अहमदाबाद में गैर-मानक खाद्य नमूने 150% बढ़े, AMC ने 19 प्रतिष्ठान सील किए
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद नगर निगम (AMC) के खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा 7 नवंबर 2026 को जारी आँकड़ों के अनुसार, जनवरी से अक्टूबर 2026 के बीच गैर-मानक पाए गए खाद्य नमूनों की संख्या 327 हो गई — जो 2025 की इसी अवधि में 131 थी और इस तरह लगभग 150 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। यह आँकड़ा तब सामने आया है जब विभाग ने नमूना संग्रह की गति भी पिछले साल के 4,071 से बढ़ाकर 7,339 कर दी है।
मुख्य घटनाक्रम
विभाग ने 1 अक्टूबर से 2 नवंबर 2026 के बीच अहमदाबाद के विभिन्न क्षेत्रों में खाद्य प्रतिष्ठानों से 841 नमूने एकत्र किए। इनमें 167 मिठाइयाँ, 74 दूध एवं दुग्ध उत्पाद, 80 फाफड़ा और जलेबी, 95 नमकीन, 44 बेसन और आटा, 30 मसाले, 18 खाद्य तेल, 18 बेकरी उत्पाद, 8 मुखवास और 307 अन्य खाद्य उत्पाद शामिल थे।
इस अवधि में 27 नमूने गैर-मानक और कुछ असुरक्षित पाए गए। संबंधित कारोबारियों के विरुद्ध खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई आरंभ की गई।
गैर-मानक उत्पाद — कौन-कौन से प्रतिष्ठान निशाने पर
गैर-मानक पाए गए नमूनों में दरियापुर स्थित गुजरात डेयरी और वस्त्राल स्थित विजय डेयरी का खुला घी, सरखेज स्थित ओम फूड सेंटर का मक्खन, निकोल के सूरती लाइव ढोकला और लक्ष्य लाइव चूल्हा डोसा का मक्खन तथा मणिनगर स्थित जनता फास्ट फूड का टमाटर सॉस शामिल हैं।
घाटलोडिया की श्रीजी डाबेली एंड वडापाव की डाबेली, निकोल के एल.वाई.पी.एस. का पफ, भादज के राधे श्याम पकोड़ी सेंटर का पानीपुरी का पानी तथा जोधपुर के श्री गणेश सैंडविच और एसपी रिंग रोड स्थित अलख नो ओटलो फूड कोर्ट का देसी डेलो सॉस भी मानकों पर खरा नहीं उतरा।
गोटा स्थित आई श्री खोडियार गृह उद्योग के आलू पेस्ट, टमाटर पेस्ट, फ्रूट स्क्वैश और स्टार्च पाउडर के नमूनों में क्रमशः दो गैर-मानक, एक असुरक्षित और एक गैर-मानक की पुष्टि हुई। गोटा के ही एवन ब्रदर्स का एक स्नैक टॉपिंग उत्पाद भी गैर-मानक घोषित किया गया।
अन्य गैर-मानक उत्पादों में इनुस चाइनीज पंजाबी और भावनगरी फरसान हाउस का लो-फैट पनीर, असारवा के तुलसी मावा सेंटर का खुला गाय का घी, भाईपुरा के धनलक्ष्मी किराना स्टोर्स का मावा तथा सारसपुर के कनैयालाल मावा वाला का स्वीट मावा शामिल हैं। वटवा स्थित भारत फूड के टमाटर कैचप, रेड चिली सॉस और ग्रीन चिली सॉस भी गैर-मानक पाए गए।
प्रशासनिक कार्रवाई और सील किए गए प्रतिष्ठान
1 अक्टूबर से 2 नवंबर के बीच विभाग ने 2,226 खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया और 660 नोटिस जारी किए। इस दौरान लगभग 1,345 किलोग्राम या लीटर खराब खाद्य सामग्री नष्ट की गई और ₹11,28,500 का प्रशासनिक शुल्क वसूला गया।
नियमों के उल्लंघन पर विभाग ने 19 प्रतिष्ठानों को सील या बंद किया। इनमें नरोदा का अशरफी मटन एंड चिकन, राखियाल की अरमान बेकरी, काठवाड़ा की श्री इंडस्ट्रीज, बेहरामपुरा का एमजेएफ फूड, नरोल की एन-मंगीलाल मसाला प्राइवेट लिमिटेड और दानिलिमडा का ए.एन. गृह उद्योग शामिल हैं।
कालूपुर स्थित एच.एम. वर्ख वाला के पास नकली खाद्य चांदी वर्क पाया गया। नारणपुरा की मां भजिया पकोड़ा को सील किया गया क्योंकि उसके फ्राइंग ऑयल में टीपीसी (टोटल पोलर कंपाउंड्स) स्तर 27.5 दर्ज हुआ — जो निर्धारित सीमा से अधिक है। प्रकाशकुमार कनैयालाल, अमरतलाल कुबेरदास नमकीनवाला, श्याम सुंदर फूड प्रोडक्ट्स और स्वास्तिक फूड्स के पास इस्तेमाल किए गए खाना पकाने के तेल के निस्तारण के लिए वैध अनुबंध नहीं पाए गए।
वित्तीय वसूली में भी उल्लेखनीय वृद्धि
जनवरी से अक्टूबर 2026 के बीच प्रशासनिक शुल्क वसूली ₹62.11 लाख से बढ़कर ₹1.01 करोड़ हो गई — यानी इसमें भी करीब 63 प्रतिशत की वृद्धि हुई। आलोचकों का कहना है कि यह वृद्धि केवल प्रवर्तन की सक्रियता को दर्शाती है, लेकिन असली सवाल यह है कि खाद्य गुणवत्ता में सुधार कब दिखेगा।
आगे क्या होगा
खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों ने कहा कि आने वाले दिनों में खाद्य प्रतिष्ठानों की जाँच और तेज की जाएगी, विशेष रूप से स्वच्छता, वैध लाइसेंस और पंजीकरण पर ध्यान दिया जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया, 'बिना आवश्यक लाइसेंस के चल रहे या खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ FSSAI और गुजरात प्रांतीय नगर निगम अधिनियम (GPMC) के तहत कार्रवाई की जाएगी।' गौरतलब है कि यह अभियान त्योहारी सीज़न के बाद भी जारी रहने की उम्मीद है, जब मिठाइयों और दुग्ध उत्पादों में मिलावट की शिकायतें आमतौर पर बढ़ जाती हैं।