81 डॉलर और 2027 अनुमान 73 डॉलर प्रति बैरल है, जबकि ब्रेंट क्रमशः 90 और 80 डॉलर पर है। यह असामान्य रूप से बड़ा अंतर अमेरिका से यूरोप तक शिपिंग की बढ़ी हुई लागत के कारण है।
भारत पर इस तेल मूल्य वृद्धि का क्या असर होगा?
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का 85 प्रतिशत से अधिक आयात से पूरा करता है, इसलिए ब्रेंट क्रूड के 90 डॉलर तक पहुँचने पर देश का आयात बिल बढ़ेगा। इसका प्रत्यक्ष असर पेट्रोल-डीज़ल की कीमतों, खुदरा मुद्रास्फीति और चालू खाते के घाटे पर पड़ सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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