दिल्ली में ₹8,941 करोड़ की 43 जल परियोजनाओं का उद्घाटन 22 अक्टूबर को, सीएम रेखा गुप्ता ने एलजी से की मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को लोक निवास में उपराज्यपाल (एलजी) टीएस संधू से मुलाकात की और राजधानी के विकास एवं त्योहारी मौसम में सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़े अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब 22 अक्टूबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा दिल्ली जल बोर्ड की ₹8,941.22 करोड़ की 43 जल एवं सीवेज परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास की तैयारियाँ अंतिम चरण में हैं।
बैठक में क्या हुई चर्चा
आधिकारिक बयान के अनुसार, बैठक में दिल्ली की विकास प्राथमिकताओं और त्योहारी सीजन के दौरान नागरिक व्यवस्था, सार्वजनिक सुरक्षा और आवश्यक सेवाओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया गया। यह मुलाकात यमुना नदी के तट पर चलाए गए बड़े स्वच्छता अभियान के एक दिन बाद हुई, जिसमें 35,000 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।
रविवार के इस अभियान में 20,000 नागरिक, 10,500 कार्यकर्ता, 2,500 छात्र और 2,000 एनजीओ स्वयंसेवक शामिल रहे। दिल्ली विश्वविद्यालय के 25 से अधिक कॉलेजों के छात्रों ने मिलकर 76,755 किलोग्राम ठोस कचरा हटाया, जिनमें अकेले देशबंधु कॉलेज के 400 से अधिक छात्र शामिल थे। अभियान में 26 जेसीबी, 19 ट्रैक्टर-ट्रॉली, 24 नाव, 7 खरपतवार काटने की मशीनें और 269 पीडब्ल्यूडी रखरखाव वैन भी तैनात की गई थीं।
₹8,941 करोड़ की परियोजनाओं का ब्यौरा
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 22 अक्टूबर को दिल्ली जल बोर्ड की 43 परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करेंगे, जिनकी कुल लागत ₹8,941.22 करोड़ है। इनमें ₹2,827.11 करोड़ की 10 नई परियोजनाओं का शिलान्यास और ₹6,114.11 करोड़ की 33 परियोजनाओं का उद्घाटन शामिल है।
इन परियोजनाओं की मुख्य विशेषताएँ इस प्रकार हैं — ओखला में ₹1,161 करोड़ की लागत से 124 एमजीडी क्षमता का नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जाएगा। ₹1,041 करोड़ की लागत से 8 मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांटों का उन्नयन होगा, जिससे उनकी क्षमता 78.2 एमजीडी से बढ़कर 140.8 एमजीडी हो जाएगी और करीब 78.5 लाख लोगों को लाभ मिलेगा।
बाहरी दिल्ली में ₹3,113.67 करोड़ की लागत से 29 नए डीएसटीपी और सीवेज पंपिंग स्टेशन विकसित किए जाएंगे, जो 358 अनधिकृत कॉलोनियों और 113 गाँवों के 36.29 लाख निवासियों की सेवा करेंगे। इसके अतिरिक्त ₹1,691 करोड़ की लागत से 1,034 किलोमीटर लंबा सीवर नेटवर्क बिछाया जाएगा, जिससे 25.82 लाख लोगों को फायदा होगा।
चंद्रावल में ₹298.3 करोड़ की लागत से 477 एमएलडी क्षमता का आधुनिक जल शोधन संयंत्र स्थापित होगा, जो 1935 और 1955 में बने पुराने संयंत्रों की जगह लेगा और करीब 22 लाख लोगों को स्वच्छ जल उपलब्ध कराएगा। साथ ही ₹225.02 करोड़ की लागत से 4.5 किलोमीटर लंबी मुंडका मुख्य नाली का निर्माण भी इन परियोजनाओं में शामिल है।
बायोगैस संयंत्र का उद्घाटन
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोमवार को गोयला डेयरी में ₹16 करोड़ के बायोगैस संयंत्र का उद्घाटन किया। यह संयंत्र प्रतिदिन 200 मीट्रिक टन गोबर को स्वच्छ ईंधन और जैविक खाद में परिवर्तित करने में सक्षम है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक्स पर जानकारी दी कि केवल 18 महीनों में तीन बायोगैस संयंत्र चालू हो चुके हैं और 6 और संयंत्रों की योजना बनाई गई है।
मुख्यमंत्री ने एक्स पर लिखा, 'वर्षों से दिल्ली में एक भी बायोगैस संयंत्र नहीं था। आज मात्र 18 महीनों में 3 संयंत्र चालू हो चुके हैं, और 6 और संयंत्रों की योजना है! हर कदम हमें स्वच्छ माँ यमुना और हरित दिल्ली की ओर ले जाता है।' सरकार के अनुसार यह पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'अपशिष्ट से धन' के दृष्टिकोण के अनुरूप है।
आम जनता पर असर
इन सभी परियोजनाओं से दिल्ली के करोड़ों नागरिकों को सीधा लाभ मिलने का अनुमान है — विशेष रूप से अनधिकृत कॉलोनियों और पुराने इलाकों में रहने वालों को, जहाँ सीवेज इंफ्रास्ट्रक्चर दशकों से उपेक्षित रहा है। गौरतलब है कि चंद्रावल का पुराना जल शोधन संयंत्र 1935 में बना था — यानी यह बदलाव नौ दशक से अधिक पुरानी व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यमुना सफाई और बेहतर सीवेज प्रबंधन के संयुक्त प्रयास यह संकेत देते हैं कि नई दिल्ली सरकार जल अवसंरचना को प्रमुख राजनीतिक प्राथमिकता के रूप में आगे बढ़ा रही है।