क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई: काला जठेड़ी गैंग का 8 साल से फरार बदमाश रवि मलिक गिरफ्तार
सारांश
Key Takeaways
- रवि मलिक उर्फ भूरा (43) को दिल्ली क्राइम ब्रांच ने 22 अप्रैल 2025 को रोहिणी से गिरफ्तार किया।
- आरोपी काला जठेड़ी और संपत नेहरा गैंग का सक्रिय सदस्य था और 8 वर्षों से फरार था।
- रोहिणी कोर्ट ने 1 मई 2018 को उसे घोषित अपराधी करार दिया था।
- दिल्ली पुलिस ने ₹50,000 और UP पुलिस ने ₹1,00,000 का इनाम घोषित किया था।
- 2020 की मेरठ मुठभेड़ में उसे 6 गोलियां लगी थीं, फिर भी वह बच निकला था।
- 2017 में पैरोल पर रिहाई के बाद फरार होकर वह देहरादून से अपराध संचालित करता रहा।
नई दिल्ली, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (द्वारका, सेक्टर-9) ने 22 अप्रैल 2025 को एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए कुख्यात काला जठेड़ी और संपत नेहरा गैंग के सक्रिय सदस्य रवि मलिक उर्फ भूरा (43 वर्ष) को रोहिणी स्थित लांसर कॉन्वेंट स्कूल के निकट दबोच लिया। यह अपराधी हत्या के प्रयास और सशस्त्र लूट के मामलों में वांछित था और पिछले 8 वर्षों से कानून की पकड़ से बाहर था।
गिरफ्तारी की पूरी कहानी
इंस्पेक्टर सतीश मलिक के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच की टीम को 22 अप्रैल को गुप्त सूचना मिली कि रवि मलिक रोहिणी के लांसर कॉन्वेंट स्कूल के पास आने वाला है। टीम ने तत्काल जाल बिछाया और आरोपी को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।
रवि मलिक को इससे पहले भी इसी मामले में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन जमानत मिलने के बाद वह कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ। इसके परिणामस्वरूप 1 मई 2018 को रोहिणी कोर्ट ने उसे घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) करार दे दिया था।
अपराध की दुनिया में कैसे आया रवि मलिक
मूल रूप से अलीपुर निवासी रवि मलिक ने 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की थी और शुरुआत में बिल्डिंग मटेरियल के व्यवसाय से जुड़ा था। 2006 में एक जमीन विवाद के दौरान फायरिंग की घटना ने उसकी जिंदगी की दिशा बदल दी।
जेल में रहने के दौरान उसकी मुलाकात कुख्यात गैंगस्टर काला जठेड़ी से हुई, जिसके बाद वह इस गैंग का सक्रिय और भरोसेमंद सदस्य बन गया। 2009 से 2011 के बीच उसने हत्या, सशस्त्र लूट, हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट से जुड़े कई संगीन अपराधों को अंजाम दिया।
यहां तक कि 2011 में जेल के भीतर हुई एक हत्या में भी उसकी संलिप्तता का पता चला था — जो इस बात का प्रमाण है कि जेल की दीवारें भी उसे अपराध से नहीं रोक सकीं।
इनाम और फरारी का सफर
रवि मलिक की खतरनाक आपराधिक पृष्ठभूमि को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने ₹50,000 और बाद में उत्तर प्रदेश पुलिस ने ₹1,00,000 का इनाम घोषित किया था। इसके बावजूद वह वर्षों तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा।
2017 में पैरोल पर रिहा होने के बाद वह दोबारा फरार हो गया और अपराधों में सक्रिय हो गया। 2020 में मेरठ में एक हत्याकांड में उसका नाम सामने आया, जहां पुलिस मुठभेड़ में उसे छह गोलियां लगीं — लेकिन वह बच निकला।
गिरफ्तारी से बचने के लिए वह दिल्ली छोड़कर देहरादून चला गया था और वहीं से अपनी आपराधिक गतिविधियां संचालित करता रहा। हाल ही में दिल्ली आने की सूचना मिलते ही क्राइम ब्रांच ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे धर दबोचा।
पुलिस का बयान और व्यापक संदर्भ
क्राइम ब्रांच के डीसीपी हर्ष इंदोरा ने कहा, "यह गिरफ्तारी दिल्ली पुलिस की निरंतर सतर्कता और अथक निगरानी का नतीजा है। कोई भी फरार अपराधी कानून से लंबे समय तक नहीं बच सकता।"
गौरतलब है कि काला जठेड़ी गैंग दिल्ली-NCR के सबसे खतरनाक संगठित अपराध नेटवर्कों में से एक माना जाता है। इस गैंग के सदस्यों की गिरफ्तारी के बावजूद इसकी जड़ें जेल के अंदर और बाहर दोनों जगह फैली हुई हैं — जो भारत की जेल व्यवस्था और संगठित अपराध नियंत्रण पर गंभीर सवाल उठाती हैं।
यह भी उल्लेखनीय है कि 2017 में पैरोल मिलने के बाद रवि मलिक के फरार होने की घटना पैरोल प्रणाली की खामियों की ओर इशारा करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि संगठित अपराध के आरोपियों को पैरोल देने से पहले उनकी गतिविधियों की कड़ी निगरानी आवश्यक है।
अब पुलिस रवि मलिक से पूछताछ कर गैंग के अन्य फरार सदस्यों और नए आपराधिक नेटवर्क की जानकारी जुटाने में लगी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।