5 नवंबर 2026
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दिल्ली AQI 3 दिन में 60 से 350+ पर: सिरसा ने भगवंत मान पर पराली को लेकर लगाए झूठ बोलने के आरोप

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दिल्ली AQI 3 दिन में 60 से 350+ पर: सिरसा ने भगवंत मान पर पराली को लेकर लगाए झूठ बोलने के आरोप

सारांश

दिल्ली का AQI महज तीन दिन में 60 से 350+ के करीब पहुँच गया — और पर्यावरण मंत्री सिरसा का सीधा निशाना पंजाब की पराली पर है। 584 घटनाएं एक ही दिन में, ₹5,000 करोड़ के इस्तेमाल पर सवाल और भगवंत मान पर झूठ के आरोप — दिल्ली का धुआँ इस बार पूरी तरह राजनीतिक भी है।

मुख्य बातें

दिल्ली का AQI 30 अक्टूबर को 60 से बढ़कर 31 अक्टूबर को 117 और अब 350-400 के करीब पहुँचने की स्थिति में है।
3 नवंबर को पंजाब में एक ही दिन में 584 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज, जिसे सिरसा ने नया रिकॉर्ड बताया।
पर्यावरण मंत्री सिरसा के अनुसार पंजाब सरकार के खुद के आँकड़े बताते हैं कि 70% धान की कटाई हो चुकी है, जबकि CM मान ने खंडन किया।
बठिंडा में AQI 1,100+ और तलवंडी साबो में 1,000+ — दिल्ली से 3-4 गुना अधिक।
केंद्र सरकार के दिए ₹5,000 करोड़ पराली प्रबंधन के सही उपयोग पर सवाल; सिरसा के अनुसार किसानों को उपकरण की जगह मुकदमे मिले।
CAQM के अनुसार 4 नवंबर को बठिंडा, फरीदकोट, फाजिल्का, जालंधर, बरनाला, मलोट में सर्वाधिक पराली जलाने की घटनाएं।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने 5 नवंबर 2026 को शास्त्री पार्क स्थित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का दौरा करने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और आम आदमी पार्टी (AAP) पर कड़े सवाल दागे। उन्होंने आरोप लगाया कि पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं के कारण दिल्ली की वायु गुणवत्ता 30 अक्टूबर के AQI 60 से महज तीन दिन में 117 तक और अब 350-400 के करीब पहुँचने के कगार पर है।

तीन दिन में कैसे बिगड़ी दिल्ली की हवा

सिरसा ने आँकड़ों के साथ तर्क प्रस्तुत करते हुए कहा कि 30 अक्टूबर को दिल्ली का AQI 60 था, जो 31 अक्टूबर को बढ़कर 117 हो गया। उन्होंने सवाल उठाया कि इस अवधि में राजधानी में न कोई नया निर्माण हुआ, न कोई नया प्रदूषणकारी उद्योग लगा और न ही भारी वाहन बढ़े — तो फिर हवा अचानक इतनी प्रदूषित कैसे हो गई?

उनका जवाब था — पंजाब की पराली। उन्होंने बताया कि 3 नवंबर को पंजाब में एक ही दिन में 584 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गईं, जिसे उन्होंने एक नया रिकॉर्ड बताया। यह आँकड़ा पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का ही है, यह उन्होंने रेखांकित किया।

भगवंत मान पर झूठ बोलने का आरोप

सिरसा ने आरोप लगाया कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि पंजाब में धान की कटाई अभी शुरू नहीं हुई — जबकि पंजाब सरकार के अपने आँकड़ों के अनुसार 70 प्रतिशत फसल की कटाई पहले ही हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि मान ने वादा किया था कि पंजाब से धुएँ को रोका जाएगा और दिल्ली का प्रदूषण कम होगा, लेकिन पराली जलाने की घटनाएँ अब 2,000 से अधिक हो गई हैं।

कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) के हवाले से सिरसा ने बताया कि 4 नवंबर को बठिंडा, फरीदकोट, फाजिल्का, जालंधर, बरनाला और मलोट में सबसे अधिक पराली जलाने की घटनाएं सामने आईं। उन्होंने कहा कि बठिंडा में प्रदूषण स्तर 1,100 से ऊपर और तलवंडी साबो में 1,000 से ऊपर दर्ज किया गया — जो दिल्ली से 3 से 4 गुना अधिक है।

केंद्र के ₹5,000 करोड़ और किसानों की दुर्दशा

सिरसा ने कहा कि केंद्र सरकार ने पंजाब सरकार को पराली प्रबंधन उपकरण खरीदने के लिए ₹5,000 करोड़ आवंटित किए थे, लेकिन उनके अनुसार वह राशि सही उपयोग में नहीं आई। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों को उपकरण और राहत देने की बजाय उन पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं और जेल भेजा जा रहा है, जबकि अधिकारी जवाबदेह नहीं हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में अपने करीबी व्यक्ति को बैठाया है, और रीना गुप्ता को पंजाब इसलिए भेजा गया है ताकि प्रदूषण के आँकड़े छिपाए जा सकें। ये गंभीर आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

