देबेन महतो मेडिकल कॉलेज में गंदगी: पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. शरदवत मुखर्जी ने 22 अक्टूबर 2026 को पुरुलिया स्थित देबेन महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की बदहाल सफाई व्यवस्था को लेकर कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया है। अस्पताल से जुड़ी गंदगी की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने आनन-फानन में बैठक बुलाई, जिसमें कई वरिष्ठ अधिकारियों की अनुपस्थिति उजागर हुई। मंत्री ने सभी संबंधित अधिकारियों को 48 घंटे के भीतर कारण बताओ नोटिस का जवाब देने का निर्देश दिया है।
मामला कैसे आया सामने
सांसद ज्योतिर्मय सिंह महतो ने स्वास्थ्य मंत्री को फोन कर पुरुलिया के देबेन महतो मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की स्थिति से अवगत कराया। सांसद एक पत्रकार के रिश्तेदार के अस्पताल में भर्ती होने के सिलसिले में वहाँ पहुँचे थे और उन्होंने सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने तस्वीरें और वीडियो भी मंत्री को भेजे, जिन्हें देखकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी हैरान रह गए।
डॉ. मुखर्जी ने कहा कि अस्पताल में पर्याप्त सफाई कर्मचारी और स्वच्छता बनाए रखने के लिए जरूरी सामग्री उपलब्ध होने के बावजूद इस तरह की स्थिति सामने आना गंभीर लापरवाही का प्रमाण है।
अधिकारियों की अनुपस्थिति और तत्काल निर्देश
स्वास्थ्य विभाग की बैठक में अस्पताल के प्रिंसिपल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, वाइस प्रिंसिपल और नॉन-मेडिकल सुपरिंटेंडेंट की अनुपस्थिति का मुद्दा उठा। मंत्री ने बताया कि छह नॉन-मेडिकल सुपरिंटेंडेंट में से केवल एक ही बैठक में उपस्थित था। जाँच में सामने आया कि अधिकारियों ने बिना अनुमति के आंतरिक छुट्टी रोस्टर बनाकर छुट्टी ले ली थी।
विभाग ने इस अनधिकृत व्यवस्था को तत्काल रद्द कर दिया। नॉन-मेडिकल सुपरिंटेंडेंट को छह घंटे के भीतर अस्पताल पहुँचकर सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने और तस्वीरें भेजने का निर्देश दिया गया। वहीं, प्रिंसिपल और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को 12 घंटे के भीतर, यानी अगले दिन सुबह 10 बजे तक कार्यस्थल पर पहुँचने को कहा गया। स्वास्थ्य भवन से एक वरिष्ठ अधिकारी को अस्पताल भेजा जा रहा है, जो मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण करेगा।
चोरबागान हादसे के घायलों की स्थिति
डॉ. मुखर्जी ने बताया कि चोरबागान हादसे में घायल अधिकांश लोगों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। फिलहाल एक व्यक्ति अस्पताल में भर्ती है, जिसकी कमर की हड्डी टूट गई है और उसे सांस लेने में भी परेशानी हो रही है। मंत्री ने कहा कि सांस की समस्या का कोई पुराना कारण भी हो सकता है, लेकिन कमर की हड्डी का फ्रैक्चर हादसे के बाद हुआ है। घटना की जाँच के लिए विशेष जाँच दल (एसआईटी) गठित किया गया है।
जूनियर डॉक्टरों की चिंताएँ और दवाओं की उपलब्धता
जूनियर डॉक्टरों द्वारा चिकित्सा सुविधाओं और दवाओं की कमी को लेकर उठाए गए सवालों पर मुखर्जी ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग उनकी शिकायतों को सम्मान के साथ सुनता है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में पाँच और दस मिलीलीटर की सिरिंज उपलब्ध होने की पुष्टि हुई है। ट्रानेक्सैमिक एसिड इंजेक्शन की उपलब्धता को लेकर भी विभाग ने अपने स्टॉक की जाँच की है।
मंत्री ने स्वीकार किया कि किसी विशेष समय पर कुछ सामग्री की कमी संभव है, जैसा कि जूनियर डॉक्टरों ने बताया। प्रिंसिपल, मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और केंद्रीय औषधि भंडार के अधिकारियों को जरूरी दवाएँ और उपकरण हर समय उपलब्ध रखने का निर्देश दिया गया है। मुखर्जी ने जूनियर डॉक्टरों को विभाग की ताकत बताते हुए कहा कि उनकी ओर से उठाई गई कमियों को दूर करने के लिए सरकार पूरी तरह तत्पर है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल के सरकारी अस्पतालों में सुविधाओं और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सवाल उठते रहे हैं। 48 घंटे के भीतर कारण बताओ नोटिस का जवाब न देने पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। स्वास्थ्य भवन द्वारा भेजे जाने वाले अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।