6 अक्टूबर 2026
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पराली जलाने पर दिल्ली CM रेखा गुप्ता का केजरीवाल पर हमला, वादाखिलाफी का आरोप

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पराली जलाने पर दिल्ली CM रेखा गुप्ता का केजरीवाल पर हमला, वादाखिलाफी का आरोप

सारांश

दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने तरनतारन का पराली जलाने का वीडियो शेयर कर केजरीवाल के उस वादे की याद दिलाई जिसमें उन्होंने एक साल में पराली पर रोक लगाने का दावा किया था। केंद्र की मदद के बावजूद AAP सरकार के जमीनी विफलता पर सवाल उठाते हुए CAQM ने 18 जिलों में निगरानी दस्ते तैनात कर दिए हैं।

मुख्य बातें

दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने 6 अक्टूबर 2026 को अरविंद केजरीवाल पर पंजाब में पराली जलाने का वादा न निभाने का आरोप लगाया।
तरनतारन में पराली जलाने का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा कर केजरीवाल को घेरा गया।
केंद्र सरकार द्वारा धनराशि, मशीनें और सब्सिडी उपलब्ध कराए जाने के बावजूद AAP सरकार जमीनी व्यवस्था में नाकाम रही — गुप्ता का आरोप।
CAQM ने पंजाब के 18 जिलों में 1 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक फ्लाइंग स्क्वाड तैनात किए हैं।
तैनात जिलों में संगरूर, तरनतारन, फिरोजपुर, बठिंडा, अमृतसर, लुधियाना सहित कुल 18 प्रमुख धान उत्पादक जिले शामिल हैं।

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 को आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर पंजाब के किसानों के साथ विश्वासघात करने और पराली जलाने की समस्या के समाधान का वादा पूरा न करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि केजरीवाल ने पंजाब में पराली जलाने पर रोक लगाने का वचन दिया था, लेकिन कई साल बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है, जिससे उत्तर भारत में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या खड़ी होती है।

मुख्य आरोप और बयानबाज़ी

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर पंजाब के तरनतारन में पराली जलाने का एक वीडियो साझा किया और केजरीवाल को उनके वादे की याद दिलाई। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने संदेश में उन्होंने केजरीवाल के उस बयान का हवाला दिया, जिसमें उन्होंने कहा था — 'मुझे एक साल का समय दीजिए, मैं पंजाब में पराली जलाने पर रोक लगा दूंगा।'

गुप्ता ने आगे कहा, 'कई साल बीत गए। किसान मदद का इंतजार करते रहे, और AAP की सरकार ने उन्हें पराली जलाने की मजबूरी से मुक्त करने के बजाय उनके हाल पर छोड़ दिया।' उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने धनराशि, मशीनें और सब्सिडी उपलब्ध कराई, फिर भी भगवंत मान और केजरीवाल की AAP सरकार जमीनी स्तर पर व्यवस्था करने में नाकाम रही।

जवाबदेही और इरादे पर सवाल

दिल्ली की मुख्यमंत्री ने कहा कि 'संसाधन पूरी तरह उपलब्ध कराए गए, लेकिन इरादा, दृढ़ संकल्प और जवाबदेही — तीनों ही विफल रहे।' उन्होंने यह भी पूछा कि क्या केजरीवाल दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली हार का गुस्सा दिल्ली की जनता पर निकाल रहे हैं।

गौरतलब है कि यह आरोप ऐसे समय में आए हैं जब राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) और आसपास के इलाकों में सर्दियों से पहले वायु गुणवत्ता में गिरावट की आशंका बढ़ रही है। हर साल अक्टूबर-नवंबर में पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने से दिल्ली का AQI खतरनाक स्तर तक पहुँच जाता है।

CAQM की निगरानी तैयारी

NCR और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पंजाब के 18 जिलों में पराली जलाने की निगरानी के लिए हवाई दस्ते (फ्लाइंग स्क्वाड) तैनात किए हैं। यह तैनाती 1 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी है और इसे क्रमिक चरणों में संरचित किया गया है।

