आरजी कर बलात्कार-हत्या की दूसरी बरसी: पश्चिम बंगाल के सभी सरकारी अस्पतालों में 2 मिनट का मौन
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के समस्त सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों और चिकित्सा संस्थानों में रविवार, 9 अगस्त 2026 को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की पीड़िता महिला डॉक्टर की दूसरी पुण्यतिथि पर दो मिनट का मौन रखा गया। सरकारी आह्वान पर आयोजित इस श्रद्धांजलि कार्यक्रम में पीड़िता की स्मृति में दीपक भी प्रज्वलित किए गए।
पहली बार सरकारी स्तर पर श्रद्धांजलि
यह पहला अवसर है जब राज्य सरकार के आधिकारिक आह्वान पर पीड़िता को सार्वजनिक रूप से श्रद्धांजलि दी गई। गौरतलब है कि पिछले वर्ष तत्कालीन तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के कार्यकाल में इस तरह का कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया था। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार को राज्य के स्वास्थ्य मंत्री शरदवत मुखर्जी के साथ बैठक में इस कार्यक्रम की घोषणा की थी।
मुख्य घटनाक्रम
आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में तृणमूल के पूर्व राज्यसभा सदस्य शांतनु सेन उपस्थित रहे, जो इस आंदोलन में शुरू से मुखर भूमिका निभाते रहे हैं। मौन के बाद उन्होंने जाँच की स्थिति पर चर्चा की और मुख्यमंत्री को सच्चाई उजागर करने की दिशा में कदम उठाने के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने यह भी माँग की कि इस बलात्कार-हत्या मामले में साक्ष्य नष्ट करने के आरोपियों के विरुद्ध भी जाँच होनी चाहिए।
चिकित्सा समुदाय की ओर से त्वरित जाँच और अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की माँग दोहराई गई, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न दोहराई जाएँ।
पानीहाटी में विशेष कार्यक्रम
उत्तर 24 परगना जिले के पानीहाटी में लोक संस्कृति भवन में पीड़िता के नाम पर गठित ट्रस्ट के बैनर तले एक विशेष स्मृति कार्यक्रम का आयोजन किया गया। पीड़िता की माँ इसी क्षेत्र से भाजपा (BJP) विधायक निर्वाचित हैं। परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भी सम्मिलित हुए।
मामले की पृष्ठभूमि और न्यायिक स्थिति
9 अगस्त 2024 को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के इमरजेंसी विभाग में एक महिला प्रशिक्षु डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या की घटना ने पूरे देश में व्यापक आक्रोश उत्पन्न किया था। न्याय की माँग को लेकर देशभर में आंदोलन, रात्रि-जागरण, भूख हड़ताल और जुलूस आयोजित हुए।
इस मामले में अब तक केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी हुई है। राज्य पुलिस ने घटना के तुरंत बाद कोलकाता पुलिस के सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को गिरफ्तार किया था। इसके बाद कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने जाँच अपने हाथ में ली, परंतु किसी नए आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई। सियालदह कोर्ट में त्वरित सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने संजय रॉय को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव
यह ऐसे समय में आया है जब पिछले दो वर्षों में पश्चिम बंगाल का राजनीतिक परिदृश्य बदल चुका है — जो दल तब विपक्ष में था, वह आज सत्ता में है। पीड़िता की माँ को जनता ने भाजपा विधायक के रूप में चुना है। आलोचकों का कहना है कि साक्ष्य नष्ट करने के आरोपों की जाँच अभी भी अधूरी है और पीड़ित परिवार को पूर्ण न्याय मिलना बाकी है।