अहमदाबाद में फर्जी केचप कारखाना सील: बिना टमाटर के बना रहे थे 'टमाटर केचप', 2,000 किलो जब्त
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद नगर निगम (एएमसी) के खाद्य सुरक्षा विभाग ने 15 अक्टूबर 2026 को शहर के बहरामपुरा इलाके में स्थित एक फूड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को सील कर दिया, जो बिना एक भी टमाटर के इस्तेमाल के, टमाटर केचप जैसा दिखने वाला उत्पाद बना रही थी। निगम ने कार्रवाई के दौरान करीब 2,000 किलोग्राम तैयार उत्पाद और कच्चा माल जब्त कर लिया है तथा प्रयोगशाला जांच के लिए एक नमूना भेजा गया है।
क्या था इस यूनिट में
'एमजेएफ फूड' नामक इस इकाई का पता सर्वे नंबर 141/142/143, प्लॉट नंबर 150 (भाग), सब-प्लॉट नंबर 20, लकी एस्टेट, पिराना सीवेज फार्म रोड, बेहरामपुरा, अहमदाबाद बताया गया है। यह कंपनी 'टेस्टी स्नैक टच अप' ब्रांड नाम से उत्पाद बेचती थी। निरीक्षण के दौरान परिसर में FSSAI रजिस्ट्रेशन नंबर 2072605400039 प्रदर्शित पाया गया।
जांच अधिकारियों के अनुसार, उत्पाद बनाने में आलू के फ्लेक्स और कॉर्न फ्लोर का उपयोग किया जा रहा था। इसके अलावा चीनी, नमक, रंग, एसिटिक एसिड, प्रिजर्वेटिव्स और स्टेबलाइजर्स भी मिलाए जाते थे। उत्पाद के निर्माण की किसी भी अवस्था में टमाटर का इस्तेमाल नहीं किया गया था, जबकि देखने और बनावट में यह बिल्कुल टमाटर केचप जैसा प्रतीत होता था।
लेबलिंग में गंभीर विसंगतियाँ
उत्पाद के लेबल पर पानी, सब्जियों का गूदा (10%), स्टेबलाइजिंग एजेंट (INS-1422 और INS-415), आयोडीन युक्त नमक, एसिडिटी रेगुलेटर (INS-260), लाल मिर्च पाउडर तथा अन्य सामग्री का उल्लेख था। हालांकि, इकाई लेबल पर दर्ज सामग्री की खरीद के बिल प्रस्तुत करने में विफल रही, जिससे यह संदेहास्पद हो गया कि वास्तव में वे सामग्रियाँ उत्पाद में थीं भी या नहीं।
अधिकारियों ने बताया कि परिसर में प्रदर्शित FSSAI विवरण और व्यावसायिक इकाई की जानकारी में कई विसंगतियाँ पाई गईं, जिनकी आगे और जांच की जा रही है। यह उत्पाद ₹100 में 5 किलो के पैक में बेचा जा रहा था।
आम उपभोक्ता पर असर
खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, इस उत्पाद की प्रस्तुति और लेबलिंग इस तरह की थी कि उपभोक्ता इसे टमाटर से बना केचप समझकर खरीद सकते थे — जो सीधे तौर पर उपभोक्ता धोखाधड़ी की श्रेणी में आता है। गौरतलब है कि बाज़ार में सस्ते दाम पर मिलने वाले इस प्रकार के उत्पाद अक्सर छोटे रेस्तराँ, ढाबों और घरेलू उपभोक्ताओं तक पहुँचते हैं, जिन्हें सामग्री की सच्चाई का पता नहीं होता।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी खाद्य व्यवसाय संचालकों के पास वैध FSSAI लाइसेंस या पंजीकरण होना अनिवार्य है। उन्हें सही विवरण प्रदर्शित करना, खरीद बिल और आवश्यक रिकॉर्ड रखना तथा उत्पाद लेबल पर सटीक जानकारी देना आवश्यक है।
अगली कानूनी कार्रवाई
विभाग ने कहा है कि 'प्रयोगशाला विश्लेषण रिपोर्ट और आगे की जांच-पड़ताल के नतीजों के आधार पर अगली कानूनी कार्रवाई की जाएगी।' निरीक्षण के बाद इकाई को सील कर दिया गया है और जब्त माल की बिक्री व वितरण पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में नकली और मिलावटी खाद्य उत्पादों के खिलाफ खाद्य नियामक एजेंसियों की सख्ती बढ़ रही है। प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट होगा कि इकाई के खिलाफ खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम (FSSAI) के तहत कितनी गंभीर धाराएँ लगाई जाएँगी।