27 अक्टूबर 2026
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चक्रवात 'अर्नब' का पश्चिम बंगाल पर असर: तटीय जिलों में भारी बारिश, पहाड़ों में भूस्खलन की चेतावनी

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चक्रवात 'अर्नब' का पश्चिम बंगाल पर असर: तटीय जिलों में भारी बारिश, पहाड़ों में भूस्खलन की चेतावनी

सारांश

चक्रवात 'अर्नब' के आंध्र प्रदेश तट से टकराने की आशंका के बीच पश्चिम बंगाल के तटीय जिलों में 50 km/h हवाओं और भारी बारिश का अलर्ट है। दार्जिलिंग-कालिम्पोंग में भूस्खलन का खतरा, मछुआरों को गुरुवार तक समुद्र से दूर रहने का आदेश।

मुख्य बातें

चक्रवात 'अर्नब' के बुधवार, 29 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश तट से टकराने की आशंका; पश्चिम बंगाल में व्यापक अलर्ट जारी।
दक्षिण 24 परगना, पूर्व-पश्चिम मेदिनीपुर और झाड़ग्राम में 40–50 km/h हवाओं के साथ भारी बारिश का पूर्वानुमान।
दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी में गुरुवार-शुक्रवार को भारी वर्षा; पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की आशंका।
मछुआरों को गुरुवार तक समुद्र में न जाने की सख्त सलाह; समुद्र में मौजूद मछुआरों को सोमवार तक वापस लौटने का निर्देश।
फ्रेजरगंज, गंगासागर, गोवर्धनपुर तटीय पुलिस और सागर-नामखाना में नागरिक सुरक्षा कर्मी तैनात।

चक्रवात 'अर्नब' के अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान में बदलने और बुधवार, 29 अक्टूबर 2026 को आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की आशंका के बीच पश्चिम बंगाल में मौसम विभाग ने व्यापक अलर्ट जारी किया है। कोलकाता स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (आरएमसी) ने राज्य के कई तटीय और पर्वतीय जिलों में आने वाले दिनों तक भारी वर्षा, गरज-चमक और तेज हवाओं का पूर्वानुमान जारी किया है।

मौसम विभाग की चेतावनियाँ

आरएमसी के अनुसार, मंगलवार को दक्षिण 24 परगना, पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर और झाड़ग्राम जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश होगी और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। कोलकाता, उत्तर 24 परगना, हावड़ा और हुगली में हल्की से मध्यम वर्षा संभव है।

बुधवार को मौसम और अधिक बिगड़ने की आशंका है। उपर्युक्त चार जिलों में भारी बारिश के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से हवाएं चल सकती हैं। कोलकाता और दक्षिण बंगाल के अन्य जिलों में भी रुक-रुककर वर्षा और तेज हवाओं की संभावना व्यक्त की गई है।

पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन की आशंका

मौसम विभाग ने उत्तर बंगाल के दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी जिलों में गुरुवार और शुक्रवार को भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। लगातार वर्षा के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन होने की गंभीर आशंका भी जताई गई है। गौरतलब है कि दार्जिलिंग और कालिम्पोंग जैसे क्षेत्र पहले से ही भूस्खलन-संवेदनशील माने जाते हैं, और मानसून के बाद की भारी वर्षा यहाँ नियमित रूप से तबाही मचाती रही है।

मछुआरों और तटीय निवासियों के लिए चेतावनी

चक्रवात के प्रभाव से समुद्र की स्थिति बिगड़ने और ऊँची लहरें उठने की संभावना को देखते हुए मौसम विभाग ने मछुआरों को गुरुवार तक समुद्र में न जाने की सख्त सलाह दी है। जो मछुआरे पहले से समुद्र में थे, उन्हें सोमवार तक तट पर लौटने का निर्देश दिया गया था। इसके अलावा, गहरे दबाव और उच्च ज्वार की युगपत स्थिति के कारण नदियों और समुद्र में जलस्तर बढ़ने तथा ज्वारीय लहरें उठने की आशंका भी है, जो तटीय संवेदनशील बस्तियों के लिए अतिरिक्त खतरा उत्पन्न करती है।