इन हवाई दस्तों को संगरूर, तरनतारन, फिरोजपुर, मुक्तसर, बठिंडा, अमृतसर, मोगा, मानसा, फाजिल्का, पटियाला, लुधियाना, कपूरथला, फरीदकोट, बरनाला, मलेरकोटला, गुरदासपुर, जालंधर और फतेहगढ़ साहिब जैसे प्रमुख धान उत्पादक जिलों में तैनात किया गया है।

CAQM के बयान के अनुसार ये टीमें किसानों, पराली सुरक्षा बल, जिला स्तरीय अधिकारियों, राज्य सरकार के नोडल अधिकारियों, संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों के अधिकारियों और आयोग के साथ समन्वय करेंगी।

दिल्ली सरकार का रुख

मुख्यमंत्री गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार राजधानी की हवा साफ करने के लिए जमीनी स्तर पर नए समाधान लागू करने हेतु दिन-रात काम कर रही है। उन्होंने पंजाब में पराली जलाने को AAP सरकार की 'न कोई तैयारी, न कोई समाधान, सिर्फ झूठे वादे' वाली नीति का प्रतीक बताया।

यह ऐसे समय में आया है जब आने वाले हफ्तों में दिल्ली-NCR के वायु प्रदूषण पर राजनीतिक तनाव और तेज होने की संभावना है, क्योंकि धान की कटाई का मौसम पूरे जोरों पर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और BJP के लिए AAP की पंजाब सरकार को निशाना बनाना एक आज़माया हुआ नुस्खा है। लेकिन असली सवाल यह है कि केंद्र की सब्सिडी और मशीनें किसानों तक पहुँचाने में व्यवस्थागत खामियाँ किसकी हैं — राज्य सरकार की, केंद्र की अमलदारी की, या उस कृषि ढाँचे की जो किसान को पराली जलाने से सस्ता विकल्प अब तक नहीं दे पाया। CAQM के फ्लाइंग स्क्वाड हर साल तैनात होते हैं, और हर साल NCR की हवा नवंबर में 'गंभीर' श्रेणी में पहुँच जाती है — यह निगरानी के बजाय नीति की विफलता है। जब तक किसान को पराली प्रबंधन आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं लगेगा, राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का यह सालाना चक्र जारी रहेगा।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने केजरीवाल पर क्या आरोप लगाए?
रेखा गुप्ता ने आरोप लगाया कि केजरीवाल ने पंजाब में पराली जलाने पर एक साल में रोक लगाने का वादा किया था, जो पूरा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने धनराशि, मशीनें और सब्सिडी दी, फिर भी AAP सरकार जमीनी स्तर पर व्यवस्था करने में नाकाम रही।
तरनतारन में पराली जलाने का मामला क्यों चर्चा में है?
दिल्ली CM रेखा गुप्ता ने तरनतारन में पराली जलाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसे उन्होंने AAP सरकार की नीतिगत विफलता का प्रमाण बताया। पंजाब के इस जिले समेत कई जिलों में हर साल अक्टूबर-नवंबर में पराली जलाई जाती है, जो दिल्ली-NCR के वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारण बनती है।
CAQM ने पंजाब में क्या कदम उठाए हैं?
NCR और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने पंजाब के 18 जिलों में 1 अक्टूबर से 30 नवंबर 2026 तक फ्लाइंग स्क्वाड तैनात किए हैं। ये दस्ते किसानों, जिला अधिकारियों, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और CAQM के साथ समन्वय करेंगे।
पंजाब के किन जिलों में CAQM ने फ्लाइंग स्क्वाड तैनात किए हैं?
CAQM ने संगरूर, तरनतारन, फिरोजपुर, मुक्तसर, बठिंडा, अमृतसर, मोगा, मानसा, फाजिल्का, पटियाला, लुधियाना, कपूरथला, फरीदकोट, बरनाला, मलेरकोटला, गुरदासपुर, जालंधर और फतेहगढ़ साहिब — कुल 18 प्रमुख धान उत्पादक जिलों में हवाई दस्ते तैनात किए हैं।
पराली जलाने की समस्या दिल्ली को कैसे प्रभावित करती है?
हर साल अक्टूबर-नवंबर में पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने से निकलने वाला धुआँ दिल्ली-NCR की हवा को 'गंभीर' श्रेणी में धकेल देता है, जिससे लाखों लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित होता है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) कई बार 400 से ऊपर चला जाता है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक माना जाता है।
राष्ट्र प्रेस
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