दौंड-पुणे रेल सेवा सुधार की मांग: सांसद पार्थ पवार ने केंद्र को लिखा पत्र, लोकल ट्रेन व ग्रीन जोन पर जोर
सारांश
मुख्य बातें
राज्यसभा सांसद पार्थ अजित पवार ने दौंड–पुणे रेल मार्ग पर यात्रियों की बिगड़ती स्थिति को लेकर केंद्र सरकार और संबंधित रेलवे अधिकारियों को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है। पत्र में इलेक्ट्रिक उपनगरीय (लोकल) ट्रेन सेवा की शुरुआत, डीईएमयू सेवाओं में सुधार, दौंड जंक्शन के विकास और रेलवे की खाली भूमि पर 'नमो उद्यान' योजना के तहत ग्रीन जोन विकसित करने की अनुमति देने की माँग की गई है।
मुख्य माँगें और पत्र की पृष्ठभूमि
सांसद पवार के पत्र में दौंड नगर परिषद की अध्यक्ष दुर्गा देवी इंद्रजीत जगदाले द्वारा 26 मई 2026 को दिए गए निवेदन का उल्लेख किया गया है, जिसमें स्थानीय यात्रियों की समस्याओं को विस्तार से रेखांकित किया गया था। पत्र के अनुसार, आवश्यक बुनियादी ढाँचा उपलब्ध होने के बावजूद अब तक इस मार्ग पर लोकल ट्रेन सेवा नहीं चलाई गई है, जिससे यात्री डीईएमयू ट्रेनों पर निर्भर हैं।
यात्रियों की समस्याएँ
यात्रियों के निवेदनों के अनुसार, वर्तमान में इस मार्ग पर ट्रेनों में अत्यधिक भीड़, अनियमित समय सारणी और लगातार देरी की समस्या बनी हुई है। दौंड–पुणे रेल मार्ग हजारों यात्रियों की जीवनरेखा है — इसमें छात्र, नौकरीपेशा लोग, महिलाएँ, वरिष्ठ नागरिक, किसान और औद्योगिक कामगार शामिल हैं जो प्रतिदिन इस मार्ग से आवागमन करते हैं।
इलेक्ट्रिक लोकल और ग्रीन जोन की माँग
पवार ने पत्र में स्पष्ट किया है कि दौंड–पुणे के बीच इलेक्ट्रिक लोकल सेवा की शुरुआत से न केवल यात्रा सुगम होगी, बल्कि बड़ी संख्या में यात्रियों को राहत मिलेगी। इसके अतिरिक्त, दौंड जंक्शन के विकास से यात्री सुविधाओं में सुधार और रेलवे की खाली ज़मीन पर 'नमो उद्यान' योजना के अंतर्गत हरित क्षेत्र विकसित करने की माँग भी की गई है।
पार्थ पवार: राजनीतिक पृष्ठभूमि
पार्थ पवार महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद हैं। वे अप्रैल 2026 में निर्विरोध निर्वाचित हुए और इसके बाद संसद के उच्च सदन के सदस्य के रूप में शपथ ली। इससे पूर्व उन्होंने 2019 में मावल लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। यह उनके सांसद के रूप में पहले बड़े सार्वजनिक हस्तक्षेपों में से एक है।
आगे की राह
केंद्र सरकार और रेलवे अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह देखना होगा कि क्या रेलवे मंत्रालय इस पत्र पर समयबद्ध कार्रवाई करता है, विशेषकर तब जब दौंड–पुणे मार्ग पर यात्री दबाव लगातार बढ़ रहा है।