24 अक्टूबर 2026
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क्यूबा-भारत व्यापार: राजदूत जुआन कार्लोस मार्सन ने जताई बायोटेक, फार्मा में सहयोग बढ़ाने की इच्छा

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क्यूबा-भारत व्यापार: राजदूत जुआन कार्लोस मार्सन ने जताई बायोटेक, फार्मा में सहयोग बढ़ाने की इच्छा

सारांश

भारत-क्यूबा के बीच राजनीतिक गर्मजोशी तो है, पर व्यापार अभी भी पिछड़ा हुआ है। राजदूत मार्सन का यह बयान — बायोटेक में 20 साल के सहयोग और 100% स्वामित्व की नई छूट के साथ — संकेत देता है कि हवाना अब भारतीय पूँजी को गंभीरता से लुभाना चाहता है।

मुख्य बातें

क्यूबा के राजदूत जुआन कार्लोस मार्सन ने 23 अक्टूबर 2026 को कहा कि भारत-क्यूबा आर्थिक संबंध अपनी वास्तविक क्षमता से काफी पीछे हैं।
भारतीय और क्यूबाई कंपनियों के बीच जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक समय से सहयोग जारी है।
भारतीय कंपनियों के लिए क्यूबा में 100% स्वामित्व वाली कंपनियाँ और निजी फार्मेसी स्थापित करने के नए अवसर उपलब्ध हैं।
क्यूबा 27-28 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिकी नाकाबंदी के खिलाफ 34वीं बार प्रस्ताव पेश करेगा।
क्यूबा ने 100 से अधिक देशों में 3 लाख से ज़्यादा डॉक्टर और स्वास्थ्य विशेषज्ञ भेजे हैं; 45,000 से ज़्यादा विदेशी छात्र क्यूबा में पढ़ चुके हैं।
भारत, क्यूबा में दवा निर्माण के लिए एपीआई और कच्चे माल के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है।

भारत में क्यूबा के राजदूत जुआन कार्लोस मार्सन ने 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में कहा कि दोनों देशों के बीच राजनीतिक संबंध अत्यंत प्रगाढ़ हैं, किंतु आर्थिक और व्यापारिक संबंध अभी भी अपनी वास्तविक क्षमता से काफी पीछे हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जैव प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने की अपार संभावनाएँ मौजूद हैं।

बायोटेक और फार्मा में दो दशक से ज़्यादा का सहयोग

मार्सन ने बताया कि भारतीय और क्यूबाई कंपनियों के बीच जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक समय से सहयोग जारी है। उन्होंने कहा कि क्यूबा, भारतीय कंपनियों को कैंसर, तंत्रिका संबंधी रोगों, मधुमेह और हेपेटाइटिस-बी जैसी बीमारियों के उपचार हेतु अभिनव जैव-प्रौद्योगिकी उत्पादों के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के नए अवसर प्रदान कर रहा है।

राजदूत ने रेखांकित किया कि यह सहयोग केवल क्यूबा के लिए नहीं, बल्कि भारत और वैश्विक बाज़ार दोनों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत, क्यूबा में दवा निर्माण के लिए आवश्यक सक्रिय औषधि सामग्री (एपीआई) और कच्चे माल के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में से एक है।

भारतीय निवेश के लिए नए द्वार खुले

मार्सन ने बताया कि अब भारतीय कंपनियों के लिए क्यूबा में 100 प्रतिशत स्वामित्व वाली कंपनियाँ स्थापित करने और निजी फार्मेसी खोलने की संभावनाएँ उपलब्ध हैं। उनके अनुसार, इससे निवेश और व्यापार के नए अवसर उत्पन्न होंगे और द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को नई गति मिलेगी।

भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की वार्ता पूरी होने के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि क्यूबा, भारत के साथ व्यापार और निवेश बढ़ाने के लिए किसी भी प्रकार के संवाद और संस्थागत ढाँचे पर चर्चा करने को पूरी तरह तैयार है।

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी नाकाबंदी के खिलाफ 34वाँ प्रस्ताव

राजदूत मार्सन ने बताया कि क्यूबा, 27 और 28 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिका द्वारा लगाए गए आर्थिक, वाणिज्यिक और वित्तीय प्रतिबंधों के खिलाफ 34वीं बार प्रस्ताव पेश करेगा। उन्होंने आशा जताई कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय का बड़ा हिस्सा इस बार भी क्यूबा का समर्थन करेगा।

