दिल्ली पुलिस ने ₹2.30 करोड़ का गांजा बरामद किया, अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह के 4 आरोपी गिरफ्तार
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस की आउटर डिस्ट्रिक्ट एंटी-नारकोटिक्स स्क्वाड ने 13 जुलाई 2026 को एक बड़े अंतरराज्यीय ड्रग तस्करी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस ने इस कार्रवाई में कुल 765.6 किलोग्राम गांजा, ₹4 लाख नकद, 126 ग्राम सोने के आभूषण और 8 मोबाइल फोन जब्त किए। बरामद गांजे की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब ₹2.30 करोड़ बताई जा रही है।
ऑपरेशन की शुरुआत कैसे हुई
पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई केंद्र सरकार के 'नशा मुक्त भारत अभियान' के तहत चलाए जा रहे विशेष ऑपरेशन का हिस्सा है। 20 जून 2026 को आउटर डिस्ट्रिक्ट एंटी-नारकोटिक्स स्क्वाड को गुप्त सूचना मिली कि एक व्यक्ति बड़ी मात्रा में गांजा लेकर आने वाला है। इस सूचना के आधार पर इंस्पेक्टर वीरेंद्र सिंधु के नेतृत्व में और एसीपी (ऑपरेशंस) की निगरानी में एक विशेष टीम गठित की गई।
पहली गिरफ्तारी: पीतमपुरा में छापा
टीम ने दिल्ली के पीतमपुरा स्थित मधुबन चौक के पास छापा मारकर अशोक कुमार (40) को गिरफ्तार किया। उसके पास मौजूद दो बैगों की तलाशी में फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) टीम की उपस्थिति में 22.610 किलोग्राम गांजा बरामद हुआ। रानी बाग थाने में NDPS एक्ट की धारा 20(C) के तहत मामला दर्ज किया गया। पूछताछ में सामने आया कि अशोक कुमार पहले भी 285 किलोग्राम गांजा तस्करी के मामले में गिरफ्तार हो चुका है।
36 घंटे की निगरानी और लुधियाना में धरपकड़
अशोक कुमार की निशानदेही पर तकनीकी निगरानी और वित्तीय जांच के दौरान पुलिस को बिहार निवासी इंद्रजीत राय के बारे में जानकारी मिली, जो तस्करी के दौरान अजीत सिंह नाम का इस्तेमाल करता था। पुलिस ने 9 जुलाई से इंद्रजीत राय पर लगातार 36 घंटे से अधिक निगरानी रखी — बिहार, ओडिशा, झारखंड, दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में उसका पीछा किया। अंततः 10 जुलाई 2026 को पंजाब के लुधियाना के एक होटल से इंद्रजीत राय और उसके साथी नीतीश कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया।
लुधियाना गोदाम से 743 किलो गांजा बरामद
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि गांजे की बड़ी खेप लुधियाना के जमालपुर स्थित एक किराए के गोदाम में छिपाई गई है। पुलिस ने वहां छापा मारकर 743 किलोग्राम गांजा बरामद किया और एक अन्य आरोपी धर्मेंद्र कुमार को भी गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि यह गिरोह हरियाणा और पंजाब में सप्लाई करने से पहले माल को किराए के गोदामों में छिपाकर रखता था।
आगे की जांच
पुलिस अब बरामद मादक पदार्थ के मूल स्रोत, पूरे सप्लाई नेटवर्क और इस गिरोह से जुड़े अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच कर रही है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब केंद्र और राज्य सरकारें अंतरराज्यीय नशा तस्करी के खिलाफ अभियान तेज कर रही हैं।