ससून डॉक संकट: शरद पवार ने CM फडणवीस को पत्र लिखकर मछुआरों के लिए तत्काल हस्तक्षेप माँगा
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के नेता और राज्यसभा सांसद शरद पवार ने 1 सितंबर 2026 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर ससून डॉक में मछुआरों, मछली कारोबारियों और मजदूरों की बिगड़ती स्थिति पर तत्काल हस्तक्षेप की माँग की है। पवार ने मुख्यमंत्री से संबंधित विभागों की बैठक बुलाकर सभी लंबित मुद्दों पर समयबद्ध और ठोस निर्णय लेने का आग्रह किया है।
ससून डॉक की अहमियत और संकट की पृष्ठभूमि
ससून डॉक मुंबई में पारंपरिक मत्स्य व्यापार का एक ऐतिहासिक केंद्र है, जो पिछले कई दशकों से हजारों मछुआरों, व्यापारियों, मजदूरों और उनके परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार रहा है। पवार ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि यहाँ की समस्याओं का सीधा असर बड़ी संख्या में लोगों के रोज़गार और आर्थिक स्थिरता पर पड़ रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र में तटीय समुदायों की आर्थिक सुरक्षा पहले से ही दबाव में है।
मुख्य समस्याएँ और कमेटी की शिकायतें
ससून डॉक फिशिंग पोर्ट रेस्क्यू एक्शन कमेटी के प्रतिनिधियों ने पवार से मुलाकात कर कई गंभीर मुद्दे उठाए। इनमें सबसे प्रमुख है नवंबर 2025 में मुंबई पोर्ट अथॉरिटी (एमबीपीए) द्वारा गोदाम से मछुआरों, व्यापारियों और मजदूरों को बेदखल किए जाने का मामला। इसके अलावा महाराष्ट्र मत्स्य विकास निगम (एमएफडीसी) और एमबीपीए के बीच गोदाम के किराए और प्रबंधन को लेकर चल रहे विवाद ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।
गौरतलब है कि 12 जून 2015 को लिए गए एक महत्वपूर्ण निर्णय को अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है, जिसकी शिकायत कमेटी लंबे समय से करती आ रही है। इसके साथ ही मंजूर फंड के बावजूद विकास कार्यों की धीमी गति और मछली पकड़ने वाली नावों की मरम्मत के लिए आवश्यक जेटी की कमी को भी गंभीर समस्याओं के रूप में रेखांकित किया गया है।
पवार का स्थलीय दौरा और प्रत्यक्ष अनुभव
पवार ने बताया कि कमेटी से मुलाकात के बाद उन्होंने 28 अगस्त को स्वयं ससून डॉक का दौरा किया और वहाँ की जमीनी हकीकत का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने मछुआरों, कारोबारियों, मजदूरों और अन्य संबंधित लोगों से सीधी बातचीत कर उनकी समस्याएँ समझीं। यह दौरा उनके पत्र की विश्वसनीयता को और मजबूत करता है, क्योंकि उनकी माँगें केवल प्रतिनिधित्व पर नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष अवलोकन पर आधारित हैं।
पवार का व्यापक नजरिया
पवार ने अपने पत्र में जोर देकर कहा कि ससून डॉक केवल एक बंदरगाह नहीं, बल्कि महाराष्ट्र के पारंपरिक मत्स्य व्यापार की अमूल्य विरासत है। उनके अनुसार इन समस्याओं को महज प्रशासनिक या बुनियादी ढाँचे के मुद्दों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए — यह हजारों परिवारों के रोज़गार, आजीविका और भविष्य से सीधे जुड़ा सवाल है।
मुख्यमंत्री से माँगें
पवार ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मामले की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करने, संबंधित विभागों की संयुक्त बैठक बुलाने और सभी लंबित मुद्दों के समाधान के लिए समयबद्ध एवं सकारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करने की माँग की है। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार इस पत्र पर कितनी तेज़ी से प्रतिक्रिया देती है और ससून डॉक के हजारों परिवारों को राहत कब मिलती है।