मार्सन ने कहा कि यह प्रस्ताव अमेरिकी सरकार को स्पष्ट संदेश देगा कि क्यूबा के खिलाफ जारी यह नीति अन्यायपूर्ण है और इसे समाप्त किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिबंधों का सबसे अधिक दुष्प्रभाव आम क्यूबाई नागरिकों पर पड़ता है।

भारत की भूमिका और वैश्विक एकजुटता

राजदूत ने क्यूबाई प्रस्तावों पर भारत के सतत समर्थन की सराहना करते हुए कहा कि भारत ने अपने बयानों में स्पष्ट किया है कि क्यूबा को शांति और सम्मान के साथ रहने का अधिकार है और मतभेदों का समाधान संवाद एवं कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए।

उन्होंने यह भी बताया कि क्यूबा ने 100 से अधिक देशों में 3 लाख से ज़्यादा डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों को सेवा के लिए भेजा है। इसके अलावा 100 से अधिक देशों के 45,000 से ज़्यादा छात्र क्यूबा में शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं, और हवाना स्थित इंटरनेशनल स्कूल ऑफ मेडिसिन से 25,000 से अधिक छात्र स्नातक हो चुके हैं।

आगे की संभावनाएँ

मार्सन ने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों में महत्त्वपूर्ण प्रगति देखने को मिलेगी। यह ऐसे समय में आया है जब भारत वैश्विक स्तर पर अपने आर्थिक साझेदारों का दायरा बढ़ाने पर ज़ोर दे रहा है — और लैटिन अमेरिका इस रणनीति में तेज़ी से प्रासंगिक होता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वह असाधारण है। लेकिन असली सवाल यह है कि भारतीय कंपनियाँ क्यूबा में निवेश करने पर अमेरिकी द्वितीयक प्रतिबंधों के जोखिम से कैसे निपटेंगी — जो अब तक इस साझेदारी की सबसे बड़ी बाधा रही है। दोनों देशों के बीच 20 साल के बायोटेक सहयोग के बावजूद व्यापार का आँकड़ा मामूली बना हुआ है, जो बताता है कि इच्छाशक्ति तो है पर ढाँचागत अवरोध अभी भी गहरे हैं।
RashtraPress
24 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्यूबा के राजदूत जुआन कार्लोस मार्सन ने भारत के बारे में क्या कहा?
राजदूत मार्सन ने कहा कि भारत और क्यूबा के राजनीतिक संबंध मज़बूत हैं, लेकिन आर्थिक और व्यापारिक संबंध अभी भी अपनी वास्तविक क्षमता से पीछे हैं। उन्होंने जैव प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स और स्वास्थ्य सेवा में सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई।
भारतीय कंपनियाँ क्यूबा में कैसे निवेश कर सकती हैं?
क्यूबा ने अब भारतीय कंपनियों को 100 प्रतिशत स्वामित्व वाली कंपनियाँ स्थापित करने और निजी फार्मेसी खोलने की अनुमति दे दी है। इसके अलावा कैंसर, मधुमेह और हेपेटाइटिस-बी जैसी बीमारियों के इलाज के लिए प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के नए अवसर भी उपलब्ध हैं।
क्यूबा संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी नाकाबंदी के खिलाफ प्रस्ताव क्यों लाता है?
क्यूबा का तर्क है कि अमेरिकी आर्थिक, वाणिज्यिक और वित्तीय प्रतिबंधों का सबसे अधिक असर आम क्यूबाई नागरिकों पर पड़ता है और यह नीति अन्यायपूर्ण है। 27-28 अक्टूबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में यह 34वीं बार इस प्रस्ताव पर मतदान होगा।
भारत-क्यूबा बायोटेक सहयोग कितने समय से चल रहा है?
दोनों देशों की कंपनियों के बीच जैव प्रौद्योगिकी क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक समय से सहयोग जारी है। भारत, क्यूबा में दवा निर्माण के लिए सक्रिय औषधि सामग्री (एपीआई) और कच्चे माल के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में से एक है।
क्यूबा ने वैश्विक स्वास्थ्य सेवा में क्या योगदान दिया है?
क्यूबा ने 100 से अधिक देशों में 3 लाख से ज़्यादा डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों को सेवा के लिए भेजा है। इसके अलावा 100 से अधिक देशों के 45,000 से ज़्यादा छात्र क्यूबा में शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं और हवाना के इंटरनेशनल स्कूल ऑफ मेडिसिन से 25,000 से अधिक छात्र स्नातक हो चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस
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