प्रशासनिक तैयारियाँ

एहतियाती उपाय के तहत दक्षिण 24 परगना जिले के फ्रेजरगंज, गंगासागर और गोवर्धनपुर तटीय पुलिस स्टेशनों के कर्मियों ने तटीय बस्तियों में चेतावनी जारी करनी शुरू कर दी है। नामखाना के तटीय इलाकों में सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के ज़रिए लोगों को सतर्क किया जा रहा है। सागर और नामखाना सहित संवेदनशील तटीय क्षेत्रों में नागरिक सुरक्षा कर्मियों को आपातकालीन सहायता और आपदा प्रबंधन हेतु तैनात किया गया है।

यह ऐसे समय में आया है जब बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती गतिविधियाँ इस मौसम में लगातार सक्रिय रही हैं। प्रशासन ने चक्रवात के संभावित प्रभाव को देखते हुए तटीय क्षेत्रों में सतर्कता और निगरानी बढ़ा दी है। आने वाले ४८ घंटे तटीय पश्चिम बंगाल के लिए निर्णायक रहेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा ज़मीनी प्रशासन की है। दक्षिण 24 परगना के सुंदरबन क्षेत्र जैसे इलाके पहले भी 'अम्फान' और 'यास' जैसे तूफानों में भारी तबाही झेल चुके हैं, जहाँ पुनर्वास अभी भी अधूरा है। दार्जिलिंग और कालिम्पोंग में भूस्खलन की पुरानी आदत और जर्जर सड़क संपर्क को देखते हुए, सिर्फ चेतावनी जारी करना पर्याप्त नहीं — तत्काल निकासी और राहत सामग्री की तैनाती ही वास्तविक सुरक्षा की कसौटी होगी।
RashtraPress
27 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चक्रवात 'अर्नब' क्या है और यह कहाँ टकराएगा?
चक्रवात 'अर्नब' बंगाल की खाड़ी में उठा एक अत्यंत गंभीर चक्रवाती तूफान है, जिसके बुधवार, 29 अक्टूबर 2026 को आंध्र प्रदेश के तट से टकराने की आशंका है। इसके प्रभाव से पश्चिम बंगाल में भी भारी बारिश और तेज हवाओं की चेतावनी जारी की गई है।
पश्चिम बंगाल के किन जिलों पर सबसे अधिक असर पड़ेगा?
दक्षिण 24 परगना, पूर्व मेदिनीपुर, पश्चिम मेदिनीपुर और झाड़ग्राम में सबसे तेज असर की आशंका है, जहाँ 40–50 km/h हवाओं के साथ भारी बारिश हो सकती है। उत्तर बंगाल में दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी में भी गुरुवार-शुक्रवार को भारी वर्षा और भूस्खलन का खतरा है।
मछुआरों के लिए क्या निर्देश जारी किए गए हैं?
मौसम विभाग ने मछुआरों को गुरुवार तक समुद्र में मछली पकड़ने की गतिविधियों पर पूर्ण रोक लगाई है। जो मछुआरे पहले से समुद्र में थे, उन्हें सोमवार तक तट पर वापस लौटने का निर्देश दिया गया था।
पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन का खतरा क्यों है?
दार्जिलिंग और कालिम्पोंग जैसे पहाड़ी जिले भूस्खलन-संवेदनशील क्षेत्र हैं, और मौसम विभाग ने वहाँ गुरुवार-शुक्रवार को लगातार भारी बारिश की चेतावनी दी है। भारी वर्षा के कारण पहाड़ी ढलानों पर मिट्टी और पत्थर खिसकने की गंभीर आशंका जताई गई है।
प्रशासन ने क्या तैयारियाँ की हैं?
दक्षिण 24 परगना के फ्रेजरगंज, गंगासागर और गोवर्धनपुर तटीय पुलिस स्टेशनों ने चेतावनी जारी करनी शुरू कर दी है। सागर और नामखाना समेत संवेदनशील तटीय क्षेत्रों में नागरिक सुरक्षा कर्मियों को आपदा प्रबंधन हेतु तैनात किया गया है और सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के ज़रिए लोगों को सतर्क किया जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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