16 अक्टूबर 2026
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अहमदाबाद में फर्जी केचप कारखाना सील: बिना टमाटर के बना रहे थे 'टमाटर केचप', 2,000 किलो जब्त

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अहमदाबाद में फर्जी केचप कारखाना सील: बिना टमाटर के बना रहे थे 'टमाटर केचप', 2,000 किलो जब्त

सारांश

अहमदाबाद के बहरामपुरा में एक फूड यूनिट टमाटर के बिना 'टमाटर केचप' बना रही थी — आलू के फ्लेक्स, कॉर्न फ्लोर और रंग से तैयार यह उत्पाद ₹100 में 5 किलो बिक रहा था। एएमसी ने 2,000 किलो जब्त कर यूनिट सील की, FSSAI दस्तावेज़ों में विसंगतियाँ मिलीं।

मुख्य बातें

अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) के खाद्य सुरक्षा विभाग ने 15 अक्टूबर 2026 को बहरामपुरा स्थित 'एमजेएफ फूड' यूनिट को सील किया।
यूनिट बिना टमाटर के, आलू के फ्लेक्स और कॉर्न फ्लोर से टमाटर केचप जैसा उत्पाद 'टेस्टी स्नैक टच अप' ब्रांड से बेच रही थी।
करीब 2,000 किलोग्राम तैयार उत्पाद व कच्चा माल जब्त; प्रयोगशाला जांच के लिए नमूना भेजा गया।
उत्पाद ₹100 प्रति 5 किलो के पैक में बेचा जा रहा था; लेबल पर दर्ज सामग्री की खरीद के बिल पेश करने में इकाई विफल रही।
FSSAI रजिस्ट्रेशन नंबर 2072605400039 के विवरण में विसंगतियाँ मिलीं; प्रयोगशाला रिपोर्ट के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई होगी।

अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) के खाद्य सुरक्षा विभाग ने 15 अक्टूबर 2026 को शहर के बहरामपुरा इलाके में स्थित एक फूड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को सील कर दिया, जो बिना एक भी टमाटर के इस्तेमाल के, टमाटर केचप जैसा दिखने वाला उत्पाद बना रही थी। निगम ने कार्रवाई के दौरान करीब 2,000 किलोग्राम तैयार उत्पाद और कच्चा माल जब्त कर लिया है तथा प्रयोगशाला जांच के लिए एक नमूना भेजा गया है।

क्या था इस यूनिट में

'एमजेएफ फूड' नामक इस इकाई का पता सर्वे नंबर 141/142/143, प्लॉट नंबर 150 (भाग), सब-प्लॉट नंबर 20, लकी एस्टेट, पिराना सीवेज फार्म रोड, बेहरामपुरा, अहमदाबाद बताया गया है। यह कंपनी 'टेस्टी स्नैक टच अप' ब्रांड नाम से उत्पाद बेचती थी। निरीक्षण के दौरान परिसर में FSSAI रजिस्ट्रेशन नंबर 2072605400039 प्रदर्शित पाया गया।

जांच अधिकारियों के अनुसार, उत्पाद बनाने में आलू के फ्लेक्स और कॉर्न फ्लोर का उपयोग किया जा रहा था। इसके अलावा चीनी, नमक, रंग, एसिटिक एसिड, प्रिजर्वेटिव्स और स्टेबलाइजर्स भी मिलाए जाते थे। उत्पाद के निर्माण की किसी भी अवस्था में टमाटर का इस्तेमाल नहीं किया गया था, जबकि देखने और बनावट में यह बिल्कुल टमाटर केचप जैसा प्रतीत होता था।

लेबलिंग में गंभीर विसंगतियाँ

उत्पाद के लेबल पर पानी, सब्जियों का गूदा (10%), स्टेबलाइजिंग एजेंट (INS-1422 और INS-415), आयोडीन युक्त नमक, एसिडिटी रेगुलेटर (INS-260), लाल मिर्च पाउडर तथा अन्य सामग्री का उल्लेख था। हालांकि, इकाई लेबल पर दर्ज सामग्री की खरीद के बिल प्रस्तुत करने में विफल रही, जिससे यह संदेहास्पद हो गया कि वास्तव में वे सामग्रियाँ उत्पाद में थीं भी या नहीं।

अधिकारियों ने बताया कि परिसर में प्रदर्शित FSSAI विवरण और व्यावसायिक इकाई की जानकारी में कई विसंगतियाँ पाई गईं, जिनकी आगे और जांच की जा रही है। यह उत्पाद ₹100 में 5 किलो के पैक में बेचा जा रहा था।

