पश्चिम बंगाल BJP ने पुरुलिया के 4 नेताओं को कारण बताओ नोटिस, स्वास्थ्य अधिकारी से दुर्व्यवहार का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पुरुलिया जिले के बाघमुंडी ब्लॉक स्थित एक सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य अधिकारी के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले में अपने चार नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। पार्टी ने इस घटना को 'शर्मनाक' करार देते हुए आरोपित नेताओं को तत्काल प्रभाव से पार्टी गतिविधियों में हिस्सा लेने से रोक दिया है और सात दिनों के भीतर स्पष्टीकरण माँगा है।
मुख्य घटनाक्रम
12 मई 2026 को पुरुलिया जिले के बाघमुंडी ब्लॉक स्थित पाथरडी स्वास्थ्य केंद्र में भाजपा नेताओं ने कथित तौर पर ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर ऑफ हेल्थ (BMOH) के साथ दुर्व्यवहार किया। आरोप है कि नेताओं ने स्वास्थ्य अधिकारी पर इस बात को लेकर दबाव बनाया कि बाघमुंडी की गर्भवती महिलाओं को दूसरे राज्य के अस्पताल में रेफर क्यों किया जा रहा है। इस घटना ने राज्य की राजनीति में तीखा विवाद खड़ा कर दिया।
पार्टी द्वारा जारी नोटिस में स्वास्थ्य अधिकारी को डराने-धमकाने, अभद्र भाषा के इस्तेमाल, शारीरिक रूप से परेशान करने और सरकारी कामकाज में बाधा डालने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। भाजपा ने इन गतिविधियों को 'पार्टी विरोधी' घोषित किया है।
किन नेताओं को मिला नोटिस
नोटिस पाने वालों में राकेश महतो शामिल हैं, जो पुरुलिया जिला परिषद के सदस्य और भाजपा के बाघमुंडी ब्लॉक इकाई के संयोजक हैं। इसके अलावा विजयमोहन सिंह (बाघमुंडी ब्लॉक सह-संयोजक), अरुण चंद्र माझी (मंडल-4 अध्यक्ष) और मिथुन कुमार (युवा मोर्चा अध्यक्ष) को भी नोटिस जारी किया गया है।
पार्टी की प्रतिक्रिया
भाजपा अनुशासन समिति की सिफारिश और प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद समिक भट्टाचार्य के निर्देश पर चारों नेताओं को फिलहाल पार्टी गतिविधियों से निलंबित रखा गया है। भाजपा के पुरुलिया जिला अध्यक्ष शंकर महतो ने कहा, 'प्रदेश नेतृत्व ने फैसला लिया है। यह पूरी तरह पार्टी का आंतरिक मामला है।'
गौरतलब है कि यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद प्रदेश नेतृत्व द्वारा की गई है, जो दर्शाता है कि पार्टी संगठनात्मक अनुशासन को लेकर सख्त संदेश देना चाहती है।
आरोपित नेताओं का पक्ष
नोटिस पाने वाले चारों नेताओं ने मामले पर खुलकर टिप्पणी करने से इनकार किया। हालाँकि राकेश महतो ने कहा कि वे स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल स्थिति को लेकर अधिकारी से बात करने गए थे। उन्होंने स्वीकार किया कि वहाँ 'तीखी बहस' हुई थी, किंतु किसी प्रकार के उत्पीड़न के आरोपों से इनकार किया।
आगे क्या होगा
चारों नेताओं को सात दिनों के भीतर अपना लिखित स्पष्टीकरण पार्टी को सौंपना है। अनुशासन समिति उनके जवाब की समीक्षा के बाद आगे की कार्रवाई तय करेगी। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब भाजपा पश्चिम बंगाल में अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश में है और जन-विश्वास बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है।