दिल्ली में देसी घी के 59 में से 19 नमूने असुरक्षित, स्विगी-ज़ोमैटो-ज़ेप्टो गोदामों में मिलीं गंभीर खामियां
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली के खाद्य सुरक्षा विभाग ने 17 अक्टूबर 2026 को एक व्यापक जांच अभियान के नतीजे सार्वजनिक किए, जिनमें राजधानी के विभिन्न बाज़ारों से लिए गए देसी घी के 59 नमूनों में से 19 नमूने इंसानों के सेवन के लिए असुरक्षित और 4 नमूने तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके अतिरिक्त, स्विगी इंस्टामार्ट, ज़ोमैटो हाइपरप्योर, ज़ेप्टो, रिलायंस रिटेल और ब्लिंक कॉमर्स सहित कई प्रमुख ई-कॉमर्स व क्विक-कॉमर्स कंपनियों के गोदामों और 'डार्क स्टोर्स' में एक्सपायर्ड उत्पाद, कीड़े-मकोड़े और अस्वच्छ भंडारण जैसी गंभीर खामियां सामने आईं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्देश पर संचालित इस अभियान में असुरक्षित घी बेचने वाले प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित कर उन्हें बंद करने के आदेश दिए गए हैं।
देसी घी की जांच: कौन-से ब्रांड फेल हुए
खाद्य सुरक्षा विभाग ने नाहरपुर, पोसांगीपुर, लक्ष्मी नगर, प्रीत विहार, रामपुरा, टैगोर गार्डन, कल्याणपुरी, कृष्णा विहार और कोंडली के बाज़ारों से देसी घी के 59 नमूने संग्रहित किए। जांच में कुल नमूनों के 42 प्रतिशत से अधिक नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे।
मानव उपभोग के लिए असुरक्षित पाए गए ब्रांडों में हरियाणा लाइट, हरियाणा सुप्रीम, हरियाणा डेयरी, हरियाणा प्योर, श्री हरियाणा किंग, श्री हरियाणा फूड्स, करतार, प्रभास, मधु संगम, राधा कृष्ण, न्यू पंजाब सुपर ब्रांड, अक्षरा, आनंद गोल्ड, श्री नंदन, श्री मोहन और श्री कृष्ण शामिल हैं। वहीं, नोवा, गोवर्धन प्योर काउ घी और प्रताप देसी घी के नमूनों को 'घटिया' (सबस्टैंडर्ड) श्रेणी में रखा गया है।
ई-कॉमर्स गोदामों में क्या मिला
उत्तम नगर स्थित स्विगी इंस्टामार्ट के परिसर में अधिकारियों को फ्रोजन हरी मटर, ग्रीक योगर्ट, बिना अंडे वाली चॉकलेट-चिप ब्राउनी और गाय के घी की एक्सपायर्ड खेप मिली। स्प्राउट्स, फलों और सब्जियों के कुछ पैकेटों पर एक्सपायरी डेट दर्ज ही नहीं थी।
वज़ीरपुर औद्योगिक क्षेत्र में रिलायंस रिटेल लिमिटेड के परिसर में मक्खियां, मच्छर और एक छिपकली मिली; मकड़ी के जाले भी पाए गए। इसके साथ ही वहां सफाई का कोई निर्धारित शेड्यूल या चेकलिस्ट नहीं थी। घेवरा स्थित ज़ोमैटो हाइपरप्योर के परिसर में एक्सपायर्ड 'कोक डाइट' और नेस्ले शिकंजी के उत्पाद तथा अस्वच्छ स्थितियां दर्ज की गईं।
झील खुरेजा में ज़ेप्टो लिमिटेड के गोदाम में कोल्ड-स्टोरेज का तापमान तय मानकों से भटका हुआ था। वहां कॉकरोच, मकड़ी के जाले, जंग लगे रैक, दीवारों की उखड़ती परतें और खराब हो चुके उत्पादों के ऊपर रखा खाद्य सामान मिला — कुछ खाद्य सामग्री सीधे फर्श पर रखी हुई थी। आसफ अली रोड और दरियागंज में ब्लिंक कॉमर्स प्राइवेट लिमिटेड के परिसरों में गंदे क्रेट, धूल और अपर्याप्त रैट ट्रैप पाए गए। रोहिणी स्टोर में खाद्य पदार्थों के क्रॉस-कंटैमिनेशन से बचाव की कोई व्यवस्था नहीं थी।
सरकार की प्रतिक्रिया और कार्रवाई
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि 'खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से समझौता करना या मिलावट के जरिए लोगों की सेहत को खतरे में डालना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।' उन्होंने दोहराया कि दिल्लीवासियों की सेहत और सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
विभाग ने असुरक्षित घी बेचने वाले सभी प्रतिष्ठानों को बंद करने के आदेश जारी किए हैं और उनके लाइसेंस निलंबित कर दिए गए हैं। निरीक्षण किए गए सभी प्रतिष्ठानों को सुधार के नोटिस भेजे गए हैं, जिनमें कमियों को दूर करने का निर्देश है। खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने जांच के दौरान खाने-पीने की चीजों के नमूने भी संग्रहित किए हैं।
आम जनता पर असर और व्यापक संदर्भ
गौरतलब है कि भारत में देसी घी एक रोज़मर्रा की खाद्य सामग्री है और धार्मिक-सांस्कृतिक उपयोग के कारण बाज़ार में इसकी व्यापक माँग रहती है — ऐसे में मिलावट या असुरक्षित उत्पाद सीधे लाखों परिवारों की सेहत को प्रभावित करते हैं। यह अभियान ऐसे समय में आया है जब ई-कॉमर्स व क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के जरिए खाद्य उत्पादों की डिलीवरी तेज़ी से बढ़ी है, लेकिन उनके भंडारण मानकों पर निगरानी अपेक्षाकृत कम रही है।
खाद्य सुरक्षा विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह बाज़ारों, खाद्य भंडारण सुविधाओं और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के ज़रिए उत्पाद बेचने वाले प्रतिष्ठानों की निगरानी और सख्त करे। सरकार का कहना है कि उसका उद्देश्य केवल कमियों का पता लगाना नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रणाली सुनिश्चित करना है जिसमें दिल्ली के हर परिवार को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिल सके।
आगे क्या होगा
जांच अभियान जारी रहेगा और नमूनों के परीक्षण के आधार पर अतिरिक्त कार्रवाई संभव है। संबंधित प्रतिष्ठानों को नोटिस का जवाब देना होगा और मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना होगा — अन्यथा स्थायी लाइसेंस रद्द तक का सामना करना पड़ सकता है। जनस्वास्थ्य की सुरक्षा और खाद्य व्यापार में जवाबदेही तय करना दिल्ली सरकार की घोषित प्राथमिकताएं हैं।