आम उपभोक्ता पर असर

खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, इस उत्पाद की प्रस्तुति और लेबलिंग इस तरह की थी कि उपभोक्ता इसे टमाटर से बना केचप समझकर खरीद सकते थे — जो सीधे तौर पर उपभोक्ता धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि बाज़ार में सस्ते दाम पर मिलने वाले इस प्रकार के उत्पाद अक्सर छोटे रेस्तराँ, ढाबों और घरेलू उपभोक्ताओं तक पहुँचते हैं, जिन्हें सामग्री की सच्चाई का पता नहीं होता।

विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी खाद्य व्यवसाय संचालकों के पास वैध FSSAI लाइसेंस या पंजीकरण होना अनिवार्य है। उन्हें सही विवरण प्रदर्शित करना, खरीद बिल और आवश्यक रिकॉर्ड रखना तथा उत्पाद लेबल पर सटीक जानकारी देना आवश्यक है।

अगली कानूनी कार्रवाई

विभाग ने कहा है कि 'प्रयोगशाला विश्लेषण रिपोर्ट और आगे की जांच-पड़ताल के नतीजों के आधार पर अगली कानूनी कार्रवाई की जाएगी।' निरीक्षण के बाद इकाई को सील कर दिया गया है और जब्त माल की बिक्री व वितरण पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में नकली और मिलावटी खाद्य उत्पादों के खिलाफ खाद्य नियामक एजेंसियों की सख्ती बढ़ रही है। प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि इकाई के खिलाफ खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम (FSSAI) के तहत कितनी गंभीर धाराएँ लगाई जाएँगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

उनमें ज़मीन-आसमान का फर्क हो सकता है। ₹100 में 5 किलो की कीमत स्पष्ट संकेत देती है कि यह उत्पाद मुख्यतः निम्न-आय वर्ग, ढाबों और छोटे रेस्तराँ तक पहुँचता था — यानी वे लोग जो सामग्री की बारीकी जाँचने की स्थिति में नहीं होते। FSSAI पंजीकरण विसंगति यह भी उठाती है कि क्या इस तरह की इकाइयाँ नियामक निगरानी की दरारों से फिसलती रहती हैं। असली सवाल यह है कि प्रयोगशाला रिपोर्ट के बाद कितनी सख्त कार्रवाई होती है — अन्यथा सील और जब्ती महज औपचारिकता बनकर रह जाती है।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद में सील की गई फूड यूनिट में क्या गड़बड़ी पाई गई?
'एमजेएफ फूड' यूनिट बिना टमाटर के, आलू के फ्लेक्स और कॉर्न फ्लोर से टमाटर केचप जैसा दिखने वाला उत्पाद बना रही थी। इसकी लेबलिंग, निर्माण प्रक्रिया और FSSAI दस्तावेज़ों में कई गंभीर विसंगतियाँ पाई गईं।
एएमसी ने इस यूनिट के खिलाफ क्या कार्रवाई की?
अहमदाबाद नगर निगम के खाद्य सुरक्षा विभाग ने 15 अक्टूबर 2026 को यूनिट को सील कर दिया और करीब 2,000 किलोग्राम तैयार उत्पाद व कच्चा माल जब्त किया। प्रयोगशाला जांच के लिए सॉस का एक नमूना भी लिया गया है।
इस नकली केचप में क्या-क्या मिलाया जा रहा था?
उत्पाद में आलू के फ्लेक्स, कॉर्न फ्लोर, चीनी, नमक, खाद्य रंग, एसिटिक एसिड, प्रिजर्वेटिव्स और स्टेबलाइजर्स मिलाए जाते थे। निर्माण के किसी भी चरण में टमाटर का उपयोग नहीं किया गया था।
आगे क्या कानूनी कार्रवाई होगी?
खाद्य सुरक्षा विभाग ने कहा है कि प्रयोगशाला विश्लेषण रिपोर्ट और आगे की जांच के नतीजों के आधार पर अगली कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी। FSSAI उल्लंघन साबित होने पर खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत दंडात्मक कार्रवाई संभव है।
क्या इस उत्पाद से स्वास्थ्य को खतरा था?
विभाग इस बिंदु पर प्रयोगशाला रिपोर्ट का इंतज़ार कर रहा है। अभी तक की जाँच में मुख्य चिंता उपभोक्ता धोखाधड़ी और लेबल पर गलत जानकारी को लेकर है — यह उत्पाद टमाटर से बना बताकर बेचा जा रहा था जबकि उसमें टमाटर था ही नहीं।
राष्ट्र प्रेस
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