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दिल्ली प्रदूषण पर 'आप' का BJP को घेरा: पराली के आंकड़े और AQI हेरफेर के लगाए गंभीर आरोप

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दिल्ली प्रदूषण पर 'आप' का BJP को घेरा: पराली के आंकड़े और AQI हेरफेर के लगाए गंभीर आरोप

सारांश

AAP ने BJP पर आरोप लगाया कि वह पंजाब के किसानों को दिल्ली के प्रदूषण का बलि का बकरा बना रही है, जबकि पराली जलाने की घटनाएं 80,000 से घटकर 1,000 पर आ गई हैं। साथ ही AQI स्टेशन हरे इलाकों में लगाकर आंकड़े सुधारने का भी आरोप लगाया।

मुख्य बातें

AAP के सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं 71,000-80,000 से घटकर इस साल लगभग एक हजार तक पहुंच गई हैं।
BJP पर आरोप कि दिल्ली में 20 नए AQI स्टेशन हरे-भरे इलाकों में लगाए जा रहे हैं ताकि औसत प्रदूषण स्तर कम दिखाया जा सके।
अनुराग ढांडा ने दावा किया कि मध्य प्रदेश में पराली जलाने के मामलों में हर साल 150 प्रतिशत की वृद्धि और पिछले साल देशभर की 52 प्रतिशत घटनाएं वहीं हुईं।
उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं में हर साल 25 से 30 प्रतिशत वृद्धि का आरोप।
कृत्रिम बारिश ( क्लाउड सीडिंग ) योजना पर AAP ने सवाल उठाए — दावा किया कि उस मौसम में बारिश की संभावना न होने की जानकारी के बावजूद सार्वजनिक धन खर्च किया गया।
सौरभ भारद्वाज और अनुराग ढांडा ने PM मोदी , अमित शाह और मनजिंदर सिंह सिरसा से दिल्ली प्रदूषण पर जवाबदेही माँगी।

आम आदमी पार्टी (AAP) ने 3 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में दिल्ली-एनसीआर की बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि BJP अपनी सरकार की नाकामी छिपाने के लिए पंजाब के किसानों को बेवजह निशाना बना रही है। पार्टी ने कहा कि जब पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं में 90 से 95 प्रतिशत तक की कमी आई है, तो फिर दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण में BJP सरकार की विफलता का जिम्मेदार कौन है?

पराली के आंकड़े: 'आप' का दावा क्या है

AAP के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने कहा कि पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार बनने से पहले पराली जलाने के 71,000 से 80,000 मामले सामने आते थे। उनके अनुसार, किसानों के साथ संवाद और सहयोग के जरिए यह संख्या पिछले साल लगभग पाँच हजार तक सीमित हो गई और इस साल अब तक केवल एक हजार मामले दर्ज हुए हैं। भारद्वाज ने कहा कि इन आंकड़ों के बावजूद BJP का पंजाब के किसानों पर आरोप लगाना तथ्यों से परे है।

AQI आंकड़ों में हेरफेर का आरोप

सौरभ भारद्वाज ने दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा पर आरोप लगाया कि BJP सरकार प्रदूषण कम करने के बजाय वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के आंकड़ों को कृत्रिम रूप से कम दिखाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में पहले से मौजूद 39 प्रदूषण निगरानी स्टेशनों के अलावा पिछले साल 7 और इस साल 13 नए स्टेशन लगाए गए हैं, और 20 अतिरिक्त स्टेशन हरे-भरे इलाकों में स्थापित किए जा रहे हैं। उनके अनुसार, इन क्षेत्रों में स्वाभाविक रूप से कम प्रदूषण दर्ज होने से दिल्ली के औसत AQI को कम दिखाने में मदद मिलती है।

भारद्वाज ने पिछले साल आनंद विहार और द्वारका के प्रदूषण निगरानी केंद्रों के आसपास पानी के टैंकरों से छिड़काव किए जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह समस्या के वास्तविक समाधान की कोशिश नहीं, बल्कि आंकड़ों को प्रभावित करने की रणनीति है।

कृत्रिम बारिश की योजना पर सवाल

AAP नेताओं ने BJP सरकार की आर्टिफिशियल रेन (क्लाउड सीडिंग) योजना पर भी सवाल उठाए। भारद्वाज के अनुसार, केंद्र सरकार के संबंधित विभाग ने पहले ही जानकारी दी थी कि उस मौसम के दौरान दिल्ली में कृत्रिम बारिश की संभावना नहीं है, इसके बावजूद इस योजना पर सार्वजनिक धन खर्च किया गया। उन्होंने पूछा कि इस खर्च की जवाबदेही कौन तय करेगा।

उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश पर निशाना

AAP के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने BJP-शासित राज्यों का हवाला देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में हर साल पराली जलाने की घटनाओं में 25 से 30 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है। उन्होंने मेरठ, अलीगढ़, आगरा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का विशेष उल्लेख किया। ढांडा ने दावा किया कि मध्य प्रदेश में पराली जलाने की घटनाओं में हर साल लगभग 150 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो रही है और पिछले साल देशभर में पराली जलाने की कुल घटनाओं में से 52 प्रतिशत अकेले मध्य प्रदेश में दर्ज हुईं। उन्होंने सवाल किया कि इन राज्यों में BJP की चुप्पी क्यों है।

BJP को जवाबदेही की मांग

अनुराग ढांडा ने कहा कि दिल्ली में प्रदूषण का बढ़ना कोई नई समस्या नहीं है और सरकार को इसकी पूर्व जानकारी रहती है, फिर भी समय रहते ठोस तैयारियां नहीं की गईं। सौरभ भारद्वाज और अनुराग ढांडा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा से सीधे सवाल किया कि दिल्ली की जहरीली हवा की जिम्मेदारी कौन लेगा और राजधानी को प्रदूषण से राहत दिलाने के लिए सरकार की ठोस कार्ययोजना क्या है। पार्टी ने मांग की कि किसानों को बदनाम करने की राजनीति बंद की जाए और प्रदूषण के सभी स्रोतों पर प्रभावी कार्रवाई की जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राजनीतिक जवाबदेही के उस शून्य का है जिसमें दिल्ली की सर्दियाँ हर साल डूबती हैं। AAP के आंकड़े अगर सही भी हों, तो पंजाब में पराली घटने के बावजूद दिल्ली का AQI 'खतरनाक' स्तर पर बना रहना यह साबित करता है कि पराली कभी भी एकमात्र कारण नहीं थी — वाहन उत्सर्जन, निर्माण धूल और औद्योगिक प्रदूषण पर दोनों ही दलों की चुप्पी उजागर होती है। AQI स्टेशनों को हरे इलाकों में लगाने का आरोप गंभीर है और इसकी स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए, क्योंकि नीति-निर्धारण उन्हीं आंकड़ों पर टिका है। BJP और AAP दोनों अपने-अपने राज्यों में पराली के मुद्दे पर एक-दूसरे पर उंगली उठाते हैं, लेकिन दिल्ली के नागरिक हर सर्दी उसी जहरीली हवा में साँस लेते हैं — यह राजनीतिक बहस किसी के फेफड़े साफ नहीं करती।
RashtraPress
3 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली प्रदूषण पर AAP ने BJP पर क्या आरोप लगाए हैं?
AAP ने आरोप लगाया है कि BJP सरकार दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण में अपनी विफलता छिपाने के लिए पंजाब के किसानों को दोषी ठहरा रही है। पार्टी का कहना है कि पंजाब में पराली जलाने की घटनाएं 80,000 से घटकर लगभग 1,000 तक पहुंच गई हैं, इसलिए दिल्ली के प्रदूषण की जिम्मेदारी BJP सरकार पर है।
AQI स्टेशनों में हेरफेर का आरोप क्या है?
सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि दिल्ली में 20 नए प्रदूषण निगरानी स्टेशन हरे-भरे इलाकों में लगाए जा रहे हैं, जहाँ स्वाभाविक रूप से कम प्रदूषण दर्ज होता है। उनके अनुसार, इससे दिल्ली का औसत AQI कृत्रिम रूप से कम दिखाया जा सकता है, जो वास्तविक जमीनी स्थिति को नहीं दर्शाता।
पंजाब में पराली जलाने की स्थिति में कितना सुधार हुआ है?
AAP नेताओं के दावे के अनुसार, पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने से पहले पराली जलाने के 71,000 से 80,000 मामले सामने आते थे। पिछले साल यह संख्या घटकर लगभग 5,000 और इस साल अब तक करीब 1,000 रह गई है, जो लगभग 90 से 95 प्रतिशत की कमी दर्शाती है।
मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में पराली जलाने की स्थिति कैसी है?
अनुराग ढांडा के दावे के अनुसार, मध्य प्रदेश में पराली जलाने के मामलों में हर साल लगभग 150 प्रतिशत की वृद्धि हो रही है और पिछले साल देशभर की 52 प्रतिशत घटनाएं अकेले मध्य प्रदेश में दर्ज हुईं। उत्तर प्रदेश में हर साल 25 से 30 प्रतिशत की वृद्धि का दावा किया गया है।
दिल्ली में कृत्रिम बारिश की योजना क्यों विफल रही?
AAP का आरोप है कि केंद्र सरकार के संबंधित विभाग ने पहले ही बता दिया था कि उस मौसम में दिल्ली में क्लाउड सीडिंग के जरिए कृत्रिम बारिश संभव नहीं है। इसके बावजूद BJP सरकार ने इस योजना पर सार्वजनिक धन खर्च किया और पार्टी ने इस खर्च की जवाबदेही तय करने की मांग की है।
राष्ट्र प्रेस
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