भगवंत मान से पाँच सवाल

सिरसा ने मुख्यमंत्री भगवंत मान से पाँच प्रश्न सार्वजनिक रूप से पूछे। पहला — धान की कटाई को लेकर झूठ क्यों बोला? दूसरा — पराली जलाने की घटनाओं में वृद्धि के बावजूद कमी का दावा क्यों? तीसरा — धुएँ को रोकने का वादा क्यों नहीं निभाया? चौथा — क्या बठिंडा, संगरूर और बरनाला के बच्चों की सेहत की चिंता नहीं? और पाँचवाँ — केंद्र के ₹5,000 करोड़ कहाँ गए?

सिरसा ने दावा किया कि दिल्ली में पिछले एक वर्ष में 220 दिनों तक साफ हवा रही थी — और यह प्रदूषण बाहर से थोपा गया है। AAP और पंजाब सरकार की प्रतिक्रिया इन आरोपों पर अभी प्राप्त नहीं हुई है।

आगे क्या

दिल्ली में AQI के 350-400 के स्तर तक पहुँचने की आशंका के बीच CAQM और केंद्रीय एजेंसियाँ स्थिति पर नज़र रख रही हैं। पंजाब सरकार पर पराली प्रबंधन को लेकर दबाव बढ़ने के संकेत हैं और आने वाले दिनों में राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों मोर्चों पर सक्रियता देखने को मिल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

000 पार करना केवल दिल्ली की नहीं, पंजाब के अपने नागरिकों की भी स्वास्थ्य आपात स्थिति है, जिसे अक्सर राजनीतिक बहस में नज़रअंदाज़ किया जाता है। ₹5,000 करोड़ की केंद्रीय सहायता के बावजूद जमीन पर बदलाव न आना — चाहे दोष किसी का भी हो — यह सवाल उठाता है कि पराली प्रबंधन योजनाओं में जवाबदेही का ढाँचा क्यों नहीं बना। असली लड़ाई BJP और AAP के बीच नहीं, बल्कि नीति और क्रियान्वयन के बीच है।
RashtraPress
5 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली की हवा तीन दिन में इतनी खराब क्यों हो गई?
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के अनुसार दिल्ली में 30 अक्टूबर को AQI 60 था जो 31 अक्टूबर को 117 तक पहुँच गया और अब 350-400 के करीब है। उनका कहना है कि इस दौरान दिल्ली में कोई नया प्रदूषण स्रोत नहीं जुड़ा, इसलिए यह वृद्धि पंजाब की पराली जलाने की घटनाओं के कारण है।
मनजिंदर सिंह सिरसा ने भगवंत मान पर क्या आरोप लगाए?
सिरसा ने आरोप लगाया कि CM भगवंत मान ने झूठ बोला कि पंजाब में धान की कटाई शुरू नहीं हुई, जबकि पंजाब सरकार के अपने आँकड़ों के अनुसार 70% कटाई हो चुकी है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि पराली जलाने की घटनाएँ 2,000 से ऊपर पहुँच गई हैं, जो मान के दावों के विपरीत है।
3 नवंबर को पंजाब में पराली जलाने का रिकॉर्ड कैसा रहा?
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आँकड़ों के अनुसार 3 नवंबर को पंजाब में एक ही दिन में 584 पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गईं, जिसे सिरसा ने एक नया रिकॉर्ड बताया। 4 नवंबर को CAQM के अनुसार बठिंडा, फरीदकोट, फाजिल्का, जालंधर, बरनाला और मलोट में सर्वाधिक घटनाएं थीं।
केंद्र सरकार के ₹5,000 करोड़ पराली प्रबंधन को कैसे मिले?
सिरसा के अनुसार केंद्र सरकार ने पंजाब को पराली प्रबंधन उपकरणों के लिए ₹5,000 करोड़ दिए थे। उनका आरोप है कि यह राशि किसानों तक नहीं पहुँची और किसानों को उपकरण की बजाय मुकदमों और जेल का सामना करना पड़ रहा है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पंजाब में प्रदूषण का स्तर दिल्ली की तुलना में कितना है?
सिरसा ने बताया कि बठिंडा में AQI 1,100 से अधिक और तलवंडी साबो में 1,000 से अधिक है, जो दिल्ली के वर्तमान स्तर से 3 से 4 गुना अधिक है। उन्होंने इसे पंजाब के अपने बच्चों और नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया।
राष्ट्र प्रेस
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